मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के भी सचिव की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिए गए डॉ शुक्ला

गौरी गांव में साढ़े चार एकड़ भूमि की खरीद में गोलमाल पाए जाने पर लिया गया फैसला

पौने 8 करोड़ की जमीन खरीद ली, कार्यकारिणी समिति या आमसभा को बताया ही नहीं

आमसभा के निर्णय पर उच्चस्तरीय जांच हुई तो गौरी की जमीन के सौदा में पकड़ाई गड़बड़ी

चांडिल के गौरी गांव में ली गई साढ़े चार एकड़ जमीन 1964 के भू सर्वे खतियान में आदिवासी के नाम

दावा है कि न्यायिक आदेश से गैर आदिवासी के लिए खरीद योग्य हो भूमि, मगर दस्तावेज नहीं

अतुल और अनाहिता टॉक से पौने 8 करोड़ में भूखंड लिया गया, मूल रैयतों से भी 2 करोड़ का सुलहनामा

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

डॉ डीपी शुक्ला, विजय सिंह राणा और देवेश अवस्थी की उत्तर प्रदेश संघ की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। उन्हें उत्तर प्रदेश संघ के संविधान के विरुद्ध कार्य करने का दोषी पाया गया है। उत्तर प्रदेश संघ की बुधवार को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। सरायकेला खरसावां जिला के चांडिल अंचल के गौरी गांव में पौने 8 करोड़ रुपए में साढ़े चार एकड़ जमीन की खरीद में गोलमाल पाए जाने पर तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जल्द ही संघ की आमसभा भी बुलाई जाएगी। उत्तर प्रदेश संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक के लिए महासचिव डॉ डीपी शुक्ला को छोड़ सभी लोगों को विधिवत आमंत्रित किया गया।

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अखिलेश दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपाध्यक्ष रवि दुबे एवं ओंकार नाथ सिंह, संयुक्त सचिव ललन प्रसाद राय, कोषाध्यक्ष गिरीश तिवारी, कार्यसमिति सदस्य उमा शंकर शर्मा और विनोद कुमार सिंह ने जांच समिति की रिपोर्ट का दोबारा अध्ययन किया। अध्यक्ष अखिलेश दुबे पर सबने दबाव डाला कि दोषियों पर कार्रवाई की जाय। इसके बाद तीनों को संस्था से बाहर करने का निर्णय लिया गया।

कार्यसमिति सदस्य तरुणकांत सिंह अमेरिका में है। सोशल मीडिया पर उन्हें सारे दस्तावेज भेज गए। उन्होंने भी सहमति दी। बैठक के पहले सूचना देकर संयुक्त सचिव शिव शंकर मिश्रा निजी कार्य से रांची निकल गए। उनके परिवार में किसी का निधन हो गया है। कार्यकारिणी सदस्य वैजनाथ दुबे नहीं आए। उत्तर प्रदेश संघ के महासचिव होने के नाते डॉ डीपी शुक्ला मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के सचिव का दायित्व भी संभाल रहे थे। उत्तर प्रदेश संघ की सदस्यता रद्द होने के कारण वे उस दायित्व से भी हटा दिए गए। उनकी जगह फिलहाल महासचिव का कार्यभार ललन प्रसाद राय संभालेंगे। इसकी संपुष्टि के लिए जल्द आमसभा आहूत की जाएगा। डॉ डीपी शुक्ला के कार्यालय आने पर भी रोक लगा दी गई है। तत्संबंधी सूचना उत्तर प्रदेश संघ और एमएनपीएस के सारे लोगों को भी दी गई है। 2019 में विजय सिंह राणा उत्तर प्रदेश संघ के अध्यक्ष थे तो डॉ डीपी शुक्ला महासचिव। देवेश अवस्थी कोषाध्यक्ष की भूमिका में थे। राणा पूर्व में टाटा स्टील के एमडी के पीए थे तो शुक्ला वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं।

गौरी गांव की जमीन की जांच समिति की रिपोर्ट में यह सब

संस्था के संविधान के मुताबिक कार्यकारिणी शांति की मंजूरी होनी चाहिए थी। आमसभा में योजना और बजट रखना चाहिए था। ऐसा कुछ नहीं हुआ।

