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Jamshedpur : गोलमुरी में नानी बाई का मायरो” कथा का दूसरा दिन, रविवार को समापन

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर के श्रीगणिनाथ मंदिर गोलमुरी, में नारी जागरण समिति द्वारा आयोजित “नानी बाई रो मायरो” के दूसरे दिन वृंदावन से पधारे कथावाचक मुकुंद कृष्ण शर्मा ने व्यास पीठ से कहा कि जैसे पनिहारिन सिर पर पानी का घड़ा रहते हुए भी अन्य कार्य कर लेती है, फिर भी उसका ध्यान घड़े से नहीं हटता। इस तरह गृहस्थ जीवन में लिप्त रहते भी ईश्वर में चित्त लगा रहना चाहिए।

श्री कृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता 15वीं शताब्दी में जूनागढ़ गुजरात में जन्मे थे। बचपन में माता-पिता के देहांत पश्चात बड़े भाई भाभी ने उनका भरण पोषण किया। नरसी जी बचपन से ही अत्यंत शांत सरल और श्री कृष्ण के भक्त थे। घर की डांट से दुखी होकर वह जंगल में पुराने शिव मंदिर तपस्या भी की थी। जहां उन्होंने श्री कृष्ण भक्ति का वर मांगा।

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नरसी मेहता भजन गाते और साधु संतों के साथ रहते थे। इसमें उनकी पत्नी भी साथ देती थी। उन्होंने अपनी बेटी नानी बाई का विवाह अंजार शहर में किया था। नानी बाई को ससुराल में नरसी जी के गरीब होने के कारण मजाक और उलाहना सुनाई पड़ती थी। नानी बाई की पुत्री का विवाह तय हुआ। तो कुमकुम पत्रिका किमती वस्त्रों एवं आभूषण की सूची सहित नरसी मेहता को भेजी गई, जिसमें भात/ मायरा भरने का आग्रह किया गया था।

नरसी मेहता ने वह कुंकुम पत्रिका श्री कृष्ण को समर्पित कर दी और अपने दैनिक भजन में लिप्त रहे। कथा में जीवंत झांकी की भी आकर्षक प्रस्तुति दी गई। कल रविवार कथा के समापन दिवस पर सभी से अनुरोध है कृपया अवश्य पधारें और पुण्य लाभ अर्जित करें।

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