विकास को लेकर तोड़ दिये गए रेलवे यूनियनों के दफ्तर, प्रदीप मिश्रा चौक पर मेहरबानी बरसा रहे इंजीनियरिंग अधिकारी
कैसे होगा विकास? अतिक्रमण अभियान पब्लिक के लिए महज “आई वाश”, लैंड विभाग ने मंत्रालय को लाया हांसिये पर
अतिक्रमणकारियों का कोर्ट जाना भी खेला, मालामाल हो रहे अधिकारी और तथाकथित लीज होल्डर
चरणजीत सिंह.
भारतीय रेलवे बोर्ड के अधीन संचालित दक्षिण पूर्व रेलवे का टाटानगर स्टेशन. जहां रेल मंत्रालय ने कई हजार करोड़ खर्च कर विकास की योजनाएं प्रस्तावित की है, लेकिन यहां रेलवे लैंड विभाग की संचालित गतिविधियों पर उठ रहे सवाल भारतीय रेल को शर्मिंदा कर रहे है. सूत्रों के अनुसार रेल को सोने का अंडा देने वाली चिड़िया के रूप में विख्यात सीकेपी डिवीजन (चक्रधरपुर रेल मंडल) के कई अधिकारी इस खेल में लिप्त हैं. मंत्रालय हो या बोर्ड, उनके नियम पालन नहीं किये जा रहे. कमीशन का खेल सर्वविदित है. जनता की गाढ़ी कमाई से विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने के दावे खोखले दिख रहे हैं.

टाटानगर स्टेशन में प्रधानमंत्री के विकसित भारत योजना पर कार्य चल रहा है. अतिक्रमण को लेकर जबरदस्त तरीके से रेल का लैंड विभाग पेंच में फंसा हुआ है. जहां विकास होना है, अतिक्रमण चलाने जा रहे हैं और अतिक्रमणकारी उन्हें कोर्ट में घसीट रहे हैं. इससे स्टेशन के विकास की गति धीमी हो रही है. उसके बावजूद भी लैंड विभाग अपनी कारगुजारियां के लिए चर्चा में बना हुआ है, या कहा जाये तो कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहा है.

दरअसल, स्टेशन के पास प्रदीप मिश्रा मुख्य चौराहे के नाम से जाना जाता है. जहां इन दिनों रेल के अवैध कार्य सुबह तो सुबह रात के अंधेरे में भी देखने को मिल रहे हैं. प्लॉट नंबर एक जुगसलाई रेल जमीन पर सौभाग्य होटल नाम से प्रसिद्ध स्थान पर खुलेआम लीज होल्डर आलोक कुमार अग्रवाल द्वारा अवैध कब्ज़ाई जमीन पर निर्माण कार्य चलाया जा रहा है. उनके द्वारा खुलेआम रेलवे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. यह कहना गलत कतई नहीं होगा. उनके लीज वाले स्थान पर शराब दुकान चल रही है. रेलवे नियम यह इजाजत नहीं देता. स्टेशन एरिया में तीन शराब की दुकानें थी. उसे रेलवे ने खाली करा दिया.

नियमों की अगर बात करें तो इस वक्त स्टेशन का विकास हो रहा है. कई लोगों को उजाड़ा जा रहा है. ऐसे वक्त स्टेशन खासकर रेल इलाके में पूरे लीज होल्डर के द्वारा रेल भूमि पर विस्तारीकरण के कार्य करने की मनाही है, लेकिन लैंड विभाग के इलाके में ये सब नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ रही हैं. चाहे वह स्टेशन का इलाका हो या सलगाझूड़ी या अन्य (सीकेपी डिवीजन).
सूत्रों के अनुसार प्रदीप मिश्रा चौक से उक्त लीज होल्डर ने एक पटाखा दुकान को अपने अवैध क्षेत्र से हटाकर अपनी वैध जगह को विस्तार करवा उसे शिफ्ट करवा दिया है. इधर, अवैध रूप से एक नया धंधा खड़ा करने की कवायद की जा रही है. उजाले और रात के अंधेरे में. यह कहना गलत नहीं होगा कि सब कुछ रिश्वत का खेल है, जो जिम्मेदार लैंड विभाग को उसकी लापरवाही के कारण दिख नहीं रहा है या फिर खेला में शामिल होने का प्रमाण है.
लीज होल्डर के लिए भी रेलवे में नियम बने हुए हैं कि वह अपने इलाके को भाड़े में नहीं दे सकता. सूत्रों के अनुसार सौभाग्य होटल वाले अग्रवाल ने सभी नियमों को ताक पर रखा है और लैंड विभाग मस्ती में है. खासकर टाटानगर के आईओडब्लू. उनकी लगभग 2000 स्कवायर फिट अवैध जमीन का विकास आने वाले दिनों में रेल मंत्रालय के विकास के लिए बहुत बड़ी रीढ़ की हड्डी साबित हो सकता है. यह कहना गलत नहीं होगा. स्थानीय जिला पुलिस भी इस अवैध कार्यों पर अनदेखी करती है.