सफाई दी गई कि कोरोना काल आ गया था। इसलिए किसी से बात करने का मौका नहीं मिला। कार्यकारिणी समिति की बैठक या आमसभा की ऑनलाइन बैठक के लिए एक लिंक तैयार नहीं किया जा सका।

गौरी गांव की जमीन इस आधार पर ली गई कि वो सीएनटी मुक्त है। तुर्रा यह कि 1964 के भू बंदोबस्त सर्वे खतियान में वो जमीन मोहन सिंह भूमिज यानी आदिवासी के नाम दर्ज है। 

दावा है कि 1967 से 1973 के बीच जगरूप सिंह नामक सामान्य कोटि के व्यक्ति को लंबे समय तक दखल के आधार पर सरायकेला सिविल कोर्ट से दिए गए न्यायिक आदेश पर स्वामित्व मिल गया है। इसी आधार पर जमीन आदिवासी से गैर आदिवासी के नाम हस्तांतरित हो चुकी है। मगर उस न्यायिक आदेश के दस्तावेज न डॉ डीपी शुक्ला के पास है, न विजय सिंह राणा।

छह साल गुजर जाने के बाद भी जमीन की पूरी तरह घेराबंदी नहीं हो सकी है। उत्तर प्रदेश संघ ने दो बार जमीन के मसले पर आंतरिक जांच कराई। पहली बार कार्यकारिणी समिति ने खुद के स्तर पर जांच का कार्य कराया। दूसरी बार वार्षिक आमसभा में सभी सदस्यों की मौजूदगी और सहमति से उच्च स्तरीय जांच समिति की घोषणा की गई। इसकी वीडियोग्राफी भी है।

सितंबर 2019 में संघ की कार्यकारिणी समिति में जमीन लेने की बात कही। कहाँ और कितने में कौन सी जमीन लेनी है? इस पर चर्चा नहीं हुई। उसी दिन सिर्फ विजय सिंह राणा और डॉ डीपी शुक्ला ने बैठक कर गौरी गांव की जमीन लेने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

फिर मार्च 2020 में उन लोगों ने गौरी गांव की जमीन के लिए ऐसे फर्म को अग्रिम भुगतान किया जिसे उस वक्त तक अतुल और अनहिता टॉक ने किसी तरीके से अधिकृत भी नहीं किया था। जुलाई 2020 में जमीन की रजिस्ट्री हुई। 2023 में उत्तर प्रदेश संघ की नई कार्यकारिणी अस्तित्व में आई। नई कार्यकारिणी के संज्ञान में यह बात आई कि तीन साल में जमीन की घेराबंदी नहीं हो पाई क्योंकि किसी तरह का विधि सम्मत विवाद है।

*कार्यकारिणी समिति ने अशोक पांडेय के नेतृत्व में जांच समिति बनाई। जांच समिति ने पाया कि जमीन की खरीद में पारदर्शिता का अभाव रहा है। और भी गड़बड़ी हुई है। जांच रिपोर्ट को वार्षिक आमसभा में रखा गया तो डॉ डीपी शुक्ला ने तर्क दिया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।

आमसभा में डॉ डीपी शुक्ला और अध्यक्ष अखिलेश दुबे ने आम सहमति से अनुराग अग्निहोत्री के नेतृत्व में एक और जांच समिति का गठन किया। जांच समिति ने विजय सिंह राणा और डॉ डीपी शुक्ला का लिखित तौर पर पक्ष लिया। कार्यकारिणी समिति की बैठकों की कार्यवाही के दस्तावेजों का अध्ययन किया।

गौरी गांव की जमीन के विषय में विद्वान अधिवक्ता अभिजीत मंडल और मलकित सिंह का मंतव्य लिया। अभिजीत मंडल का मंतव्य रहा कि जमीन का म्यूटेशन हुआ है। इसके बावजूद कई ऐसी चीजें हैं जो संदेह पैदा करती हैं। और निवेश ठीक नहीं है।

