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Jamshedpur Xlri : इनोवेशन और रिस्क लेने की मानसिकता ही कंसल्टिंग सेक्टर को आगे बढ़ा रही है : मनीष गुप्ता

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एक्सएलआरआइ में ‘फुलक्रम 5.0 आयोजित , कंसल्टिंग की दुनिया में इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रतिभा पर हुआ मंथन

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर एक्सएलआरआइ में आयोजित दो दिवसीय ‘फुलक्रम 5.0’ (Fulcrum 5.0) का समापन गुरुवार को हुआ. इस वर्ष मुख्य विषय था – “कंसल्टिंग की नई परिकल्पना: नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रतिभा”. यह कार्यक्रम पीजीडीएम (जीएम) विभाग द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट लीडर्स, शिक्षाविद और छात्र शामिल हुए. फुलक्रम के जरिये देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थान एक्सएलआरआआइ जमशेदपुर ने एक बार फिर उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों का नया आयाम प्रस्तुत किया. कार्यक्रम की शुरुआत तीन पैनल डिस्कशन के साथ हुई, जिनमें कंसल्टिंग उद्योग में नवाचार, तकनीकी बदलाव और मानव संसाधन की बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई.

पहले सत्र का विषय था “स्टार्ट-अप थिंकिंग इन बिग फर्म्स:

इंट्राप्रेन्योरशिप इन कंसल्टिंग” यानी बड़ी कंपनियों में स्टार्टअप जैसी सोच को बढ़ावा देना. इस पैनल में प्रशांत मेहरा (ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी), उत्कलिका बादु (गार्टनर), सौमला सरकार (एक्सेंचर), राजेश नारायण (लेटेंटव्यू एनालिटिक्स), सीए दिपेन त्रिवेदी (बीडीओ), देबाशीष विश्वास (डेलॉइट) और मनीषा गुप्ता (कॉग्निजेंट) जैसे विशेषज्ञ शामिल हुए. इस सत्र में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संगठन की असली शक्ति उसकी संस्कृति में होती है, जो केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखनी चाहिए. इस दौरान यह बात भी उभर कर सामने आयी कि नवाचार और जोखिम लेने की मानसिकता ही आज के कंसल्टिंग सेक्टर को आगे बढ़ा रही है. वहीं दूसरे सत्र की थीम “कंसल्टिंग रीइमैजिन्ड: एडेप्टिंग टू द जनरेटिव एआई एरा” यानी एआई के युग में कंसल्टिंग का नया रूप था. इस पैनल में शमिंद्र बसु (आईबीएम), विद्या विश्ववरबाबू (डेलॉइट डिजिटल), कार्तिकेयन गिरिजानंदन (एसेंडियन), श्रीकांत सारदा (एक्सेंचर), अखिलेश साहू (अल्वारेज एंड मार्सल) और दिपांजन भट्टाचार्य (एक्सेंचर) ने हिस्सा लिया. इस सत्र में बताया गया कि कंसल्टिंग इंडस्ट्री अब चार प्रमुख चरणों से गुजर चुकी है, जिसमें ईआरपी युग, इंटरनेट और मोबाइल युग, डिजिटल एनालिटिक्स युग और अब प्रवेश कर रही है जनरेटिव एआई (जेनएआई) युग में. वक्ताओं ने कहा कि एआई को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में देखना होगा. जब मानव बुद्धि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिलकर काम करेंगे. तभी वास्तविक मूल्य सृजित होगा.

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जबकि तीसरे सत्र का विषय था “टैलेंट एडवांटेज इन कंसल्टिंग: बिल्डिंग द वर्कफोर्स ऑफ द फ्यूचर”, यानी भविष्य के लिए सक्षम कार्यबल का निर्माण. इस चर्चा में रोहित गम्भीर (सेंट्रिक कंसल्टिंग), रविंद्र यादव (द नॉलेज कंपनी), दिशा रॉय (पब्लिसिस सैपिएंट), रचना नाथ (इंटुएरी कंसल्टिंग), रायन मोदी (बीडीओ एग्जिक्युटिव सर्च) और डॉ. रूपेश कुमार सिंह (ईवाई) ने हिस्सा लिया. वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में सफलता उन्हीं की होगी जो मल्टी-स्किल्ड, परिवर्तनशील और मानवीय मूल्यों से जुड़े रहेंगे. एआई के दौर में विश्वास, सहानुभूति और अनुकूलनशीलता ही सच्ची लीडरशिप की पहचान होगी. कार्यक्रम के अंत में यह सर्वसम्मति बनी कि भविष्य की कंसल्टिंग दुनिया मानव और मशीन के सामंजस्य से आकार लेगी. फुलक्रम 5.0 ने न केवल विचार-विमर्श का मंच दिया, बल्कि सीखने, साझेदारी और नवाचार की भावना को भी सशक्त किया. इस आयोजन का सफल संचालन कौटिल्य कंसल्टिंग क्लब, पीजीडीएम (जीएम) बैच ने किया.

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