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Sakchi Gurudwara : निशान सिंह को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने याचिका को किया रद्द

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मंटू समर्थकों में खुशी की लहर, बोले – सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के सिखों के आस्था के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की प्रधानगी के विवाद में निशान सिंह और उनकी टीम को बड़ा झटका लगा. मंगलवार को रांची हाईकोर्ट में साकची के दो प्रधानों के विवाद में सुनवाई करते हुए न्यायधीश आनंदा सेन की अदालत ने निशान सिंह की दायर याचिका को रद्द कर दिया है. इस याचिका का केस नंबर wpc/0002704/25 था. न्यायलय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस याचिका का कोई औचित्य ही नहीं है. जमशेदपुर एसडीएम ने विधी व्यवस्था को देखते हुए जो निर्णय लिया था, वह सही था. गत छह जून 2025 को निशान सिंह ने डीसी, सीजीपीसी और हरविंदर सिंह मंटू को पार्टी बनाते हुए याचिका दायर कर कहा था कि उनके संविधान के तहत चुनाव हो चुके हैं और वे प्रधान हैं.

बहरहाल, इससे पूर्व गत 19 मार्च को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह कहा था कि गुरुद्वारा शांति का प्रतीक होते हैं. जहां दो-दो प्रधान नहीं हो सकते. कोर्ट ने निशान सिंह के अधिवक्ता को निर्देश दिए थे कि दोनों पक्ष के बीच फ्रेश चुनाव करा दिया जाये, लेकिन निशान सिंह की ओर से इसे नकार दिया गया था. अत: मंगलवार को कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुनाया. इस फैसले को सुनने के बाद मंटू समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. जोगिंदर सिंह जोगी और अन्य ने कहा कि सच पराजित हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. मंटू के वरीय अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला ने फतेह लाइव को भी इसकी पुष्टि की है.

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सुनवाई के दौरान हरविंदर सिंह मंटू की ओर से वरीय अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, प्रेरणा झुनझुनवाला, अमित कुमार और निशान सिंह की ओर से आयुष आदित्य ने बहस की. इस मौके पर एक पक्ष हरविंदर सिंह मंटू, जोगिंदर सिंह जोगी, सुखविंदर सिंह राजू, अजीत गंभीर, वजीर सिंह, कृतराज सिंह रॉकी, एसपी काले, बंटी सिंह आदि एवं निशान सिंह की ओर से उनके कन्वेनर सतिन्दर सिंह रोमी हाईकोर्ट में मौजूद रहे. इस फैसले की जजमेंट कॉपी बुधवार को निकलने के बाद सीजीपीसी और हरविंदर सिंह मंटू अपनी अगली चाल चलने की रणनीति बनाने की तैयारी में जुट गए हैं. इस मामले में निशान सिंह का पक्ष लेने के लिए उन्हें कॉल किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

यह है मामला

साकची गुरुद्वारा के प्रधान पद को लेकर यहां निशान सिंह और पूर्व प्रधान हरविंदर सिंह मंटू आमने सामने थे. गत साल 2025 में चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई तो दोनों गुटों में खूब खिंचतान हुई. इसी बीच निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर मंटू सीजीपीसी के पास गए. निशान सिंह गुट ने अपने संविधान के तहत चुनाव कराने का दावा किया और उसी को लेकर जिच बढ़ती चली गई. आलम यह हुआ कि साकची के कंवेनर और सीजीपीसी ने अपने हिसाब से चुनाव प्रक्रिया कराई. साकची में निशान सिंह को प्रधान बना दिया गया और सीजीपीसी की चुनावी प्रक्रिया में मंटू बैलेट पेपर के जरिये हुए चुनाव में विजयी घोषित हो गए. इसके बाद मामला कोर्ट गया. जहां निशान सिंह की याचिका कि वह संविधान के तहत प्रधान बनाये गए हैं को सीजीपीसी और उम्मीदवार हरविंदर सिंह मंटू ने चुनौती दी. इसके बाद अन्य उम्मीदवार सुखविंदर सिंह राजू भी हाईकोर्ट की शरण पहुंचे और दावा किया कि उनका नॉमिनेशन, जो 51 हजार रूपये जमा लिए गए थे, वह कहां गए. यह मामला हाईकोर्ट में लंबित था.

इधर, निशान सिंह की टीम ने गुरुद्वारा का प्रबंधन जारी रखा हुआ है और मंटू भी खुद को प्रधान बता रहे थे. इसे लेकर संगत के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई है. मालूम हो कि साकची कमेटी के विवाद में कई हिंसक घटनायें भी हुई थी. शहीदी जागृति यात्रा के दौरान गुरुद्वारा की दयोड़ी साहेब में हुई मारपीट मामले में भी पुलिस पहले ही मंटू खेमे को सुपरविजन में क्लीन चिट दे चुकी है. तब यह हाईकोर्ट का फैसला भी निशान सिंह खेमे को झटका देने वाला बना है, लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद संगत की नजरें और पैनी निगाह यहां जा टिकी हैं. बहरहाल, विरोधी गुट न्यायलय के फैसले पर सोशल मीडिया में निशान सिंह के पक्ष में फैसला आने की बधाई देने में लगा है, जिससे बुधवार को जजमेंट कॉपी निकलने पर ही सच सबके सामने आएगा.

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