पानी का धंधा रेलवे की सेटिंग गेटिंग से चला रहा था, इतने दिन रेल पुलिस ने क्यों छोड़ा, जांच का विषय?
ऐसे अपराधिक किस्म के तत्व स्टेशन पर सक्रिय करा रही रेलवे, बाद में पुलिस के लिए बन जाते हैं सरदर्द
सीतारामडेरा फायरिंग मामले और हथियारों के सौदागर राजीव राम को किस आधार पर दे दी गई पार्किंग, केवल, राजस्व कमाना मकसद, स्टेशन आने वाले यात्री चल रहे राम-भरोसे
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन मुख्य पार्किंग पर पेटी ठेकेदार नीरज दूबे पर हुई चर्चित फायरिंग की घटना मामले में पिछले चार दिनों पहले स्टेशन में बीस सालों से सक्रिय अवैध हॉकर संतोष उर्फ फकीरा को जेल भेज कर मामले में वाहवाही लूटने की कोशिश रेल पुलिस ने की है. सर्वविदित है कि नीरज दूबे पर फायरिंग का मामला स्टेशन में रेल नीर पानी बोतल सप्लाई के धंधे को लेकर था, जिसे अभी संतोष कर रहा है. उस मामले में घटना के बाद पुलिस ने कुछ बदमाशों की शिनाख्त करते हुए जेल की सलाखों में डाल दिया था. घटना को करीब डेढ़ साल बीत गए. अब चार दिन पूर्व इस आरोपी को साजिशकर्ता के रूप में जांच पड़ताल करते हुए जेल भेजा है.
अब स्टेशन में यह सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे अपराधियों को वाणिज्य विभाग, रेल पुलिस किस आधार पर काम करने की अनुमति दे रहा है. सूत्र बताते हैं कि संतोष ने इस घटना के बाद विभिन्न न्यायलय में अपनी बेल की अर्जी दी थी, जो नामंजूर हो गई. उसके बाद रेल पुलिस ने यह कार्रवाई की. तो सवाल यह भी उठ रहा है कि घटना के बाद स्टेशन से गायब रहने और फिर स्टेशन आकर किस आधार पर धंधा चलाना शुरू कर दिया.
संतोष का यह पानी का धंधा भी रेलवे के क़्वार्टरों से चलता है. पहले पूर्व के सिंह होटल के पीछे से और अब रेलवे संस्थान के पास से. इस कंडम क़्वार्टर का उपयोग भी एक अपराध है. नियमता इसे देखना रेलवे इंजीनियर लैंड विभाग का कार्य है. आरपीएफ का भी. इससे ऊपर बागबेड़ा थाना पुलिस का. इन्हें देखना चाहिए कि कंडम क़्वार्टर से कुछ अपराध की योजना तो नहीं सज रही है. रेलवे स्टेशन पार्किंग में भी ठीक उसी तरह राजीव राम को टेंडर राजस्व को लेकर दे दिया गया है. यह कहना गलत नहीं होगा कि रेलवे पार्किंग में अब तक जो भी मामले उजागर हो रहे हैं.
वह रेल यात्रियों के लिए भी असुरक्षा का विषय है और सीतारामडेरा में चर्चित गोलीकांड में फंसे और उत्तर प्रदेश तक हथियारों के सप्लायर के रूप में फंसने वाले राजीव राम जैसे अपराधिक तत्व को टेंडर देना फिर नीरज दूबे जैसी बड़ी घटना को दावत दे सकता है. भला हो तेज तर्रार प्रभारी रेल एसपी का जिन्होने संतोष उर्फ फकीरा को जेल भेजकर इस अनुमान को भांप लिया और उसे जेल भेजने की इजाजत दे दी. स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द यहां लक्ष्मण प्रसाद, राजू, प्रदीप चौधरी और उससे पहले रह चुके आरबी सिंह, सत्येंद्र सिंह, अरविंद सिंह, गुलाम रब्बानी जैसे सख्त लोग भेजे जाएं. अगली कड़ी में उससे जुड़े लोगों के नाम का खुलासा भी फतेह लाइव की रिपोर्ट में होगा.
