तुर्रा कि अब टुन्नू चौधरी दावा कर रहे कि वे तनिक भी जातिवाद नहीं करते

वेज रिवीजन पर हुई कमेटी मीटिंग आखिरकार जातिवाद तक पहुंच गई

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव के बाद पहली परिचय बैठक में टाटा स्टील के मानव संसाधन विभाग की शीर्ष अफसर अतरई सान्याल ने साफ कहा था कि इस सदी में यूनियन के भीतर जाति की इतनी बातें दुर्भाग्यपूर्ण है। जब जातिवाद के कारण पक्षपात की कोई बात बाहर आती है तो चर्चा में यूनियन पदाधिकारियों की जुबां पर अतरई सान्याल का यह प्रसंग आ ही जाता है।

अतरई सान्याल ने जातिवाद से परे रहने की सलाह जरूर दी। मगर जातिवाद की विष बेल यूनियन को इस कदर जकड़ चुकी है कि अब यह बात हाउस यानी कमेटी मीटिंग तक पहुंच चुकी है। शुक्रवार को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में लेखा के अलावा वेज रिवीजन के मसले पर हुई कमेटी मीटिंग आखिरकार जातिवाद के मसले तक पहुंच गई। तुर्रा यह कि यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी ने सफाई दी कि वे तो जातिवाद तनिक भी नहीं करते। कमेटी मीटिंग खत्म हुई तो यूनियन परिसर में कई कमेटी मेंबर यह कहते सुने गए कि उफ़…यहां का जातिवाद। जातिवाद में तथाकथित मजदूर नेता मजदूर की छोड़िये, खुद का भला बुरा भी समझना भूल गये।

टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग में टीएंडटी के कमेटी मेंबर आरके सिंह में बेहतर ग्रेड रिवीजन के लिए कई सुझाव दिये। इसके बाद उन्होंने कहा कि इस यूनियन में जातिवाद ने कैंसर का रूप धारण कर लिया है। जातिवाद से जैसे देश खोखला हो जाता है, वैसे ही इसकी चपेट में आ चुकी यूनियन का भी भारी नुकसान होता जाएगा।

अध्यक्ष बोले कि किसी स्वजातीय को पीएफ ट्रस्टी नहीं बनाया

टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर किसी से बात कीजिए तो संजीव कुमार चौधरी और उनके लोगों के जातिवाद के कुछ किस्से सुनने को जरूर मिल जाएंगे। टुन्नू को अंदाजा था कि जातिवाद का प्रहार उनकी तरफ भी है। इसलिए हाउस में उन्होंने सफाई दी कि पीएफ ट्रस्टी के चार पद हैं। उन्होंने अपने किसी स्वजातीय को पीएफ ट्रस्टी नहीं बनाया। वे जाति की राजनीति नहीं करते है। कमेटी मीटिंग खत्म हुई तो टुन्नू के इस कथन पर कमेटी मेंबरों ने खूब किस्सा कहानी शुरू किया।

क्लब हाउस की प्रबंधन समिति की सूची गिनाने का सिलसिला शुरू हुआ तो कंपनी के टूर में जाने वालों की सूची गिनाई जाने लगी। कुछ लोग मजे ले रहे थे कि इस पर यूनियन अध्यक्ष मुँह खोल देते तो मजा आ जाता। यूनियन में तीन चौधरी की चौधराहट पर भी पुराने बातों को नए सिरे से याद किया गया। यूनियन महामंत्री सतीश कुमार सिंह को भी जातिवाद पर पक्ष रखना पड़ा। बोले कि जातिवाद जैसी बातों से यूनियन के भीतर अनुशासनहीनता बढ़ती जाएगी। यदि जातिवाद के कारण यूनियन में एक दूसरे को सम्मान नहीं देंगे तो कारखाना के भीतर कर्मचारियों से भी सम्मान नहीं मिलेगा। बेहतर होगा कि जातिवाद की जगह मजदूरवाद की ओर बढ़े।

महांत्री ने भी यूनियन मे जातिवाद और अनुशासनहीनता पर अपनी चिंता प्रकट की। उन्होने कहा कि यदि हम सभी यूनियन में एक दूसरे का आदर नहीं करेंगे। उन्हें सम्मान नहीं देंगे, तो उनका यह अपेक्षा करना बिल्कुल गलत है की, विभाग में कर्मचारियों से भी उनका सम्मान मिलेगा।

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