फतेह लाइव,, रिपोर्टर.
जमशेदपुर के विशिष्ट लोगों के कार्य इन दिनों सामाजिक और धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देने का दावा कर रहे हैं. इसी बीच एक समाज के विशेष व्यक्ति की राजनीतिज्ञ गूंज चारों ओर बह रही है, जो समाज का खुद को माफिया समझता है. नाम है चाणक्य. प्रसिद्ध है. बहुत शानदार उदाहरण हैं. चाणक्य ने समाज को जितना ऊंचाइयों में पहुंचाया, उतना गर्क में भी. सोशल मीडिया उसके कारनामो से भरी पड़ी है. गूंज या फिर चर्चा तक बाद में जायेंगे?
स्टेशन रोड के पास पिछले दिनों एक चुनाव हुआ. उसमें वे चाणक्य पहुंचे. मौके का सर्वोपरि कोई और था और फोटो में वाहवही लूटकर खूब मालामाल हो गए. फोटो छपवाई. लगातार दो दिनों तक. फिर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उनकी रजिस्ट्री वहां किस प्रकार हुई, कैसे सदस्य्ता मिली. कब इन नाम ना देने वालों के चक्कर में (मीडिया में) बर्बाद भी हो सकती है. वहां उनकी खूब किरकिरी हो रही है. पड़ोस के लोगों ने भी की. उस चुनाव में. वह भी प्रमुख लोगों के सामने.
इसी तरह पड़ोस के एक धार्मिक स्थल में उनके गर्क से समाज बदनाम हो रहा है. आरोप कई हैं. जिसका खुलासा फतेह लाइव करेगा. खैर, वहां रात के नौ बजे प्रमुख बनाया गया. वह भी बिना मर्यादा के. कई पदाधिकारियों के नाम शामिल है जो मर्यादा में नहीं है. नाम कई और भी हैं. दो महिलाओं का विवाद भी एक प्रमुख जड़ है, जिसे समाप्त करने के बजाय यह नेता किरकिरी बन गया है. उससे भी ऊपर प्रमुख संस्था. एक बिगुल (भों-पों) भी.
राजनीति रोटी सेंकने में काबिल यह नेता फिर पैरों में गिरने के लिए उस्ताद माना जाता है, जो भविष्य के लिए विशेष समाज को गर्क में पहुंचाने की सोच रहा है. नया कारनामा जग जाहिर है, जो फिर कभी राजा के पास जाता है तो कभी नई गोटियों के पास. फोटो चाहिए बस? खैर उसकी राजनीति चर्चा में बनी हुई है.



