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जमशेदपुर प्रभात खबर में फ्रंट पेज पर छपी संदीप सावर्ण की बाइलाइन, दबाव में हैं संजय मिश्रा !

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  • फतेह लाइव की रिपोर्ट का दिखा असर, प्रताड़ित हो रहे संपादकीय सहयोगियों को मिली राहत  

फतेह लाइव रिपोर्टर

जमशेदपुर प्रभात खबर में संदीप सावर्ण की बाईलाइन फिर से प्रकाशित होने लगी है. यह सुखद है कि लगातार दो दिन तक संदीप सावर्ण की बाईलाइन खबर जमशेदपुर संस्करण में फ्रंट पेज पर प्रकाशित हुई है. देर से ही सही आखिर ‘प्रतिभा को सम्मान’ मिला है. संदीप सावर्ण ही वह पहले रिपोर्टर थे जिन्होंने अपनी रिपोर्ट से बाइलाइन हटाने का विरोध किया था. उन्होंने रिपोर्ट से नाम हटाने के संपादकीय निर्णय पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुखर होकर टिप्पणी की थी.  प्रभात खबर में पत्रकारों की प्रताड़ना को फतेह लाइव ने पूरी ईमानदारी से लगातार समाज के सामने रखने का प्रयास किया, इसका असर अब दिखने लगा है.

प्रभात खबर में संपादकीय के लोगों के बीच चर्चा है कि भारी दबाव के कारण ही संदीप सावर्ण की खबर को अब प्रमुखता से बाइलाइन देकर प्रकाशित करना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि छह लोगों के मानसिक रूप से प्रताड़ित कर अखबार छोड़ने को मजबूर करने वाले प्रभारी संजय मिश्रा के अगले निशाने पर संदीप ही थे. ऐसा इसलिए कि वह मुखर होकर अपनी बात रखने में विश्वास रखते हैं. इसी कारण उनकी खबरों से बाइलाइन हटाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा था. हालांकि यहां यह दांव उल्टा पड़ा गया और अगर चर्चाओं को सही माना जाये तो प्रभारी संंजय मिश्रा इन दिनों अपने कार्यकलाप को लेकर प्रबंधन के निशाने पर है और भारी दबाव में भी हैं. ऐसा इसलिए कि उनकी लगातार शिकायतें प्रबंधन तक पहुंच रही है.

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दरअसल, संजय मिश्रा के जमशेदपुर प्रभात खबर में संपादक बनकर आने के बाद से ही संपादकीय सहयोगियों की प्रताड़ना का जो दौर चला उसने कई लोगों को नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया. अखबार छोड़ने वाले संपादकीय सहयोगियों का कहना है कि संजय मिश्रा की सोच ही संपादकीय सहयोगियों पर विचार थोपने वाली रही है. उन्हें अखबार के लिए मुखर होने वाले विचार रखने वाले नहीं बल्कि उनकी हां में हां मिलने वाले चापलूसों की फौज चाहिए. उन्होंने प्रबंधन के ऊपर तक यह बात पहुंचाने की कोशिश भी की लेकिन यहां एक्सटेंशन पर चल रहे एमडी आरके दत्ता, प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी, स्टेट हेड अनुज सिन्हा से लेकर भास्कर से चलता किये गये एचआर हेड विकास कुमार जैसे लोगों को वहीं सच दिखा जो संजय मिश्रा ने झूठ की चासनी में डूबोकर इनके सामने परोस दिया.

‘विद्रोही’ ने बतायी खरी-खरी, कैसे समाज को जागरूक करेंगे ये लोग : क्लिक कर यह आलेख पढ़ें 

ऑनलाइन न्यूज पोर्टल ‘विद्रोही’ ने 18 मार्च 2024 को एक आलेख प्रकाशित किया गया था. इसमें प्रभात खबर के सामाजिक दायित्व का सच सामने लाने का प्रयास किया गया. यह बताया कि अखबार के पद से जुड़ी प्रतिष्ठा को निजी उपलब्धि मान लेने वाले प्रभात खबर के तथाकथित मठाधीशों ने किस तरह समाज को दोहरे पर लगाकर खड़ा कर दिया है. मतदाता जागरूकता अभियान निकालकर समाज को जागरूक करने का दंभ भरने वाले अपना मूल दायित्व निभाना कैसे भूल गये. दूसरी ओर देखें तो अखबार में ही अपने ही लोगों को प्रताड़ित कर निहित स्वार्थवश नौकरी छोड़ने पर मजबूर करने का षडयंत्र रचा जा रहा है. सवाल यह है कि क्या ये लोग समाज को जागरूक करेंगे ?‍ विद्रोही ने शुरुआत की है लेकिन तब क्या होगा जब समाज के लोग प्रभात खबर के मठाधीशों से उनके कृत्यों का जबाव मांगना शुरू कर देंगे? तब घूम-घूमकर सम्मान कराने वाले इन मठाधीशों का क्या होगा? जिन्होंने खुद को ही कानून और अदालत समझकर न्याय करना और चरित्र का प्रमाणपत्र बांटना शुरू कर दिया है.

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