- एक विशेष एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया में जोड़ी गयी अलग से शर्तें !
- जेम पोर्टल पर भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच संबंधों की जांच की भी उठ रही है मांग
फतेह लाइव, रिपोर्टर,
जमशेदपुर के सदर अस्पताल में दवाओं की खरीद में बड़ा गोलमाल सामने आया है. इस साल कुछ चुनिंदा दवाओं की खरीद पिछले साल से सात गुणा अधिक मूल्य पर की गयी है. इसके बाद इस खरीद प्रक्रिया पर यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या एक साल में चुनिंदा दवा की कीमतों में सात गुना तक उछाल आ गया है ? अथवा खरीद प्रक्रिया में शामिल लोगों ने एजेंसी से मिलीभगत कर दवा का मूल्य जरूरत से अधिक बना दिया.
अगर ऐसा हुआ है यह सीधे-सीधे सरकार के राजस्व का चूना लगाने का मामला भी बनता है, जिसकी सच्चाई निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है. दवाओं की यह खरीद NCD और मेंटल हेल्थ यूनिट के लिए की गयी है जो लाखों में हैं. खरीद की प्रक्रिया कहने के लिए तो जेम पोर्टल पर टेंडर जारी कर की गयी, लेकिन बताया तो यहां तक जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया एक विशेष एजेंसी को ध्यान में रखकर तैयार की गयी थी और उक्त एजेंसी को फायदा पहुंचाने और दूसरे सप्लायरों को दौड़ से बाहर रखने के लिए टेंडर में कुछ विशेष शर्ते जोड़ दी गयी.
फतेह लाइव को मिली सूचनाओं के अनुसार क्रय समिति ने 2025-2026 के लिए जिन दवाओं की खरीद की है वह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-2025 के खरीद मूल्य से तीन से सात गुना तक अधिक है. अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या इन दवाओं की कीमत एक साल में सात गुना तक बढ़ गयी या क्रिय समिति व एजेंसी की मिलीभगत से इसे लाभ का सौदा बना दिया गया. यहां यह बताना जरूरी है कि दवा की खरीद MRP मूल्य से कम पर की जानी है.
अब तक जो सामने आया है उसके अनुसार मेंटल हेल्थ में काम आने वाली दवा Resperid on 4mg की खरीद पिछले साल 0.90 पैसे में की गयी थी जबकि इस साल इसे 6.36 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा गया है. इसी तरह olanzapine 10 mg 0.58 के स्थान पर 6.76 रुपये, Sodium valporab 500 को 2.45 रुपये प्रति यूनिट की जगह 7.73 रुपये में खरीदा गया. ये ताे मात्र उदाहरण है कि ऐसी कई अन्य दवाओं की खरीद तीन से सात गुना अधिक कीमत पर की गयी है. इस तरह सैकड़ों दवाओं की खरीद की गयी है.
दवा की खरीद में हुए बड़े गोलमाल की चर्चा अब जिला में मेडिसिन सप्लाई चेन से जुड़े लोग भी करने लगे हैं. नाम नहीं लिखने की शर्त पर एक सप्लायर ने बताया कि दवा की कीमतों में दो-तीन साल में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, अलबत्ता सरकार से राहत मिलने पर कई दवा की कीमतें कम हुई है. इसके बावजूद सदर अस्पताल में ऊंची कीमत पर दवा की खरीद को स्वीकृति देना अपने आप में बड़ा सवाल है. कहां जा रहा है कि दवा की खरीद बड़े स्तर पर गोलमाल हुआ है जो बड़े बंदरबांट की ओर इशारा कर रहा है. इसकी जांच होनी चाहिए.
दवा सप्लाई में हिस्सा लेने वाली कंपनियों की जांच की मांग
सदर अस्पताल में दवा खरीद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जेम पोर्टल पर दवा खरीद प्रक्रिया की शामिल एजेंसियों की भी जांच की मांग उठने लगी है. अनुमान लगाया जा रहा है कि एक ही समूह ने अलग-अलग नाम से प्रतिष्ठान बनाकर टेंडर में हिस्सा लिया और न्यूनतम बोली लगाकर टेंडर हासिल कर लिया गया है. कुछ सप्लयारों का कहना है कि टेंडर में शामिल सभी एजेंसियों के टेंडर डक्यूमेंट सूचना अधिकार से मांगें जायेंगे और पूरी जांच की मांग की जायेगी.
एमजीएम में इस तरह की खरीद पर दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
एमजीएम अस्पताल में अनुमानित मूल्य से अधिक पर सामान खरीदने के मामले में एजेंसी पर प्राथमिकी तक दर्ज हो चुकी है. उक्त मामले में क्रय समिति के लोगों पर भी कार्रवाई हुई थी. यह मामला अब भी जांच के दायरे में है, जिसमें आला अधिकारियों पर भी जांच व कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी.



