तीन उम्मीदवारों को बांटे गए चुनाव चिह्न, 1475 मतदाता चुनेंगे अपना नया प्रधान

Jamshedpur.
टिनप्लेट गुरुद्वारा के प्रधान पद को लेकर चुनावी हल्ला शुरू हो गया है. करीब 11 महीने की जी तोड़ मेहनत व अथक प्रयास के साथ ही यहां 1475 मतदाताओं की वोटर लिस्ट फाइनल हुई है, जो अपना नया प्रधान चुनेंगे. इसी के साथ ही टिनप्लेट गुरुद्वारा पर जमशेदपुर की सिख संगत की नजरें टिक गई हैं. अब तक के इतिहास में सिख संगत में यह गुरुद्वारा चर्चा में बना रहा है. प्रधानगी को लेकर खून खराबा, गोलीबारी तक की घटनाएं यहां का इतिहास रही हैं. समाज की दो जाति के समीकरण में ही यहां गुट आमने सामने रहते हैं. पिछले पांच सालों से तरसेम सिंह सेमे यहां के प्रधान हैं. उसके पहले भी सेमे अपने पक्ष के लोगों को चुनाव जिताने के लिए मैदान में रहते थे. इस बार उन्होंने मजहबी जाति के गुरदयाल सिंह को मैदान में सामने किया है. वहीं, सेमे से अलग होकर उनकी टीम के जट बिरादरी के बलवंत सिंह शेरों को समाज ने आगे किया है. तीसरे उम्मीदवार गुरचरण सिंह बिल्ला खेमे के सुरजीत सिंह ख़ुशीपुर है. जो वर्ष 2005 से 2008 तक प्रधान थे. उसके बाद एन केन प्रकरेण महासचिव व अन्य पदों पर बने रहे. सुरजीत सिंह को बाहर करने के लिए विरोधी खेमे ने कुलवंत सिंह खलेरा को मैदान में छोड़ा है, जो ख़ुशीपुर को गुरु घर का देनदार बताते हुए उनके रास्ते में रोड़ा खड़ा कर चुके हैं और संविधान के मुताबिक उन्हें चुनाव नहीं लड़ने देने के लिए आवाज मुखर कर चुके हैं. मजहबी जाति के इस गुट के विवाद का फायदा जट गुट उठाने में पीछे नहीं है और मंगलवार को शेरों गुट ने चुनावी कार्यालय खोलने का ऐलान कर दिया है. बहरहाल, बता दें कि प्रधान का चुनाव 26 मार्च को होना तय हुआ है. चुनाव में कुल 1475 वोटर अपने मत के द्वारा एक प्रधान को चुनेंगे. चुनाव में हर मतदाता को आधार कार्ड लाना अनिवार्य किया गया है, जिसे देखने के बाद ही मतदाता अपना मतदान का उपयोग कर सकते हैं. प्रतिनिधि (प्रॉक्सी वोट) मतदान मान्य नहीं होगा. चुनाव में भाग ले रहे तीन उम्मीदवार को 1475 वोट वाली वोटरलिस्ट भी दे दी गई है और साथ उनका चुनाव चिन्ह भी दिया गया है. गुरदयाल सिंह मानावाल को तराजू छाप, बलवंत सिंह शेरो को सूरज छाप वहीं सुरजीत सिंह खुशीपुर को शेर छाप का निशान दिया गया है. पांच सदस्यीय चुनाव कमेटी टीम के क्रमशः प्रधान सरदार तरसेम सिंह, कश्मीर सिंह, कुलवंत सिंह खलेरा, सुखपाल सिंह, सुखदेव सिंह व प्रताप सिंह निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए कार्य में जुटे हुए हैं.