गौरी गांव की जमीन 1964 के सर्वे खतियान में रैयत मोहन सिंह सरदार दर्ज है। गांव के ही जगरूप सिंह सामान्य जाति से है। लबे समय से दखल के आधार पर सरायकेला न्यायालय में तीन मुकदमों में उनकी जीत का दावा किया गया। उसी आधार पर उक्त जमीन के आदिवासी से गैर आदिवासी के नाम हस्तांतरित होने का दावा है। इसी आधार पर 2011 में जगरूप सिंह ने वह जमीन अतुल और अनाहिता टॉक को बेच दिया। फिर 2020 में उक्त जमीन उत्तर प्रदेश संघ ने खरीदी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश संघ की रजिस्ट्री में जगरूप सिंह के पक्ष में आए तथाकथित न्यायिक दस्तावेज को संलग्न नहीं किया गया। रोचक तथ्य यह है कि जगरूप सिंह के पक्ष के न्यायिक आदेश के आधार पर जमीन का म्यूटेशन हुआ है। मगर म्यूटेशन आदेश में भी वह न्यायिक आदेश संलग्न नहीं दिख रहा है। विजय सिंह राणा और डॉ डीपी शुक्ला ने जांच समिति को बताया कि आदिवासी से गैर आदिवासी के पक्ष में भूमि को हस्तांतरित करने का न्यायिक दस्तावेज उनके पास भी नहीं है।

उत्तर प्रदेश संघ की वर्तमान कार्यकारिणी समिति ने जमीन विवाद की जांच तक चहारदीवारी समेत किसी तरह के निवेश पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद वर्तमान महासचिव डॉ डीपी शुक्ला ने पूर्व अध्यक्ष विजय सिंह राणा को पत्र दिया कि वे किसी एजेंसी से चहारदीवारी का निर्माण कराये। उल्लेखनीय है कि पिछले कार्यकाल में अध्यक्ष रहते विजय सिंह राणा और महासचिव डॉ डीपी शुक्ला ने उत्तर प्रदेश संघ ट्रस्ट का भी गठन किया जिसमें खुद संस्थापक ट्रस्टी बन गए है। ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश संघ की यूनिट भी बना दिए है। उसी ट्रस्ट की देखरेख में चहारदीवारी बनाने शुरू किया गया, वह भी खुली निविदा के बगैर। जांच समिति ने उत्तर प्रदेश संघ के रहते समान उद्देश्य के लिए गठित ट्रस्ट की प्रासंगिकता और औचित्य पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है।

उत्तर प्रदेश संघ के जमीन खरीदने के बाद खतियानी रैयत मोहन सिंह के वंशजों ने वाद दायर किया। हाईकोर्ट तक गए। इसी बीच डॉ डीपी शुक्ला ने खतियानी रैयतों के साथ सुलहनामा किया। मोहन सिंह सरदार की वंशावली के आधार पर वंशजों के हिस्से की जमीन के लिए प्रति डिसमिल राशि देना तय किया गया। यह भी सुलहनामा हुआ कि वे लोग वाद उठा लेंगे। विद्यालय बनेगा तो उन लोगों को नौकरी भी मिलेगी। इसके बाद खतियानी रैयत के वंशजों ने वाद वापस भी ले लिया। इस सुलहनामा के तहत उत्तर प्रदेश संघ को और दो करोड़ रुपए व्यय करने होंगे। 

गौरी गांव में खरीदे गये भूखंड के तीन खतियान है। 1964 के भू सर्वे खतियान में दो खाता संख्या 34 और 131 की जमीन में रैयत मोहन सिंह सरदार और उनकी जाति के तौर पर अनुसूचित जनजाति दर्ज है। खाता संख्या 125 का खतियान भी मोहन सिंह के नाम पर दर्ज है। हालांकि, उसमें जाति और पिता का नाम दर्ज नहीं है। ऑनलाइन भी सिर्फ एक खाता में जगरूप सिंह, अतुल एवं अनहिता टॉक और उत्तर प्रदेश संघ का नाम दर्ज दिखता है। बाकी दो खाता में नहीं। जांच में यह बात आई कि जमीन खरीदने के पहले विधि सम्मत राय नहीं ली गई थी।

चांडिल के गौरी गांव में जमीन खरीद के मामले की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया गया। जांच समिति द्वारा दोषी पाये जाने पर डॉ डीपी शुक्ला, विजय सिंह राणा और देवेश अवस्थी की उत्तर प्रदेश संघ की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। डॉ डीपी शुक्ला की जगह ललन प्रसाद राय फिलहाल महासचिव के दायित्व का निर्वहन करेंगे। जल्द ही आमसभा आहूत की जाएगी। अखिलेश दुबे, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संघ.

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