Fake journalists spoiled the move of the real Ones : कौन चला रहा पत्रकार बनाने की फैक्ट्री?

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नकली के कारनामों से शर्मशार हो रहे असली

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर पुलिस जरा संभलिए क्यों कि अब कोई दोपहिया और कार पर प्रेस का लोगो लगाकर दे रहा है चमकी तो कोई शराब कारोबारी तो कोई अवैध धंधा से बचने को कर रहा प्रेस के लोगो का उपयोग. यूं तो झारखंड के हर जिले में ऐसा हो रहा है लेकिन जमशेदपुर में फर्जी पत्रकार बनने की एक होड़ मची हुई है. वाहन में प्रेस लिखवाना तो एक ट्रेंड ही बन गया है. कोई प्रेस का लोगो लगाकर शराब का कारोबार कर रहा है तो कोई अवैध धंधा या फिर अपराधियों का संरक्षक बना फिर रहा है तो कोई थानों में दलाली का काम कर रहा है. कुछ फर्जी किस्म के लोग तो केवल पुलिस की चेकिंग मात्र से बचने और कॉलर टाइट करने के लिए ही वाहनों पर प्रेस लिखवाकर धमाचौकड़ी करते नजर आ रहे हैं.

बुधवार को परसुडीह थाना क्षेत्र खासमहल मोड़ के पास शराब दुकान में तब अफरा-तफरी मच गई. जब शहर के एक प्रतिष्ठित चैनल का लोगो और प्रेस का स्टीकर लगाकर एक युवक बाइक पर आया और दुकान के अंदर ठाठ से घुस गया. फिर बाहर निकलकर वह दुकान की फोटो लेने लगा. वहीं खड़े अन्य पत्रकारों को उसकी यह लीला रास नहीं आई और उसे शराब दुकान से बुलाकर लोगो लगाने के उद्देश्य की जानकारी ली गई. उसने प्रतिष्ठित न्यूज चैनल का खुद को पत्रकार बताया. बाद में यह भी बताया कि वह शराब दुकान के लिए भी काम करता है.

अब यहां जानने वाली बात है कि शराब दुकान वर्तमान परिस्थितियों में सरकार चला रही है और उसमें काम करने का कोई आईडी उसके पास नहीं था और ना ही प्रेस में काम करने का. इस मामले में शहर के उस प्रतिष्ठित प्रेस प्रबंधन से बात भी हुई. खैर यह मामला तो दब गया लेकिन ऐसे कितने ही फर्जी प्रेस लिखवाकर सड़क की खाक छानने वाले लोग हैं जिसके प्रति ना तो कोई प्रेस क्लब गंभीर है और ना ही जिला प्रशासन का जनसम्पर्क विभाग, जिससे चौथे स्तंभ की साख धूमिल हो रही है.

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वाहन चेकिंग पॉइंट से बचने के लिए लगाया फर्जी प्रेस का लोगो

शहर में वाहन चेकिंग अभियान इन दिनों सुर्खियों में हैं. जिला प्रशासन अगर चाहे तो इस अभियान में वाहन पर प्रेस लिखे वाहनों को गंभीरता से जांच करे, यह एक अतिरिक्त ड्यूटी जवानो पर पड़ सकती है, जैसे कि वह ओडी, बंगाल के नंबर और सीधे-साधे आदिवासी लोगों को पकड़ने में जो अपनी एनर्जी लगाते हैं. ऐसे में फर्जी प्रेस लिखे वाहनों को पकड़कर भी काफी राजस्व कमाया जा सकता है, जिससे प्रेस की साख मजबूत होगी और फर्जीवाड़ा भी बंद होगा. लेकिन पुलिस कुछ अपंग लोगों को सर में चढ़ा कर रखती है. बता दें कि टाटानगर पार्सल में भी प्रेस लिखे वाहन से घूमकर पुलिस को तथाकथित लोग खुश कर रहे हैं.

फतेह लाईव पहले ही कर चुका है एक जाली पत्रकार का खुलासा

फतेह लाईव ने पहले भी एक फर्जी पत्रकार रवि पांडेय का खुलासा किया था जिसको खुद एस.एस.पी अनूप बिरथरे ने जेल‌ भिजवाया था. फिलहाल रवि पांडेय जैसे कुछ लोग हैं जो अपराध जगत से जुड़े हुए हैं और पत्रकार बने घूम रहे हैं यह पूरे पत्रकारिता जगत के मुंह पर तमाचा है. पांडेय फिलहाल जाली पत्रकार ही नहीं बल्कि सट्टा और हब्बा-डब्बा चलाने वालों का लाईजनर भी बना हुआ है. इस व्यक्ति को प्रेस का P भी नहीं पता और आईडी कार्ड लेकर दिनभर वसूली में घूमते नजर आता है. सरायकेला-खरसंवा जिला में तो‌ एक तथाकथित पत्रकार को बकायदा एक पुलिस अधिकारी के वसूली कर्ता के रूप में ही चर्चित जाना जाता था, बल्कि लाखों की संपत्ति भी अर्जित कर चुका था. ये बात उस जिला के सारे थानेदार और पत्रकारों को भी पता थी फिर भी आज तक उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए बल्कि बहुत से पत्रकार उसे अपना नेता भी मानते रहे.

पुलिस और प्रशासन ये करें उपाय

झारखंड में सभी जिलों में पत्रकारों व मीडियाकर्मियों का निबंधन जिलास्तर पर जनसंपर्क कार्यालय में हो जहां पत्रकारों का डाटा जिला प्रशासन को भी उपलब्ध कराया जाए.इससे वाहनों पर प्रेस और फर्जी पत्रकारों के जनक और लघु उद्योग की काफी रोकथाम होगी. झारखंड सरकार को भी राज्य में पत्रकारों की संख्या का पता चलेगा ताकि भविष्य में बीमा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं से फर्जी पत्रकार को लाभान्वित होने से रोका जा सकेगा.

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