गलतबयानी करने वाले मनजीत-कुलवंत माफी मांगे, सच्चे हैं तो बेटों के साथ अरदास में आरोप दुहराए

दूसरी ओर, खलैरा के आरोपों का पलटवार देते हुए टीनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व प्रधान एवं उम्मीदवार सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर ने गलत बयानी करने वाले सरदार मंजीत सिंह गिल एवं सरदार कुलवंत सिंह खलेरा को संगत से माफी मांगने को कहा है. खुशीपुर ने कहा है कि सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगने पर वे कानूनी कार्रवाई करेंगे. सुरजीत सिंह के अनुसार यदि वे गुरुघर के देनदार होते तो साल 2017 में सरदार तरसेम सिंह सेम्मे उनका नाम सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के डेलीगेट के तौर पर क्यों भेजते. वास्तव में अपनी संभावित हार देख विरोधी बौखला गए हैं और मनजीत सिंह गिल और कुलवंत सिंह खलेरा को मोहरा बनाकर बदनाम करने की साजिश रचे हैं.
सुरजीत के अनुसार उन्होंने अपना चार्ज साल 2008 में तब के नए प्रधान सरदार जोगिंदर सिंह को सौंप दिया था और कोई देनदारी नहीं रही और लगातार वहां महासचिव पद पर रहा और वर्तमान में भी तरसेम सिंह सेम्मे की कमेटी में महासचिव हूं. तरसेम सिंह से मतभेद होने के बावजूद उन्होंने सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के डेलीगेट के तौर पर मेरा नाम भी भेजा. बैंक खाते में भी मेरा ही नाम दर्ज है.
सुरजीत सिंह खुशीपुर के अनुसार सरदार गुरुचरण सिंह बिल्ला से मतभेद हुए थे और उन्होंने मेरे नाम पर गबन का आरोप लगाया था जो पुलिस जांच में झूठा पाया गया और पुलिस ने मुझे क्लीनचिट दे दी है.
वास्तव में खालसा गुरुद्वारा स्कूल की क्लर्क सुरजीत कौर ने ₹ एक लाख पैंसठ हजार का गबन किया था और वह पैसा वसूलने की जिम्मेदारी मुझे कमेटी ने सर्वसम्मति से दी थी. पैसा नहीं दी तो सुरजीत कौर पर मुकदमा हुआ और उसने दस हजार रुपए माहवार किस्त के रूप में कमेटी को लिखित देने का करार किया. जमानत लेने के बाद वह फरार हो गई और बाद में उसकी मृत्यु हो गई. सुरजीत कौर की बहन उस मामले में गवाह थी और वह अभी भी जीवित है. करारनामा में उसके दस्तखत भी हैं.
यह तथ्य टीनप्लेट गुरुद्वारा की कमेटी तथा संगत को मालूम है परंतु मनजीत सिंह गिल और कुलवंत सिंह खलेरा जानबूझकर चुनाव को प्रभावित करने के लिए इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. यह दोनों ही पहले जाति का वास्ता देकर मनाने की कोशिश करते रहे और जब नहीं माना तो इस नीचे स्तर पर उतर आए हैं. यदि दोनों सच्चे हैं तो अपने बेटों को लेकर गुरु घर में आए और अरदास करवा कर कहे कि उक्त रकम का गबन सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर के द्वारा किया गया है तो मैं सारी रकम वापस कर दूंगा.

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, अपराधी क्या हमें बुलाएगा
वहीं खलैरा ने जवाब देते हुए कहा कि सुरजीत पर स्कूल के रिकॉर्ड गायब करने का आरोप है. उससे बच्चों का भविष्य और स्कूल कि मान्यता पर असर पड़ेगा. रूपये गबन करने का आरोप लगा है तो वह बौखला गए हैं. हमें गुरुद्वारा आने को कह रहा है. अपराधी जज के सामने हाजिर होता है कि जज अपराधी के सामने. उन्होंने पूर्व पदाधिकारी स्व दिलीप सिंह, मान सिंह के बर्तन का 11 सौ आदि का हवाला देते हुए कहा कि संविधान के मुताबिक देनदार होने पर इन्हें चुनाव लड़ने और वोट देने से रोका गया था यहां भी नियम के तहत काम होना चाहिए. सीजीपीसी के नवनिर्वाचित प्रधान सरदार भगवान सिंह से उन्होंने आशा की है कि वह गलत का साथ नहीं होने देंगे.

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