Jamshedpur : साकची में जेपी नारायण का शहीद स्मारक बनाने की संजीव आचार्य ने की आवाज बुलंद, दूसरे दिन सरयू राय, टीडब्ल्यूयू अध्यक्ष और अन्य को सौंपा ज्ञापन

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जमशेदपुर।

शहीद स्मारक निर्माण समिति जमशेदपुर एवं जेपी युवा छात्र संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष संजीव आचार्य के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों के द्वारा जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, टाटा कंपनी के लैड डिपार्टमेंट के एच.ओ.डी अमित कुमार से मिलकर मांग पत्र सौंपा गया. उक्त मांग पत्र के माध्यम से संजीव आचार्य ने कहा कि 18 जुलाई 1974 को जमशेदपुर में साकची में तीन छात्र प्रणब मुखर्जी, राजीव रंजन एवं मोहम्मद मुशीन की शहादत हुई थी.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे पूरे बिहार जिसमें (आज का झारखंड भी शामिल था) मैं छात्र आंदोलन में जमशेदपुर के छात्रों की भी शानदार भागीदारी थी. 18 जुलाई को 1974 को आंदोलन के कार्यक्रम के हिस्से के रूप में जमशेदपुर में भी छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया था और विशाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन को बिखारने तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी थी. गोलियां चलाई थी. इसी दमन चक्र के दौरान तीनों साथी बुरी तरह जख्मी हुए थे.

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प्रशासन ने अपनी गलती सुधारने, प्रायश्चित करने और इन जख्मी छात्रों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाने की जगह पूर्ण प्रताड़ित किया गया. आज भी भारत की राजनीति में शासनतंत्र में लोकतंत्र के स्वरूप में जेपी आंदोलन का सर्वाधिक अंशदान है. जेपी आंदोलन का असर उस छात्र आंदोलन की छाप हर जगह मौजूद है. देश के बहुत सारे प्रांतों के शासन में उस आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोग देश के शीर्ष पदों एवं प्रभारियों में हैं. उसमें झारखंड प्रदेश भी शामिल है. जमशेदपुर में छात्र आंदोलन से जुड़े पुराने नेतृत्वकर्ताओं और जेपी युवा छात्र संघर्ष मोर्चा एवं शहीद स्मारक निर्माण समिति जमशेदपुर हर साल 18 जुलाई को शहीद छात्रों की स्मृति और सम्मान में कार्यक्रम करते हैं.

जमशेदपुर में साकची में उपयुक्त स्थान पर शहीद स्मारक बनाने की मांग भी बहुत पहले से करते आ रहे हैं, पर टाटा कंपनी की गलत मनसा और प्रशासन की उसके साथ मिलीभगत या उदासीनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह जरूरी तथा महत्वपूर्ण काम अभी तक नहीं हो सका है. इस बार शहादत दिवस के पूर्व हम सब एक बार फिर अपने यह मांग दोहराना चाहते हैं.

हमारी मांग है कि झारखंड का शासन जमशेदपुर का प्रशासन लोकतांत्रिक संघर्ष की विरासत को संरक्षण दे लोकतंत्र के शहीद सेनानियों का सम्मान करें. अविलंब साकची में शहीद स्मारक का निर्माण का निर्णय लें और उसे तेजी से क्रियान्वित करें. समिति ने आग्रह किया है कि आई हॉस्पिटल के समक्ष ट्रायंगुलर पार्क अथवा पुराना बस स्टैंड के समक्ष में लोकनायक जयप्रकाश की प्रतिमा और शहीद स्तंभ का निर्माण किया जाए. उस जगह पर जमशेदपुर के महत्वपूर्ण आंदोलनों की जानकारी देने वाला स्मारक केंद्र भी बनाया जा सकता है.

जनमत की सार्वजनिक अभीव्यक्तियों के कार्यक्रम के आयोजन स्थल के रूप में उसे विकसित किया जा सकता है. जहां सभा धरना प्रदर्शन अनशन आदि करने का अवसर हो और नागरिक जीवन न्यूनतम बाधित हो. हमें उम्मीद है कि 74 आंदोलन के सेनानी लोकनायक जयप्रकाश के अनुआय होने की विरासत के साथ आप न्याय करेंगे और शहीद स्मारक के निर्माण का फैसला करेंगे.

ज्ञापन सौपने वालों में मुख्य रूप से संगठन के पदाधिकारी आलोक रंजन, अमन खान, कन्हैया पांडे, अभिषेक शर्मा, सुखविंदर सिंह, बसंत दास, के निशान, सुजल कुमार, राहुल दत्ता, मनदीप सिंह, हरमन सिंह , सुशांत कुमार, आशीष पात्रो भोला खान, जैकी खान, शहादत खान, दीपक कुमार, सन्मुख मुखी, मिथुन चक्रवर्ती, गुरमीत सिंह सहित अन्य पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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