‘जेन जी’ और ‘जेन जी-अल्फा’ पीढ़ी से गुरु साहिब की बाणी को समझने और अनुसरण करने की अपील
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जुगो-जुग अटल, साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 422वें प्रथम प्रकाश दिहाड़े के पावन अवसर पर जमशेदपुर के युवा सिख धर्म प्रचारक एवं विचारक ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने सिख संगत, विशेषकर युवा पीढ़ी को गुरु साहिब की बाणी से गहराई से जुड़ने और उसके संदेश को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया है।
बुधवार को संगत के नाम सन्देश में उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार और डिजिटल युग में युवा अनेक प्रकार की सूचनाओं और विचारों से प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे समय में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी उन्हें सही जीवन-दृष्टि, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने विशेष रूप से ‘जेन जी’ तथा ‘जेन जी-अल्फा’ पीढ़ी के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु साहिब की बाणी को केवल धार्मिक पाठ या परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और सत्य के मार्गदर्शन के रूप में समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल सिखों के लिए एक पवित्र ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवता को सत्य, प्रेम, समानता, सेवा, विनम्रता और सदाचार का मार्ग दिखाने वाले शाश्वत गुरु हैं। गुरु साहिब की बाणी हमें केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि समझने और अपने आचरण में उतारने के लिए मिली है।”
ज्ञानी जमशेदपुरी ने कहा, “हर सिख परिवार अपने घर में गुरु साहिब की बाणी के लिए ऐसा वातावरण बनाए, जहां बच्चे प्रश्न पूछ सकें, बाणी को समझ सकें और उसके संदेश को अपने जीवन से जोड़ सकें। जब हमारी नई पीढ़ी गुरु ग्रंथ साहिब जी को समझेगी, तभी वह गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतार पाएगी।”
हरविंदर सिंह जमशेदपुरी का कहना है कि आज की जेन जी पीढ़ी को यह बताने की जरूरत है कि गुरु साहिब की बाणी पुराने समय की बात नहीं है। बाणी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। तनाव हो, भ्रम हो, अहंकार हो, प्रतिस्पर्धा हो या जीवन में सही और गलत के बीच चुनाव का प्रश्न—गुरु साहिब की बाणी हर परिस्थिति में मनुष्य को सही दिशा दिखाती है।
उन्होंने कहा कि शब्द गुरु की अवधारणा सिख जीवन की मूल भावना है और गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंगों में रचित संदेशों का अनुशरण मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने युवाओं को नियमित रूप से गुरुद्वारा साहिब जाने, बाणी सुनने, पढ़ने और उसके अर्थ को समझने के लिए प्रेरित किया।
प्रथम प्रकाश दिहाड़े के अवसर पर संगत को शुभकामनाएं देते हुए ज्ञानी जमशेदपुरी ने कहा कि यह दिन प्रत्येक सिख के लिए आत्ममंथन का अवसर भी है कि हम गुरु साहिब की बाणी को अपने जीवन में कितना उतार पा रहे हैं।
उन्होंने अंत में जोर देते हुए कहा कि इस पावन प्रथम प्रकाश दिहाड़े पर हम केवल आयोजन तक सीमित न रहें। हम संकल्प लें कि स्वयं गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी से जुड़ेंगे और अपने बच्चों तथा नई पीढ़ी को भी बाणी से जोड़ेंगे। यदि हमारी जेन जी और जेन जी-अल्फा पीढ़ी शब्द गुरु के साथ जुड़ गई, तो उनका भविष्य भी मजबूत होगा और समाज का भविष्य भी।



































