नाम वापसी के अंतिम दिन दोनों पक्ष के चार लोगों ने नामांकन लिया वापस, चुनाव संयोजक बिल्ला के साथ कमेटी में दिए गए सिकंदर
तीन साल पहले 11 वोटों से हारे थे गुरदयाल मानावाल, गुरुद्वारा और स्कूल के विकास का मुद्दा लेकर खुशीपुर को मौका दे सकती है संगत
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
जमशेदपुर में प्रधान बनने की होड़ में सबसे चर्चित गुरुद्वारों में एक टिनप्लेट 10 नंबर बस्ती गुरुद्वारा में चुनावी सरगर्मी बढ़ चुकी है. शुक्रवार को नामांकन पत्रों की नाम वापसी के अंतिम दिन दोनों समर्थकों के चार उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया. सभी उम्मीदवारों के नामांकन वापसी का पत्र कार्यालय में संयोजक बिल्ला ने रिसीव किया. इससके बाद मैदान में सुरजीत सिंह खुशीपुर और गुरदयाल सिंह मानावाल एक बार फिर आमने सामने हो गए हैं. पिछले चुनाव में भी इन दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर हुई थी, जिसमें मानावाल 11 वोटों से हार गए थे.
बहरहाल, दोनों उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद टिनप्लेट चुनावी रणक्षेत्र में रंग गया है. निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मौजूदा कमेटी की ओर से संविधान अनुसार चुनाव कमेटी का गठन किया जा चुका है. इसके संयोजक गुरचरण सिंह बिल्ला बनाये गए हैं. उनके साथ मंजीत सिंह खालसा, करमजीत सिंह कम्मे, सुरेंद्र सिंह शिंदे और कुलदीप सिंह ज्ञानी को रखा गया था. शुक्रवार को एक नाम सिकंदर सिंह फुलका का भी कमेटी में जोड़ दिया गया है. कुल मिलाकर अब कन्वेनर के साथ पांच मेंबरों पर चुनाव कराने का जिम्मा होगा.
अब 14 फरवरी को वैसाखी का दिहाड़ा मनाने के बाद चुनावी प्रक्रिया को तेज किया जायेगा. इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के दो-दो लोगों को चुनाव कमेटी में सहयोग के लिए रखा जायेगा. बहरहाल, वैसाखी के आयोजन को मौजूदा कार्यवाहक कमेटी सफल करने में जुट गई है. इस दौरान संगत के बीच तीन साल का लेखा जोखा पारदर्शी करने के साथ गुरुद्वारा के विकास और स्कूल के जीर्णोद्धार पर हुए खर्च और आगामी योजनाओं को संगत के समक्ष रखा जायेगा. गुरुद्वारा विकास और स्कूल के मुद्दे पर संगत अपना फैसला खुशीपुर के समर्थन में कर सकती है, और अगले तीन साल की सेवा देने के पक्ष में आ सकती है, यह देखने वाली बात होगी.
गुरदयाल टीम भी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार
दूसरी ओर, गुरदयाल सिंह मानावाल भी पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतर चुके हैं. वह भी मौजूदा कमेटी के कार्यकाल में खामियाँ निकालकर उन्हें पटकनी देने के लिए संगत से रु-ब-रु हो रहे हैं. उन्होंने तीन साल में गुरुद्वारा में कोई बड़ा धार्मिक आयोजन का ना होना और खालसा क्लब में तंदूर, फूलों के कार्य को अपने करीबियों को दिए जाने का मुद्दा बनाया है. कुल मिलाकर टिनप्लेट गुरुद्वारा की प्रधानगी का चुनाव इस बार भी रोचक और गरमा गर्म माहौल में देखने को मिलने वाला है. शुक्रवार को नाम वापसी के दौरान विपक्ष के लोगों ने चुनाव कमेटी के समक्ष निष्पक्ष चुनाव कराने का राग अलापा है.

