फतेह लाइव, रिपोर्टर.
दुनिया भर में चल रही आर्थिक मंदी के कारण आम लोग ख़ासकर युवा वर्ग बहुत परेशानी के दौर से गुज़र रहा है. इस तरह के हालात में देश के अंदर कॉर्पोरेट कम्पनियां और सरकारी विभागों में तनख्वाह का महीनावारी सिस्टम को बदलने की ज़रूरत है. ये बातें आज ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष सतनाम सिंह गंभीर ने कही.
उन्होंने एक अहम सुझाव देते हुए कहा कि जिस तरह विदेशों में (विकसित देश ) सप्ताह के सप्ताह तनख्वाह देने का सिस्टम है. उसी तर्ज़ पर अब हमारे देश के अंदर इसी तरह का सिस्टम लागू होना चाहिए. अगर कर्मचारियों को प्रति सप्ताह तनख्वाह मिलनी शुरू हो जाए, तो इससे देश की आर्थिक स्थिति और आम लोगों के जीवन में काफ़ी सुधार आएगा.
सतनाम सिंह गंभीर ने विशेष तौर पर ऐसी युवा पीढ़ी का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज का नौजवान पहले की पीढ़ी से बिलकुल अलग है. डिजिटल युग शिक्षा रहन सहन और रोज़ाना की ज़रूरतों के कारण उन पर आर्थिक बोझ रोज़ाना बढ़ रहा है. महीने के आख़िर तक इन्तज़ार करने के कारण कई बार मानसिक तनाव आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ता है. सतनाम सिंह गंभीर ने कहा अगर सप्ताहिक तनख़्वाह प्रणाली शुरू हो जाती है तो युवाओं के हाथों में पैसों की आमद लगातार बनी रहेगी, जिससे वे अपने ख़र्च को बेहतर तरीक़े से मैनेज कर सकेंगे और उनको काफ़ी राहत मिलेगी.
सतनाम सिंह गंभीर ने केंद्र सरकार समेत कॉर्पोरेट जगत से अपील की है कि मौजूदा विश्व स्तरीय मंदी के प्रभाव को कम करने के लिए और नौजवान पीढ़ी को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के लिए इस मामले को गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है.











