चरणजीत सिंह.
टाटानगर स्टेशन में रेलवे ने करोड़ों खर्च कर यात्रियों की सुविधा के लिए नया टाटानगर सेकेंड एंट्री गेट बनाया था. भविष्य की योजना इसमें शामिल थी. एन केन प्रकरेण यह योजना चालू हो गई. इसके बाद यहां नया सिस्टम उतरा गया. बोगी में बैठकर यात्री खाना का स्वाद चखेंगे और रेल यात्रा का अनुभव उठाएंगे. इसके लिए एक बोगी को सेकेंड एंट्री गेट में उतारा गया. कई क्रेन, टेलर लगे. रेलवे की ये योजना धराशाई हो गई.
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खैर आगे की बात ना दोहराते हुए ये बुरी खबर देने लायक है कि अब वह बोगी का स्वाद यात्रियों को नहीं मिलेगा. वैसे इस रेस्टोरेंट के खेल में कई पेटीदार आये और गए. वाणिज्य विभाग इसको संचालित करवाने में पूरी तरह विफल हो गया. बोगी के अतिरिक्त यहां अवैध रूप से सांठगांठ शुरू हुई. बाहर ठेले लगवाए गए. सूत्रों के अनुसार खूब वारा न्यारा हुआ.
रेलवे की साख पर धब्बा लगना शुरू हुआ तो सब कुछ स्वाहा कर दिया गया. यह योजना कई स्टेशनो में फलीभुत हो रही हैं, लेकिन यहां 15 साल का यह टेंडर एक झटके में स्वाहा हो गया. फतेह लाइव ने यह मामला उठाया था. बताया गया था कि इस बोगी के अलावा भी रेलवे का क्षेत्र अवैध गतिविधियों में संलिप्त है. वाणिज्य विभाग की इसमें मिली भगत है. रेलवे से वीआरएस लेने समेत कई लोगों ने इससे अवैध कमाई करने का जरिया बनाने की कोशिश की.
हाल में यहां शेड बनाना, कुर्सी टेबल लगाना, ठेले लगाकर भाड़ा लेना कई अवैध गतिविधियां बाहरी ठेकेदार को नुकसान देने का कारण बनी. लेकिन इसमें सम्बंधित लोग वारा न्यारा करते रहे. अब सवाल उठता है कि यह बोगी उठाने में रेलवे फिर क्या नया नियम लाता है? स्थानीय वाणिज्य विभाग या फिर ऊपर बैठे अफसर जनता को ऐसे ही बेवकूफ बनाते रहेंगे? सूत्रों के अनुसार स्टेशन के अंदर और बाहर अवैध कारनामों से हर माह लाखों के वारे न्यारे हो रहे हैं. स्टेशन पार्किंग आउट गेट के भीतर लगी दुकान से भी हजारों की अवैध कमाई स्थानीय अफसरों को जाती है, जो जांच का विषय है? इन आउट गेट में रेल मंत्रालय के आदेशों की अवहेलना का तो क्या कहना.




