पर्शियन बिल्ली की चाहत ज्यादा, बुद्धिमान इतनी कि खिलौना से खूब खेलती
दो साल पूर्व डॉक्टर के पास एक माह में 4 बीमार बिल्ली आती थी, अब एक दिन में चार
कुत्ता हो या बिल्ली, ठंड शुरू होने के पहले वायरल का ले लेना चाहिए टीका
एस वंदना.
टाटा के शहर में कुत्तों को पालने का शौक रहा है. टाटा समूह की कंपनी टाटा स्टील ने जुबली पार्क के पास बाकायदा डॉग सेंटर बनाया है. जहां बेहतरीन नस्ल के कुत्ते हैं. हरेक साल यहां डॉग शो का आयोजन भी होता है, जिसमें झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों से लोग अपने कुत्ते लेकर आते हैं, उनके प्रदर्शन दिखाते हैं. मगर पिछले कुछ सालों से टाटानगरी में कुत्तों की जगह बिल्ली पालने का चलन बढ़ा है. घरों में कुत्ता की जगह बिल्ली घूम रही है, जो कहा जा रहा है, वो सुन रही है, समझ रही है.
डॉक्टर दीपक कुमार महतो को जानवरों का इलाज करते 40 साल गुजर चुके हैं. बताते हैं कि पहले उनके पास इलाज के लिए एक माह में चार बिल्लियां आती थी. अब एक दिन में चार. ऐसा लगता है कि अमेरिका की तरह यहां भी तेजी से बिल्लियां लोगों के परिवार का सदस्य बन रही हैं. जुगसलाई के प्रांतीय पशु चिकित्सालय की डॉक्टर पूर्णिमा रानी की भी मानें तो अब लोगों में बिल्ली पालने का शौक बढ़ा है. पहले सरकारी पशु चिकित्सालय में कभी कभार ही लोग बिल्ली लेकर आते थे. अभी ठंड में इलाज के लिए लगातार लोग बिल्ली लेकर आ रहे हैं. मतलब निकट भविष्य में दोस्तों के घरों में जाएंगे तो म्याऊं म्याऊं की आवाज जरूर सुनने को पाएंगे.
गुरुवार की शाम बिष्टुपुर में प्रतिष्ठान डॉगी ओए के बगल में डॉक्टर दीपक कुमार महतो अपनी केबिन में बैठे थे तो दो युवतियां बिल्ली के कुछ बच्चों को लेकर आईं. उन्होंने बताया कि बिल्लियों को लगातार उल्टी हो रही है, पतले दस्त की भी शिकायत है. डॉक्टर ने आला लगा कर जांच की. इंजेक्शन लगाया. ठंड से बचाव की हिदायत के साथ कुछ दवाएं भी दी. डॉक्टर दीपक कुमार महतो ने बताया कि कुत्ता हो या बिल्ली, ठंड के मौसम में उन्हें वायरल से संबंधित बीमारी अधिक होती हैं. उल्टी और दस्त आम है. बेहतर होगा कि अक्टूबर में वायरल से बचाव का टीका लगा लीजिए. राहत रहेगी.
डॉक्टर महतो ने बताया कि पर्शियन बिल्ली पसंद करने का कारण भी है. पहले दिन से ही वे घर को गंदा नहीं करती. उन्हें जो जगह बता दी जाती है, वही मल मूत्र का त्याग करती हैं. सफाई पसंद होने के अलावा खेलकूद में भी उन्हें बहुत मजा आता है. खिलौना दीजिए तो दिन भर खेलती रहेंगी. उनके खिलौने खूब बिकते हैं. ऐसा नहीं है कि देसी बिल्ली समझदार नहीं होती. सिखाने पर वे भी जल्दी निर्देशों का पालन करने लगती हैं. ऐसा लगता है कि जो लोग डॉग को पसंद नहीं करते अथवा जिनके यहां डॉग को पालने की सुविधाएं नहीं हैं, उनका झुकाव बिल्ली की ओर है.
ठंड ज्यादा हो तो कुत्ता या बिल्ली को नहलाए नहीं
डॉक्टर दीपक कुमार महतो ने बताया कि अभी ठंड बहुत ज्यादा है. बेहतर होगा कि कुत्ता या बिल्ली को नहीं नहलाए. यदि गंदा हो गए हो तो उन्हें स्पंज से पोछ सकते हैं. ड्राई बाथ के लिए बहुत सारी चीजें बाजार में हैं. यदि मन नहीं भरता हो या उन्हें खुशबूदार बनाए रखना चाहते हैं तो आसानी से बहुत चीजें मिल जाएंगी. यदि तत्काल कुछ न मिले तो सेवलॉन का स्प्रे भी फायदेमंद है. डॉक्टर दीपक कुमार महतो की मानें तो डॉग को ठंड में खाने के लिए मांस जरूर दिया जाना चाहिए. कारण कि शाकाहारी जानवरों की तरह उनकी आंत बहुत लंबी नहीं होती. आंत की लंबाई छोटी होने के कारण प्रोटीन के लिए मांस उनके लिए लाभकारी है, जो लोग मांस नहीं खाते हैं, शाकाहारी परिवार है तो बाजार में डॉग फूड मिल जाएंगे. उन्होंने बताया कि टाटा नगरी में लेब्रा की मांग सबसे अधिक है. यह बेहद पारिवारिक है. आक्रामक नहीं होता. परिवार की भावनाओं को महसूस करता है. इस वजह से सबसे अधिक लोग लेब्रा पालते हैं. इसके अलावा और नस्ल के डॉग भी यहां लोगों के घरों में दिख जाएंगे.
मेनका गांधी के अस्पताल में दो साल रहे तो बढ़ा ज्ञान
डॉक्टर दीपक कुमार महतो ने रांची वेटनरी कॉलेज में पढ़ाई की है. 40 साल पहले. वे बताते हैं, उस वक्त उन लोगों को कुत्तों की बीमारी के बारे में बहुत कुछ नहीं पढ़ाया गया. गाय, भैंस समेत कुछ जानवरों की बीमारी के बारे में ज्ञान मिला था. कालांतर में उन्होंने महसूस किया कि जानवरों की चिकित्सा के बारे में ज्ञान बढ़ाने के लिए कुछ और करना होगा. वे दो साल तक दिल्ली में मेनका गांधी के पशु अस्पताल में रहे.
वहां उन्हें कुत्ता, बिल्ली, खरगोश समेत कई जानवरों और पक्षियों की बीमारी एवं इलाज के बारे में ज्ञान हासिल हुआ. विश्व स्तरीय पशु चिकित्सा सम्मेलनों में लगातार जाते रहते है ताकि नई दवाओं के बारे में जानकारी मिल सके. इतना जरूर है कि पशु या पक्षी पालने में लोगों की रूचि बढ़ी है. उनकी बेहतरी के लिए अब लोग खर्च करने से नहीं हिचक रहे हैं. सब अच्छा संकेत है.
