फतेह लाइव, रिपोर्टर।
राउरकेला रेलवे स्टेशन परिसर में करीब 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित शेड के अचानक धराशायी होने के मामले में रेलवे ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को दक्षिण-पूर्व रेलवे के कोलकाता स्थित गार्डेनरीच मुख्यालय से उच्चाधिकारियों की टीम राउरकेला स्टेशन पहुंची। जांच के लिए प्रधान मुख्य सुरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ) और मुख्य परिवहन योजना प्रबंधक (सीटीपीएम) की पांच-पांच सदस्यीय टीमें भेजी गई थीं। दोनों टीमों में कुल 10 अधिकारी शामिल रहे।
राउरकेला स्टेशन पहुंचने के बाद अधिकारियों ने सबसे पहले घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने शेड के निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली और मौके पर मौजूद मलबे की गहन जांच की। अधिकारियों ने निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, शेड की संरचना, तकनीकी मानकों और निर्माण प्रक्रिया से संबंधित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया। शेड के अचानक गिरने के संभावित कारणों का भी पता लगाने का प्रयास किया गया।
स्थल निरीक्षण के बाद जांच टीम राउरकेला स्टेशन मैनेजर कार्यालय के वीआईपी कक्ष पहुंची। यहां स्टेशन मैनेजर के अलावा रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, एईएन तथा आईओडब्ल्यू से अलग-अलग पूछताछ की गई। अधिकारियों से शेड के निर्माण की प्रक्रिया, संबंधित विभागों की भूमिका, इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण के दौरान अपनाए गए तकनीकी मानकों के बारे में जानकारी ली गई।
जांच टीम ने यह भी जानने का प्रयास किया कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। इसके अलावा रेलवे कॉलोनी स्थित रेक शेड के मलबे की भी बारीकी से जांच की गई। टीम ने घटनास्थल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों को दर्ज किया, ताकि शेड के धराशायी होने की वास्तविक वजह सामने आ सके।
गार्डेनरीच मुख्यालय से अचानक पहुंची उच्चस्तरीय जांच टीम के बाद स्थानीय रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। रेलवे प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
दोनों टीमों की जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट दक्षिण-पूर्व रेलवे के जोनल महाप्रबंधक अनिल जैन को सौंपी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजे जाने की संभावना है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने या तबादले की कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल रेलवे की जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद शेड गिरने की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









































