Sonari Gurudwara : भगवान सिंह के एक लेटर में दो हस्ताक्षरों ने मचाई धमाल, डीसी तक पहुंच गई टीम, तर्क दिया हमारा अपना संविधान, संगत परेशान

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7 सितम्बर पर सबकी निगाहें, क्या हो जायेगा समझौता या विवाद रहेगा जारी

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के सिख समाज में गुटबाजी की लड़ाई नए मोड़ में आ गई है. मामला सोनारी गुरुद्वारा से जुड़ा है. मंगलवार के फतेह लाइव के अंक में जो खबर प्रकाशित हुई, उसके बाद सोनारी की संगत ने तथ्य पेश किये. वह धोखाधड़ी का मामला तो है ही, साथ ही भगवान सिंह की स्वच्छ क्षवि को धूमिल करने वाला है.

कम शब्दों में अगर सच्चाई पेश की जाये तो सोनारी गुरद्वारा में मंगलवार को 7 सितम्बर की अहम बैठक को लेकर सीजीपीसी प्रधान भगवान सिंह का नोटिस लगा था. इसकी पुष्टि करने के लिए उन्हें फोन किया गया था, लेकिन उन्होंने उसका रिप्लाई नहीं किया. यह वही भगवान सिंह हैं जिनके कारण समाज के लोकप्रिय और पंथ प्रसिद्ध ज्ञानी को डोबो होटल से शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ी थी, लेकिन जागृति यात्रा के पांच दिन बाद एक वाहवाही वाली प्रेस रिलीज जारी करवा दी.

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बुधवार को लगा पत्र

बुधवार को उस नोटिस को लेकर जो उहापोह की स्थिति हुई. उसके बाद दबंग लोग वहां पहुंचे. उन्होंने कैमरे चेक किये. गुरप्रीत सिंह से हाथपाई पर उतारू हो गए. फिर नया नोटिस भगवान सिंह के नाम पर चिपका दिया गया, जो संगत को सम्बोधित था. खैर, इन दोनों पत्रों में एकबात देखी गई कि भगवान सिंह के नाम के हस्ताक्षर अलग अलग हैं. इसके बाद सिख समाज की बात बाद में करते हैं कि उनकी प्रधान के प्रति क्या चेतना बन रही है. यह दोनों अलग अलग प्रधान के हस्ताक्षर यह सच साबित कर रहे हैं कि प्रधान कटपुटली बन गए हैं. उनके नाम से हर गुरूद्वारे में लड़ाई झगड़े जोर पकड़ रहे हैं. अब सोनारी की बारी है, लेकिन इसका साजिशकर्ता कौन है. यह भी चर्चा बनी हुई है.

ये मंगलवार का, जिसे विपक्ष ने फाड़ने का आरोप लगाया

इधर, सोनारी की संगत ने डीसी को मिलकर अपनी बात बुधवार दोपहर रख दी है. उन्हें क्या आश्वासन मिला यह बाद की बात है, उसका लेटर आप पढ़ सकते हैं. ऑफिस में तीन माह से ताले लगे हुए है. संगत परेशान हो रही है. लेकिन इन चर्चाओं के बीच सिख समाज को बदनाम करने से कौन रोकेगा. यह चर्चा पूरे जगत में हो रही है. प्रधान भगवान सिंह की स्वच्छ क्षवि अब दांव पर लग गई है. उनकी सोच का पर्दाफाश होना बाकी है.

मालूम हो कि साकची में चुनाव का उनके लोगों का हस्तक्षेप होना धज्जियां उड़ा गया. हालांकि यह पिछले चुनाव में भी देखने को मिला था, जब तत्कालीन प्रधान गुरमुख सिंह मुखे निशान सिंह के साथ थे. इधर, सीतारामडेरा में प्रधान गायब हो गए. किताडीह में भी समझौता, बारिडीह और अपने खुद के गुरूद्वारे मानगो के मामले को लेकर रोजाना उन पर आरोप लग रहे हैं. जी टाउन का मामला भी किसी से छिपा हुआ नहीं है. समाज की संपत्ति को भाड़े में दे दिया. ऐसे कई सवाल हैं, जिसे लेकर उन्हें संगत घेरने के लिए तैयार बैठी है और रोजाना उनके विरोध में मुखर हो रही है.

ये डीसी को की गई फरियाद है, जिससे  सोनारी की संगत परेशान हो रही है.

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