फतेह लाइव, रिपोर्टर.
टाटानगर रेलवे स्टेशन के मुख्य मार्ग स्टेशन रोड पर (किताडीह को जोड़ने वाली सड़क) अतिक्रमण हटाने का अभियान बुधवार को करीब तीन घंटे की देरी से शुरू हुआ. रेलवे प्रशासन ने पहले सुबह 10 बजे से अभियान चलाने की सूचना दी थी. तय समय पर टाटानगर चौक के पास आरपीएफ के जवान जेसीबी मशीन के साथ मौजूद थे, लेकिन मजिस्ट्रेट के मौके पर नहीं पहुंचने के कारण कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी.
दोपहर करीब एक बजे मजिस्ट्रेट के पहुंचते ही रेलवे लैंड विभाग, आरपीएफ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने दुकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू की. जैसे ही जेसीबी मशीनें चलीं, स्टेशन रोड पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. करीब 50 और 60 वर्षों से यहां दुकान चला रहे दुकानदारों में दहशत फैल गई. कई दुकानदार अपनी दुकानों से सामान निकालते और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाते नजर आए.
दुकानदारों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए अचानक की गई, इस कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी छिन गई है. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि रेलवे ने पहले आश्वासन दिया था कि पुनर्वास की व्यवस्था के बाद ही कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
वहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन रोड रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण था, जिसे हटाना जरूरी था. यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए यह कदम उठाया गया है. अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया था. देर शाम तक कार्रवाई जारी रही और नेताओं का जुटान भी.
रेलवे से प्राप्त सूचना अनुसार नोटिस दिए गए 27 में 10 प्रतिष्ठान हटाए गए. सोमवार को यह अभियान फिर चलेगा. पूरे अभियान में एक होटल मालिक सोशल मीडिया के सामने आया. वह हाईकोर्ट भी गया था. जहां से उसे राहत नहीं मिली. उसने आसपास के दुकानदारों की ओर इशारा किया, कि वह नहीं तोड़े गए. उसकी इस राजनीति और कुछ तथाकथित लोगों को बैठाकर रात भर खातिरदारी करने की चर्चाएं जोरों पर हो रही हैं और रोजी रोटी छीनने से परेशान होने से खफा भी हैं.
खैर, आपको बता दें कि स्टेशन में करोड़ों की लागत से अब विस्तारीकरण होना है. गुदड़ी बाजार से लेकर कीताडीह तक के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है, इसकी चर्चा आज जोर शोर से रही. तीन दशक पूर्व भी इसी तरह रेलवे का अतिक्रमण हटाओ अभियान चला था. उसके बाद स्टेशन के सामने प्रधानमंत्री के दौरे के पूर्व चर्चित सिंह होटल, फिर मोहित होटल तोड़ दिए गए. जबकि वह रेलवे के उस समय के लैंड विभाग के अधिकारियों के करीबी के थे. गोलपहाड़ी की दुकानों को भी रेलवे नोटिस कर चुका है, लेकिन योजना के प्रबल होने पर सबको धीरे धीरे हटाने के लिए रेलवे ने कमर कस रखी है.

