1 से 3 दिसंबर तक दिल्ली में होगा इंटक का 34वां जनरल काउंसिल, करीब 100 कमेटी मेंबरों को मिलेंगे 17,500 रुपये; इंटक को 25 लाख रुपये का चंदा देने की तैयारी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
टाटा वर्कर्स यूनियन दिसंबर में दिल्ली में होने वाले इंटक के 34वें जनरल काउंसिल में भाग लेने के लिए करीब 50 लाख रुपये खर्च करने जा रही है। यह राशि कर्मचारियों के चंदे से जमा यूनियन के कोष से खर्च की जाएगी। एक ओर यूनियन के करीब 100 कमेटी मेंबरों को दिल्ली जाने के लिए 17,500 रुपये प्रति सदस्य देने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर इंटक को चंदे के रूप में 25 लाख रुपये देने की बात सामने आई है। ऐसे में आगामी यूनियन चुनाव से पहले इस खर्च और प्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।
इंटक का 34वां जनरल काउंसिल 1 से 3 दिसंबर तक दिल्ली में आयोजित होगा। डॉ. जी. संजीव रेड्डी की अध्यक्षता में होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से इंटक के पदाधिकारी और डेलिगेट्स शामिल होंगे। टाटा वर्कर्स यूनियन के 11 पदाधिकारी और करीब 100 कमेटी मेंबर भी इसमें हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
हर कमेटी मेंबर को 17,500 रुपये, 7 दिन का स्पेशल लीव
अधिवेशन में शामिल होने वाले प्रत्येक कमेटी मेंबर को 17,500 रुपये दिए जाने की बात कही जा रही है। इसे अब तक की सबसे अधिक राशि बताया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक कमेटी मेंबर को 7 दिन का स्पेशल लीव दिया जाएगा। अधिवेशन के लिए लगने वाला 1,000 रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज भी यूनियन की ओर से वहन किया जाएगा। पदाधिकारियों के आने-जाने के खर्च सहित अन्य मदों को मिलाकर यूनियन का खर्च करीब 22 से 23 लाख रुपये होने का अनुमान है।
इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष की ओर से इंटक को चंदे के रूप में 25 लाख रुपये का चेक दिए जाने की बात सामने आई है। दोनों राशियों को जोड़ने पर कुल खर्च करीब 50 लाख रुपये बैठता है। यह राशि कर्मचारियों के चंदे से जमा होने के कारण यूनियन के खर्च और उसके औचित्य पर चर्चा महत्वपूर्ण हो जाती है।
चुनाव से 2 से 3 महीने पहले जुटेंगे कमेटी मेंबर
टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव अगले 2 से 3 महीने में होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अधिवेशन में करीब 100 कमेटी मेंबरों की भागीदारी को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस भागीदारी के पीछे यूनियन नेतृत्व की मंशा को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष जानना जरूरी होगा।
मलेशिया में होने वाले ILO कार्यक्रम का भी मिला आमंत्रण
इसी बीच इंटक अध्यक्ष डॉ. जी. संजीव रेड्डी की ओर से टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी को मलेशिया में होने वाले ILO कार्यक्रम के लिए आमंत्रण भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इस आमंत्रण के बाद यूनियन के कई कमेटी मेंबरों ने अध्यक्ष को बधाई दी और उनके नेतृत्व तथा कार्यशैली की सराहना की।
कमेटी मेंबरों ने अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी के कार्यकाल में मजदूर हित में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके ग्रेड रिवीजन, कैंटीन व्यवस्था और न्यू सीरीज के वेतन में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर उनकी बारगेनिंग क्षमता की प्रशंसा की। कुछ कमेटी मेंबरों ने तो उन्हें स्वर्गीय गोपाल बाबू के बराबर का दर्जा तक दिया।
व्हाट्सएप ग्रुप में हुई अध्यक्ष की तारीफ
अध्यक्ष के समर्थन और उनके कार्यकाल की सराहना करने वाले कमेटी मेंबरों में शामिल बताए गए नाम इस प्रकार हैं—
- संतोष कुमार पांडे — सिन्टर प्लांट 4
- ओम प्रकाश शर्मा — एकाउंट्स डिविजन
- विभाष शुक्ला — कोक प्लांट
- अरविंद यादव — कोक प्लांट
- राजेश कुमार — फील्ड मैकेनिकल मेंटेनेंस
- सरोज कुमार सिंह — ट्यूब डिवीजन
- विवेक विक्की राय — फील्ड मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिकल
- निशांत जयसवाल — फील्ड मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिकल
- निरंजन प्रसाद — LD1
- गुलाब चंद यादव — CRM
- शैलेंद्र राय — साइंटिफिक सर्विसेज
इन कमेटी मेंबरों ने यूनियन के व्हाट्सएप ग्रुप में अध्यक्ष के समर्थन में नारे लगाए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये सभी कमेटी मेंबर दिल्ली में होने वाले इंटक के अधिवेशन में हिस्सा लेंगे।
खर्च और उपलब्धियों के बीच उठेंगे सवाल
करीब 50 लाख रुपये के प्रस्तावित खर्च में एक तरफ कमेटी मेंबरों और पदाधिकारियों के दिल्ली आने-जाने तथा अधिवेशन में भागीदारी का खर्च शामिल है, तो दूसरी तरफ इंटक को 25 लाख रुपये का चंदा देने की बात है। चूंकि यह राशि कर्मचारियों के चंदे से जमा हुई है, इसलिए खर्च का पूरा ब्योरा, राशि के इस्तेमाल का औचित्य और यूनियन की औपचारिक मंजूरी महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
अधिवेशन से पहले अध्यक्ष की प्रशंसा और आगामी चुनाव की संभावित समयसीमा ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूनियन इस खर्च के संबंध में क्या आधिकारिक जानकारी देती है और कर्मचारियों के बीच इसे किस रूप में देखा जाता है।


































