ईस्ट जोन की संगत को एकजुट करके गुरु नानक जी के ऐतिहासिक चरण स्पर्श स्थल का करेंगे विकास – सग्गू

कुलविंदर चेयरमैन, मंजीत महासचिव एवं नरेंद्रपाल बने कोषाध्यक्ष

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

पश्चिम बंगाल के श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा खड़गपुर एवं गुरुद्वारा नानकसर चंद्रकोना साहेब के नए प्रधान इंद्रजीत सिंह सग्गू निर्वाचित हुए हैं. गत 23 मार्च को खड़गपुर में हुए चुनाव में सग्गू को 17 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वन्दवी गुरदीप सिंह सेखों को तीन मत ही प्राप्त हुए. गुरुद्वारा के मेंबरों ने बैलेट पेपर से चुनाव किया था.

उसी दिन निर्वाचित प्रधान इंद्रजीत सिंह सग्गू ने कमेटी का विस्तार करते हुए मंजीत सिंह सलूजा को महासचिव, नरेंद्रपाल सिंह को कोषाध्यक्ष और कुलविंदर सिंह धामी को चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंपी. मौके पर गुरदीप सिंह, हरप्रीत सिंह मथारू समेत काफी संख्या में संगत उपस्थित थी. बता दें कि इससे पूर्व जितेंद्र सिंह यहां प्रधान थे. उन्होंने नौ वर्षों तक सेवा निभाई. अब उनकी तबियत ठीक नहीं है और वे पंजाब कूच कर गए हैं.

इंद्रजीत सिंह को ईस्ट जोन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल चंद्रकोना साहेब के साथ खड़गपुर का प्रधान बनाये जाने को लेकर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, महासचिव अमरजीत सिंह, गुरचरण सिंह बिल्ला, गुरमीत सिंह, परविंदर सिंह सोहल, सुखविंदर सिंह राजू, सुखदेव सिंह बिट्टू, सुरेंद्र सिंह शिंदे, नौजवान सभा के प्रधान अमरीक सिंह एंड टीम, सिख स्त्री सत्संग सभा की प्रधान बीबी रविंद्र कौर एंड टीम ने बधाई दी है. सभी ने नए प्रधान को जमशेदपुर की सिख संगत की ओर से गुरु घर की सेवा संभाल में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है.

साथ ही खड़गपुर के नए प्रधान सग्गू ने फतेह लाइव  को बताया कि वे जल्द ही ईस्ट जोन की संगत के साथ बैठक करके ऐतिहासिक गुरुद्वारा के विकास का रोड मैप तैयार करेंगे, तांकि पूर्व की भांति ज्यादा से ज्यादा संगत गुरुद्वारा के दर्शन कर सकें और गुरु घर की खुशियां प्राप्त कर सके. उन्होंने कहा कि खड़गपुर में 120 सिख परिवार निवास करते हैं. यहां रेल की जमीन पर गुरुद्वारा है. दूसरी जगह तलाशने का कार्य तेज किया जायेगा और गुरुद्वारा का विकास एवं शिक्षा के लिए विशेष कार्य करना उनकी प्राथमिकता होगी.

इसी के साथ ही चंद्रकोना गुरुद्वारा में संगत के लिए यात्री निवास, पार्किंग आदि कार्यों में तेजी लाई जाएगी. यहां 1505 में श्री गुरु नानक देव जी का आगमन हुआ था. उसके बाद यहां के राजा चंद्रकंतु ने बाबा जी को जमीन दान दी थी. उस जमीन को गुरुद्वारा के विकास में उपयोग किया जायेगा. इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कार्य टीम के साथ करेंगे. ईस्ट जोन के बड़े बड़े गुरुद्वारों के साथ बैठक कर उन्हें भी इस मुहिम में शामिल किया जायेगा.

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