फतेह लाइव लगातार मानगो नगर निगम में बनाये हुए हैं नजर, बिना काम किये 1.33 करोड़ की निकासी का मामला किया गया था उजागर
चरणजीत सिंह.


झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के अधीन संचालित जमशेदपुर का मानगो नगर निगम इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर सूर्खियों में बना हुआ है. यहां परत दर परत घोटाले और नियम की धज्जियां उड़ाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं, जिससे पूरे झारखंड का रिकार्ड टूट गया है. उसके बाद भी जिले के वरीय अधिकारी इस मामले में गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहे हैं, यह चर्चा प्रशासनिक महकमे में जोरों से चल रही हैं. हां हो सकता है कि चुनाव कार्य में व्यस्त होने के कारण अधिकारी इसे नजर अंदाज कर रहे हैं, लेकिन इस पूरे प्रकरण को अगर उच्च स्तरीय जांच करवा दी जाए, तो बहुत झारखंड सरकार को शर्मशार करने वाला बहुत बड़ा स्कैंडल उजागर होगा.
नये और ताजा मामले में मानगो नगर निगम में अतिअल्पकालीन निविदा संख्या-10/ 2024-25 जो कि पूर्ण ई-टेंडर की प्रक्रिया है. उसे ऑफ लाइन करते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग की नियमावली को ठेंगा दिखाने का कार्य बेखौफ किया गया है. वर्तमान में यहां डीएमसी सुरेश यादव हैं, जिनका कार्यकाल काफी चर्चा वाला है. नियमों के अनुसार अगर ऑन लाइन प्रक्रिया में टेंडर होता तो (20 फीसदी BELOW) सरकार को राजस्व की बचत होती.
मगर डीएमसी सुरेश यादव के द्वारा कमीशन के लिये ऑफ लाइन टेंडर प्रक्रिया निकाली गई और अपने चहेते ठेकेदारों को काम दे दिया गया. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार ऑफ लाइन टेंडर की प्रक्रिया श्याम सिंह नामक ठेकेदार के कार्यालय में रची गई थी. जहां सारे टेंडर शिडियूल रेट पर किये गए. इसमें मुख्य साजिशकर्ता मेसर्स पीएम कंस्ट्रक्शन के तरुण कुमार बताये जाते हैं. सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार तरुण कुमार को शिडियूल पर आधा दर्जन काम दिये गए. वहीं, ठेकेदार मुन्ना सिंह को तीन, श्याम सिंह को दो काम शिडियूल रेट पर दिये गए हैं.

कमीशन के चक्कर में नहीं मिला वर्क आर्डर
सूत्रों के अनुसार इस ऑफ लाइन टेंडर के खेल में अब 10 प्रतिशत कमीशन की डिमांड वर्क ऑर्डर देने के एवज में नगर निगम के आला अधिकारी खुलेआम कर रहे हैं. जिसका नुकसान यह हो रहा है कि मानगो नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं. जनता बेहाल हो रही है. सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन अधिकारी को इसकी कोई चिंता नहीं है. उन्हें तो बस कमीशन चाहिए? क्योंकि उनका कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है. वहीं, 30 नवंबर को यह अपने मुख्य पदस्थापन क्षेत्र सिंचाई विभाग में सेवा प्रदान करेंगे, जिसका आदेश जारी हो चुका है. सुरेश यादव ने सिंचाई विभाग से ही अपनी नौकरी की शुरुआत की थी. उसके बाद जमशेदपुर में मानगो नगर निगम में ही अपनी सेवाकाल का लंबा समय गुजारा. जेई से लेकर अब डीएमसी तक प्रमोट होते गए. रामगढ़ भी कुछ समय रहे. ये दोनों ही कार्यकाल इनके सूर्खियों में बने रहे.

जेई और एई की खेला को भी समझें
मानगो नगर निगम इन दिनों भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है. वरीय अधिकारियों की शह पर हर पदाधिकारी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इसमें लिप्त है. सूत्रों के अनुसार मानगो नगर निगम में जूनियर इंजीनियर अभय नारायण सिंह और असिस्टेंट इंजीनियर मयंक शशांक मिश्रा और पेटीदार दीपक कुमार की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के सारे खेल होते हैं. किसी भी प्रकार का टेंडर होने पर जेई और एई खुद ठेकेदार बनकर काम करते हैं. सहयोगी में अपने पेटीदार दीपक कुमार से बालू, पेवर्स और क्रशर डस्ट खरीदा जाता है. जानकार सूत्रों के अनुसार दीपक कुमार के गौढ़गौड़ा बस्ती स्थित गोदम में दो बार तत्कालीन एसडीओ पारुल सिंह छापामारी कर चुकी है. यहां 50 लाख का खनन पकड़ा और गोदाम सील किया गया था, लेकिन पुलिस से सांठगांठ कर सारे माल की खपत नगर निगम में धड़ल्ले से हो रही है.

फतेह लाइव ने किया था खुलासा, डीसी ने बैठाई जांच
मानगो नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को गत माह 22 अक्टूबर के अंक में फतेह लाइव ने प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था “मानगो नगर निगम ने चार योजनाओं का निकाला था टेंडर, काम पूरा किये बगैर 1.33 करोड़ से ज्यादा की राशि का हो गया बंदरबांट”. इसके बाद डीसी अनन्य मित्तल ने मामले के लिए जांच कमेटी 26 अक्टूबर को गठित की. इस मामले की जांच अभी प्रक्रिया पर है. एडीसी और जिला अभियंता नकुल ठाकुर जांच अधिकारी बनाये गए हैं. उसके बाद से ही नगर निगम में खलबली मची हुई है. जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से योजनास्थल पर काम शुरु करने की भी कोशिश की गई थी, जो मामला डीसी और विधायक सरयू राय के पास जाने पर काम को डीसी ने रोकने का आदेश दिया था और आचार संहिता उल्लंघन का केस करने का मौखिक आदेश दिया था. इसके बाद लगातार लाखों-करोड़ों का घोटाले के मामले फतेह लाइव में प्रकाशित किये गये हैं, जिससे नगर निगम के अधिकारियों की जहां नींद उड़ी हुई है. वहीं, झारखंड सरकार की भी अलोचना हो रही है. मानगो के हर गली मोहल्ले में इस भ्रष्टाचार की चर्चा हो रही है. हालंकि डीएमसी सुरेश यादव बार बार यही राग अलाप रहे हैं कि वह इस मामले में कहीं नहीं है. विभागीय जांच कराने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सब ओके है.
