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Jamshedpur : जुगसलाई एमई स्कूल रोड वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में ₹22 लाख के उपकरणों की आपूर्ति में भारी अनियमितता, शिकायत के बाद जांच टीम पहुंची

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अधिवक्ता अमर कुमार तिवारी का आरोप—ठेकेदार को बचाने में जुटे अधिकारी, सही जांच न होने पर जाएंगे उच्च न्यायालय

फतेह लाइव, रिपोर्टर।

जमशेदपुर के जुगसलाई जलपूर्ति पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (यांत्रिक प्रमंडल) में वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान हुए ₹22 लाख के मैकेनिकल सामानों की आपूर्ति में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। इस संबंध में पेयजल मंत्री और उपायुक्त (डीसी) जमशेदपुर को की गई शिकायत के बाद, मामले की जांच के लिए एक संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के आदेश पर जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संदीप पासवान एवं भवन निर्माण विभाग के अधिकारी दीपक सहाय संयुक्त रूप से जांच करने जुगसलाई एम. ई. स्कूल रोड स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे।

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तांबे की अर्थिंग की जगह लोहे के इस्तेमाल का आरोप, स्टार्टर भी कम पावर का लगाया

यह मामला तब शुरू हुआ जब जुगसलाई के अधिवक्ता अमर कुमार तिवारी ने करीब एक वर्ष पूर्व इस घोटाले और लापरवाही के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार, प्लांट में जो उपकरण लगाए जाने थे, उनमें से कई उपकरण अब तक गायब हैं। जो उपकरण लगाए भी गए हैं, उनमें भारी लापरवाही और घटिया गुणवत्ता की बात सामने आई है। उदाहरण के लिए, कॉपर (तांबे) के अर्थिंग की जगह लोहे का अर्थिंग लगा दिया गया है। एमएल-6 (ML-6) स्टार्टर की जगह बीसीएच (BCH) कंपनी का कम पावर का स्टार्टर लगा दिया गया है, और ट्रांसफार्मर में तेल तक नहीं डाला गया है।

जांच की पूर्व सूचना नहीं मिलने पर उठाए सवाल

अमर तिवारी का कहना है कि “जांच अधिकारी जुगसलाई एम. ई. स्कूल रोड स्थित प्लांट में जांच करने आए, लेकिन इसकी मुझे कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। मेरे पास ऐसे कई पुख्ता दस्तावेज हैं, जो इस योजना में हुई भारी लापरवाही और अनियमितता को साबित कर सकते हैं। अब तक पेयजल विभाग के तमाम आला अधिकारी दोषी ठेकेदार को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि जांच अधिकारी दीपक सहाय और संदीप पासवान इस मामले में निष्पक्ष रहते हैं या ठेकेदार को सपोर्ट करते हैं। अगर इस जांच में भी गड़बड़ी पाई गई या लीपापोती की कोशिश हुई, तो मैं न्याय के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करूंगा।”

जनता को कार्रवाई की उम्मीद

जांच टीम के आगमन के बाद अब स्थानीय जनता और शिकायतकर्ता की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इस ₹22 लाख के सरकारी धन के दुरुपयोग और तकनीकी लापरवाही पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या नहीं।

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