फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

स्कूल ऑफ होप, आशा किरण, पाथ, स्टार्ट, जीविका, चेशायर होम, स्कूल ऑफ जॉय, ज्ञानोदय और पीएएमएचजे के बच्चे चतुर्थ बाल मेला में आए हैं। ये विशेष बच्चे चित्रकारी करने के लिए बैठे हैं। एक बड़ी उम्र की विशेष बच्ची (आप उन्हें महिला भी कह सकते हैं) सभी को गुड मार्निंग कहती हैं। कोई उन्हें रिस्पांड नहीं करता। वह दोबारा गुड मार्निंग कहती हैं। इस बार एक रिस्पांस उन्हें मिलता है। वह तीसरी बार गुड मार्निंग कहती हैं। इस बार उन्हें दो रिस्पांस मिलता है यानी दो बच्चे गुड मार्निंग कहते हैं। वह खुश हो जाती हैं, चित्र बनाने में जुट जाती हैं।
ये सारे बच्चे मुख्य मंच पर बैठे हैं। चूंकि ये विशेष हैं, सो इन्हें विशेष तवज्जो मिली है। जिस मंच से कल वित्तमंत्री ने मेले का उद्घाटन किया, उस मंच पर बैठ कर ये बच्चे चित्रकारी कर रहे हैं। क्योंकि ये विशेष बच्चे हैं।

एक बच्चा कहता हैः कितना अच्छा है। सब तरफ बच्चे हैं। दूसरा उसे करेक्ट करता है-खाली बच्चे नहीं हैं। उनके मम्मी-पापा भी हैं। पहला बोलते है-हां। ठीक बोल रहे हो। एक बच्चा कहता है कि कलर तो मात्र 10 ही हैं। इसमें कैसे काम होगा। पिंक तो है ही नहीं। दूसरा बच्चा बोलता है, मेरे पास 15 कलर हैं। तुम्हें जो चाहिए, ले लो मुझसे। लेकिन मेरे सामने ज्यादा न बोलो। पहला बच्चा बोलता है कि मुझे 10 ही कलर क्यों मिले। तुम्हें 15 क्यों मिले। दूसरा बच्चा बोलता है, मैं अपने घर से लेकर आया हूं। मम्मी ने कहा था। फिर दूसरा बच्चा धीरे से अपनी पतलून को ऊपर उठाता है, जेब से कलर निकालता है और बोलता है-गिनो। कै गो है। 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12,13,14,15,16 टोटल 16 कलर हैं मेरे पास। तुमसे एक ज्यादा।

इसी तरीके से आपस में बोलते-बतियाते, बहसते हुए बच्चों ने अपने हिसाब से जो उन्हें सिखाया गया था या जो वो जानते थे, चित्र बनाई। उन्हें कलर किया। फिर उठ गए। घूमने लगे स्टॉल।

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