कमेटी मीटिंग की शुरुआत में वेज पर टुन्नू, सतीश और शैलेश से चाहते थे जवाब
श्याम सुंदर के जबरन माइक पकड़ने के बाद एनएस का विरोध पड़ गया मद्धिम
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
टाटा स्टील में तकरीबन डेढ़ साल से लंबित वेज रिवीजन के मसले पर न्यू सीरीज के कमेटी मेंबरों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व की तगड़ी घेराबंदी की रणनीति बनाई थी। गुरुवार को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में कमेटी मीटिंग शुरू होने के पहले एनएस ग्रेड के कमेटी मेंबरों ने यूनियन के शीर्ष नेतृत्व को घेरने का प्रयास किया। मांग उठाई कि यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू, महामंत्री सतीश कुमार सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह वेज रिवीजन की वार्ता की अद्यतन प्रगति को हाउस के सामने रखे।
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यूनियन का शीर्ष नेतृत्व ऐसा नहीं चाह रहा था। इसी बीच एनएस से ही आने वाले श्याम सुंदर गोप जबरन मंच पर चढ़ गए। माइक थाम लिया। यद्यपि, एनएस के कमेटी मेंबर ही श्याम सुंदर गोप से मंच से नीचे उतरने को कहते रहे। श्याम सुंदर नहीं माने। इस कारण आखिरकार यूनियन के शीर्ष नेतृत्व को घेरने की रणनीति विफल हो गई। अब श्याम सुंदर गोप विशेष कर एनएस ग्रेड के कमेटी मेंबरों के साथ कर्मचारियों के निशाने पर आ गए हैं।
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श्याम सुंदर गोप टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में टाटा पीएफ ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। यूनियन के डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह के बेहद नजदीकी में शुमार हैं। टाटा वर्कर्स यूनियन में उन्हें शैलेश कुमार सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किया जाता रहा है। उन्हें शैलेश कुमार सिंह के नजदीक ही विशाल क्वार्टर कंपनी से मिला भी है। यूनियन की ताजा सियासत में शैलेश कुमार सिंह खुलेआम यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी के साथ हैं।
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शैलेश के बेहद करीबी लोग भी यूनियन अध्यक्ष के साथ कदमताल कर रहे हैं जिनमें श्याम सुंदर गोप भी हैं। कुछ महीने पहले श्याम सुंदर पर टाटा पीएफ ट्रस्ट में कुछ गोलमाल के आरोप लगे है जिसकी कंपनी द्वारा जांच कराई जा रही है।
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सोशल मीडिया के जरिए सियासत की तो उसमें भी एनएस का हुआ बिखराव
एकाध महीने पहले श्याम सुंदर गोप ने सोशल मीडिया के जरिए टाटा वर्कर्स यूनियन की अंदरूनी राजनीति में हलचल मचाई थी। उन्होंने व्हाटसअप पर यूनियन के ऑफिस बेयरर्स और कमेटी मेंबरों का नया ग्रुप बनाया। यूनियन उपाध्यक्ष संजीव कुमार तिवारी वो पहले शख्स हैं जो एनएस से ऑफिस बेयरर्स बने थे। फिलहाल यूनियन के सहायक सचिव श्याम बाबू भी एनएस से आते हैं।
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श्याम सुंदर गोप ने अपने वाट्सअप ग्रुप में संजीव कुमार तिवारी को नहीं शामिल किया जबकि श्याम बाबू को जगह दी। पहली बार टाटा वर्कर्स यूनियन में एनएस में सार्वजनिक तौर पर बिखराव नजर आया। श्याम बाबू ने इसे भांप लिया। सो, कुछ दिन बाद वो खुद श्याम सुंदर गोप द्वारा बनाए गए वाट्सअप ग्रुप से बाहर निकल गए।
श्याम सुंदर गोप द्वारा सोशल मीडिया के जरिए शुरू की गई कवायद से लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग तक हुए घटनाक्रम को एनएस के कमेटी मेंबर से लेकर कर्मचारी तक एक कड़ी के तौर पर जोड़ कर देख रहे हैं। वेज के मसले पर कर्मचारियों का दबाव है कि एनएस के ऑफिस बेयरर्स से लेकर कमेटी मेंबर और एकजुट हो। मगर यहां तो बिखराव है। कब? क्यों? कैसे? टाटा स्टील के कारखाना के भीतर विवेचना का दौर शुरू है। और शोर भी।
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