शहर की हर खाऊ गली में यही है वस्तुस्थिति, पुलिस प्रशासन मौन

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर में साकची डायमंड मार्केट के पास शाम को कई फूड स्टाल लगते हैं, जिनमें काफी भीड़ भी होती है, जिसका फायदा दबंग किस्म के असामाजिक तत्व उठा रहे हैं. 30 से ज्यादा फूड स्टाल होंगे, जिसमें आधे से ज्यादा खाली हैं, जिसे वहां या तो भाड़े पर चलाया जा रहा या जगह पर कब्जा हेतु खाली स्टालों को रख कर छोड़ दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में उन स्टॉल से भाड़ा वसूला जा सके.

भाड़ा भी 300 से 500 प्रतिदिन. यही नहीं स्टाल रख कर जगह के साथ 30 से 40 हजार में बेची भी जा चुकी है बात यहीं खत्म नहीं होती, अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन यापन के लिए अपना स्टाल लगाता है तो उसे या तो मोटी रकम देनी पड़ती है या फिर उस के स्टाल को अतिक्रमण के नाम पर तोड़ दिया जाता है या हटा दिया जाता है. अगर अतिक्रमण हटना है तो सिर्फ नए स्टॉल पर क्यों वर्षों से वहां पड़े खाली स्टालों पर कारवाई क्यों नहीं, क्योंकि इन सब के पीछे चलता है वसूली का खेल?

जहां एक ओर रात 11 बजे तक शहर के प्रतिष्ठान, होटल आदि बंद हो जाते हैं. ऐसे में यहां रात 12 बजे के बाद भी दुकानें खुली रहती है और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. आए दिन कभी झगड़ा, स्टाल वालों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं होती रहती हैं. शहर की मुख्य सड़क होने के कारण हर रोज स्टाल के सामने लोग अपनी गाड़िया खड़ी कर देते हैं, जिससे कि जाम की स्थिति बनी रहती है.

राज्य सरकार ने जहां गुटका, पान मसाला में प्रतिबन्ध लगाया है, पर यहां के लगभग हर स्टाल में ये आसानी से उपलब्ध है. यही नहीं शराब पीने के लिए डिस्पोजल ग्लास सहित और भी नशीले पदार्थ मिल जाते है, जिसे नाबालिक भी खरीद कर इनकी गिरफ्त में आ रहे हैं.
अब देखना ये है कि प्रशासन इसमें नकेल कसता है या फिर इंतजार है किसी बड़ी घटना का?

विदित हो कि साकची के साथ बिष्टुपुर, कदमा, सोनारी, स्टेशन रेलवे कॉलोनी आदि सभी खाऊ गली में यही वस्तुस्थिति है और पुलिस प्रशासन मौन है, जिससे बड़ी घटना होने पर प्रशासन को नाक रगड़ने की नौबत से इंकार नहीं किया जा सकता.

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