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Big News : साकची गुरुद्वारा की प्रधानगी के विवाद में आया बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने कहा – फ्रेश चुनाव होगा

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टिप्पणी भी की – धार्मिक स्थल पर शांति होनी चाहिए, दो-दो प्रधान होने ठीक नहीं 

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर में सिख समाज के लिए गुरुवार को बड़ी खबर सामने आई. जहां साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में चल रहे दो-दो प्रधानों के विवाद पर रांची हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. न्यायधीश आनंद सेन की अदालत ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट कहा कि साकची गुरुद्वारा का चुनाव नए सिरे से कराया जायेगा. साथ ही अदालत ने टिप्पणी करते हुए यह बात भी कही कि धार्मिक स्थल शांति के प्रतीक हैं और साकची में दो गुटों द्वारा अलग-अलग चुनाव कराकर दो-प्रधान बन गए हैं, जो नहीं होना चाहिए.

अदालत ने पेटिशनर से कहा है कि वह क्लाइंट से बात करें और फ्रेश चुनाव कराने के लिए सहमति लें, जिससे धार्मिक स्थल की मर्यादा बनी रहे. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद निशान सिंह गुट को बड़ा झटका लगा है. वहीं, हरविंदर सिंह मंटू गुट में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता इंद्रजीत सेन, प्रेरणा झुनझुनवाला और अमित कुमार सीजीपीसी के प्रधान भगवान सिंह, हरविंदर सिंह मंटू और सुखविंदर सिंह राजू के पक्ष से पक्ष रख रहे थे, जबकि निशान सिंह की ओर से वरीय अधिवक्ता प्रवीण शंकर दयाल और आयुष आदित्य मौजूद थे. मंटू के अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला ने कहा कि मंगलवार तक मामले का आधिकारिक आदेश निकलेगा. वहीं, इस मामले में निशान सिंह ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है. 24 मार्च को मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की गई है.

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यह है मामला

साकची गुरुद्वारा के प्रधान पद को लेकर यहां निशान सिंह और पूर्व प्रधान हरविंदर सिंह मंटू आमने सामने थे. गत साल 2025 में चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई तो दोनों गुटों में खूब खिंचतान हुई. इसी बीच निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर मंटू सीजीपीसी के पास गए. निशान सिंह गुट ने अपने संविधान के तहत चुनाव कराने का दावा किया और उसी को लेकर जिच बढ़ती चली गई. आलम यह हुआ कि साकची के कंवेनर और सीजीपीसी ने अपने हिसाब से चुनाव प्रक्रिया कराई. साकची में निशान सिंह को प्रधान बना दिया गया और सीजीपीसी की चुनावी प्रक्रिया में मंटू बैलेट पेपर के जरिये हुए चुनाव में विजयी घोषित हो गए. इसके बाद मामला कोर्ट गया. जहां निशान सिंह की याचिका कि वह संविधान के तहत प्रधान बनाये गए हैं को सीजीपीसी और उम्मीदवार हरविंदर सिंह मंटू ने चुनौती दी.

इसके बाद अन्य उम्मीदवार सुखविंदर सिंह राजू भी हाईकोर्ट की शरण पहुंचे और दावा किया कि उनका नॉमिनेशन, जो 51 हजार रूपये जमा लिए गए थे वह कहां गए. यह मामला हाईकोर्ट में लंबित था. इधर, निशान सिंह की टीम ने गुरुद्वारा का प्रबंधन जारी रखा हुआ है और मंटू भी खुद को प्रधान बता रहे हैं. इसे लेकर संगत के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई है. बहरहाल, साकची कमेटी के विवाद में कई हिंसक घटनायें भी हुई थी. शहीदी जागृति यात्रा के दौरान गुरुद्वारा की दयोड़ी साहेब में हुई मारपीट मामले में भी पुलिस पहले ही मंटू खेमे को सुपरविजन में क्लीन चिट दे चुकी है. अब यह हाईकोर्ट का फैसला भी निशान सिंह खेमे को झटका देने वाला बना है.

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