Tata steel : ऐसे तो टाटा स्टील में प्रमोशन मिलना चांद तारे तोड़ना जैसा हो जाएगा

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एसएनटीआई से राजीव चौधरी के यूनियन उपाध्यक्ष बनने के बाद बढ़ गया संकट

कालबद्ध प्रमोशन के लिए एसएनटीआई में ईसीबीएस टू की परीक्षा उत्तीर्ण करने में छूट रहे पसीने

इसी वजह से अटक रही टाटा स्टील के कर्मचारियों की चार साल में होने वाली प्रोन्नति

यूनियन चुनाव में राजीव का वायदा था कि सबके लिए सहूलियत का स्थान होगा एसएनटीआई

संयोग कि राजीव के टाटा वर्कर्स यूनियन उपाध्यक्ष बनने के बाद ट्रेड अप्रेंटिस में घोल मट्ठा

चरणजीत सिंह.

राजीव चौधरी. शावक नानावती टेक्निकल इंस्टीच्यूट (एसएनटीआई) से टाटा वर्कर्स यूनियन में कई बार कमेटी मेंबर. अबकी पहली बार यूनियन उपाध्यक्ष. जीते भी तो बगैर किसी गुट के. वे संजीव चौधरी के गुट में नहीं थे, न विपक्ष से. अलबत्ता, अब यूनियन अध्यक्ष के भरोसेमंद सिपहसालार में शुमार है.

टाटा वर्कर्स यूनियन की पिछली कार्यकारिणी में टीएमएच के कमेटी मेंबर शत्रुघ्न राय ऑफिस बेयरर का चुनाव जीते थे. राजीव चौधरी ने यूनियन चुनाव में वायदा किया था कि जैसे शत्रुघ्न राय के ऑफिस बेयरर बनने से सबको टीएमएच में सुविधा मिली थी, उसी तरह उनके जीतने से एसएनटीआई सबके लिए सहूलियत का स्थान हो जायेगा. वे जीत भी गए. मगर हुआ इसके ठीक विपरीत. संयोग देखिए कि एसएनटीआई के मार्फत होने वाली टाटा स्टील की ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा में घोल मट्ठा हो चुका है. उनके ऑफिस बेयरर बनने के बाद टाटा स्टील में सीधी बहाली के लिए होने वाली ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा बंद हो चुकी है. अब ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा होगी तो भी टाटा स्टील टेक्निकल सर्विसेज में बहाली होगी.

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समस्या सिर्फ इतनी भर नहीं है. टाटा स्टील के कर्मचारियों की चार साल में होने वाली प्रोन्नति पर भी आफत आ गई है. पहले व्यवस्था थी कि न्यू सीरीज के कर्मचारियों को एक ग्रेड में ड्यूटी करने के चार साल बाद प्रमोशन के लिए एसएनटीआई में आकर इंप्लाई केपेबिलिटी बिल्डिंग सिस्टम (ईसीबीएस) वन नामक ऑनलाइन परीक्षा देनी होती थी. एक दो प्रयास में कर्मचारी उस एग्जाम को उत्तीर्ण कर जाते थे.

अब ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों के लिए भी वह परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है. एग्जाम का नाम भी बदल गया है, ईसीबीएस टू. परीक्षा के सवाल इतने कठिन हो गए है कि कई प्रयास में भी टाटा स्टील के कर्मचारियों की बैतरणी पार नहीं हो रही है. टाटा वर्कर्स यूनियन के ऑफिस बेयरर हो या कमेटी मेंबर, प्रमोशन की परीक्षा को लेकर परेशान हैं. कर्मचारी पहले कमेटी मेंबर को दुखड़ा सुना रहे है, फिर ऑफिस बेयरर को. यूनियन कार्यालय में जाइए तो कमेटी मेंबर और ऑफिस बेयरर यहां तक कहते सुने जा रहे है कि टाटा स्टील के अफसर भी वह एग्जाम पास कर जाय तो गनीमत है.

2023 बैच के ट्रेड अप्रेंटिस की आखिकार टाटा स्टील में नहीं ही हुई बहाली

टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव के पहले 2023 में ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा निकाली गई थी. चुनाव के ठीक पहले हल्ला हो गया कि ट्रेड अप्रेंटिस करने वालों की टाटा स्टील के बजाय टाटा स्टील टेक्निकल सर्विसेज नामक सब्सिडियरी कंपनी में बहाली की जाएगी. बवाल मच गया. टुन्नू चौधरी तब भी यूनियन अध्यक्ष थे. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कई बार एलान किया कि ट्रेड अप्रेंटिस करने वालों की बहाली टाटा स्टील में होगी और ट्रेड अप्रेंटिस बंद भी नहीं होगा.

यूनियन चुनाव खत्म हुआ. टुन्नू निर्विरोध यूनियन अध्यक्ष चुने गए तो एसएनटीआई से राजीव चौधरी को भी ऑफिस बेयरर बनने का मौका मिल गया. जाहिर है, एसएनटीआई से जुड़े मसले के सहज निष्पादन को लेकर सबकी उम्मीदें और बढ़ गई. खैर, यूनियन चुनाव के कुछ महीने के बाद 2023 बैच के ट्रेड अप्रेंटिस का प्रशिक्षण भी पूर्ण हो गया. प्रशिक्षुओं को टाटा स्टील टेक्निकल सर्विसेज में योगदान देने को कहा गया तो वे भड़क गए. कई बार यूनियन कार्यालय आकर टुन्नू चौधरी से बात किए.

टुन्नू ने टाटा स्टील प्रबंधन से बात कर समाधान निकलने की बात कही. प्रशिक्षु राजीव चौधरी के भी पास गए. यूनियन कार्यालय की खूब दौड़ भाग के बाद बात नहीं बनी तो हो हल्ला भी किए. आखिरकार थक हार कर सबने टाटा स्टील टेक्निकल सर्विसेज में योगदान दिया. राजीव चौधरी के ऑफिस बेयरर बनने के बाद पहले कौर में भी मुंह में मक्खी आने की कहावत चरितार्थ हो गई थी. इसके बाद से अच्छा होने की उम्मीद लगातार धुंधलाती जा रही है.

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