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gangster murder case : “दून” में गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के बाद एसटीएफ की दबिश बढ़ी, सीसीटीवी फुटेज में दिखे शूटरों का निकला जमशेदपुर कनेक्शन

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अमरनाथ की हत्या मामले में दुमका जेल गए विशाल के साथ अखिलेश सिंह की हुई थी तनातनी, बाहर विक्रम शर्मा लगा रहा था दिमाग

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पॉश इलाके राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार को हुई कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस और एसटीएफ ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. वारदात के दूसरे दिन शनिवार को पुलिस की जांच अब केवल हत्याकांड के इर्द-गिर्द न रहकर विक्रम के पिछले 12 सालों के अज्ञात प्रवास और उसके उत्तराखंड में फैले व्यापारिक साम्राज्य के इर्द-गिर्द सिमट गई है.

इस बीच, पुलिस को घटना के समय के कुछ महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिनमें दो संदिग्ध युवक मॉल से भागते हुए दिखाई दे रहे हैं. हत्याकांड के बाद हरकत में आई देहरादून पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीमों ने शहर के सभी निकास द्वारों पर नाकाबंदी कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है.

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एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर गठित पांच विशेष टीमों ने शहर के होटलों, लॉज और किराए के मकानों में रहने वाले बाहरी व्यक्तियों का सत्यापन शुरू कर दिया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के बाद सहस्रधारा रोड के पास अपनी बाइक छोड़ी और वहां से किसी अन्य वाहन, संभवतः कार, का सहारा लेकर शहर से बाहर निकले हैं. पुलिस अब उस लावारिस बाइक के चेसिस नंबर और मालिकाना हक के जरिए शूटरों के सुराग तलाश रही है.

विशाल

जांच के क्रम में पुलिस ने विक्रम शर्मा के मोबाइल फोन को कब्जे में लेकर उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले 48 घंटों में विक्रम किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसे किसी तरह की धमकी मिली थी.

आशुतोष

देहरादून पुलिस ने झारखंड पुलिस के साथ भी संपर्क साधा है, क्योंकि विक्रम जमशेदपुर के चर्चित आशीष डे हत्याकांड का मुख्य आरोपी था और वहां के कई गैंग्स के साथ उसकी पुरानी अदावत जगजाहिर थी. पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गढ़वाल ने स्पष्ट किया है कि यह पेशेवर ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ का मामला लग रहा है, जिसमें शूटरों को बाहरी राज्य से बुलाकर सटीक रेकी के बाद वारदात को अंजाम दिया गया.

आकाश

वहीं, पुलिस ने विक्रम शर्मा के परिजनों और करीबियों से भी लंबी पूछताछ की है. जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि विक्रम देहरादून में ‘पवन’ नाम से पहचान छिपाकर रह रहा था और यहां उसने रियल एस्टेट व स्टोन क्रशर के कारोबार में भारी निवेश किया था. पुलिस इस कोण पर भी काम कर रही है कि कहीं इस हत्या के पीछे कोई स्थानीय व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता या संपत्ति का बड़ा विवाद तो नहीं है. फिलहाल, पुलिस ने मॉल के सुरक्षा गार्डों और जिम के कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए हैं.

दूसरी ओर, सीसीटीवी में जिन बदमाशों के फुटेज आये हैं. उनकी पहचान जमशेदपुर के गाढ़ाबासा और जुगसलाई के विशाल सिंह, आशुतोष सिंह और आकाश प्रसाद के रूप में हुई है. विशाल सिंह ने पिछले दिनों टाटानगर रेलवे स्टेशन पार्किंग में नीरज दुबे पर फायरिंग की थी. वहीं, दुमका में अमरनाथ सिंह की हत्या में भी वह जेल गया था. अपराध जगत के सूत्रों के मुताबिक जेल के अंदर बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह और विशाल के बीच तनातनी हुई थी.

विशाल के जेल से बाहर आने पर विक्रम शर्मा ने विशाल के गिरोह को परेशान करना शुरू कर दिया था. यह वजह भी विक्रम शर्मा की हत्या में एक कारण हो सकती है? बहरहाल, विक्रम शर्मा जेल से आने के बाद खुद को सफेदपोश बनाने की जुगत में था. इसके लिए फायरिंग के एक आरोपी के साथ मिलकर उसने एक 26 नाम से न्यूज पोर्टल भी खोला था, जिसके जरिये वह अपनी वाहवाही पेश कराता था. उस न्यूज पोर्टल में विक्रम शर्मा की हत्या नहीं परोसा जाना यह साबित करता है. वहीं इससे उक्त पोर्टल पर कई उंगलियां उठ रही है. पत्रकार जगत भी ऐसे लोगों को लेकर शर्मिंदा महसूस कर रहा है. आखिरकार ऐसे क्रिमनल बैकग्राउंड वालों को लोग निजी लाभ के लिए चौथे स्तंभ को बदनाम कर रहे हैं.

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