Wage Revision In Tata Steel : राजनीति में मुर्दों को जिंदा रखा जाता है ताकि समय आने पर वो बोलें… छह घंटे चली टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग, अंदर पढ़ें किसने क्या कहा

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रवि के जमाने में वेज रिवीजन पर जो कहा था, टुन्नू को वो अब सुनना पड़ा

टुन्नू को कहना पड़ा, हमरो देखे के होई कि उ टाइम हम का बोलले बानी

चरणजीत सिंह.

नाना पाटेकर अभिनीत मूवी “राजनीति” का एक मशहूर डायलाग है, राजनीति में मुर्दों को जिंदा रखा जाता है ताकि समय आने पर वो बोलें। धनतेरस के दिन माइकल जान आडिटोरियम में टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग (कार्यकारिणी समिति की बैठक) हुई जो छह घंटे चली। टुन्नू चौधरी के पहले और दूसरे कार्यकाल में चली यह सबसे लंबी कमेटी मीटिंग रही। होती भी क्यों ना, पहली बार वेज रिवीजन पर चर्चा जो हुई। मंच पर आसीन टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी अवाक रह गए जब स्पेयर मैनुफैक्चरिंग डिपार्टमेंट के कमेटी मेंबर प्रदीप दुबे ने गड़ा मुर्दा निकाला।

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टुन्नू चौधरी के पूर्ववर्ती अध्यक्ष आर रवि प्रसाद के कार्यकाल में वेज रिवीजन का समझौता हुआ था। तब टुन्नू चौधरी विपक्ष में थे। वेज रिवीजन का समझौता होने के बाद टुन्नू चौधरी ने तब मीडिया में जो प्रतिक्रिया दी थी, वो अब प्रदीप दुबे ने बाहर निकाली। सारे कमेटी मेंबरों को वो सब सुनाया। कमेटी मीटिंग के समापन के पहले टुन्नू चौधरी ने माइक संभाला तो एसएन ग्रेड से चुने गए कमेटी मेंबर प्रदीप दुबे को संबोधित करते हुए भोजपुरी में संवाद किया, तूँ त हमर इतना पुरान स्टेटमेंट याद रखले बाड़ा। मंच के नीचे से प्रदीप दुबे का प्रतिउत्तर रहा, ज्यादा पुराना नइखे पांचे साल भइल बा। टुन्नू चौधरी को कहना पड़ा, हमरो देखे के होई कि उ टाइम हम ग्रेड में का-का बोलले बानी।

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टाटा वर्कर्स यूनियन

2019 में आर रवि प्रसाद टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष थे, तो वेज रिवीजन का समझौता हुआ था। समझौता के बाद बकौल प्रदीप दुबे विपक्षी खेमा में रहते हुए टुन्नू चौधरी ने कहा था कि वेज रिवीजन समझौता में 19 महीने की देरी होने के चलते कर्मचारियों को एलाउंस का एरियर नहीं मिला है। इससे हरेक कर्मचारी को न्यूनतम 65 हजार रूपये का नुकसान हुआ है। अगर समय पर समझौता होता तो कर्मचारियों को वह नुकसान नहीं उठाना पड़ता। प्रदीप दुबे ने टुन्नू चौधरी को वो वक्तव्य भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वेज रिवीजन के समझौता में आर रवि प्रसाद को एनएस ग्रेड के कर्मचारियों के डीए प्रति प्वाइंट वैल्यू में कम से कम 50 फीसद की बढ़ोत्तरी तो जरूर करानी चाहिए थी।

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इसके बाद प्रदीप दुबे ने टुन्नू चौधरी को संबोधित करते हुए कहा कि आपके मुताबिक एनएस कर्मचारियों के डीए बढ़कर साढ़े चार रूपये प्रति प्वाइंट तो पुराने वेज समझौता के समय ही हो जाना चाहिए था। आगामी वेज समझौता में साढ़े चार रूपये के ऊपर जो राशि बढ़वाएंगे, वही यूनियन अध्यक्ष की उपलब्धि मानी जाएगी। छह घंटे तक चली कमेटी मीटिंग में तीन दर्जन से अधिक कमेटी मेंबरों ने अपनी बात रखी। 99 फीसद कमेटी मेंबरों का संबोधन का मुख्य बिंदू वेज रिवीजन ही रहा।

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पीएन सिंह संग जो हुआ, उससे यूनियन गर्त में गया

कोक प्लांट के कमेटी मेंबर एस एन शर्मा ने टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष पीएन सिंह के सेवानिवृति के बाद हुए घटनाक्रम का जिक्र किया। महज ढाई साल के कार्यकाल में पीएन सिंह ने जिस तरीके से टाटा स्टील के कर्मचारियों का नेतृत्व किया था, वो यादगार बन चुका है। टाटा स्टील की नौकरी से पीएन सिंह सेवानिवृत हो गए थे, तो यूनियन अध्यक्ष के तौर पर उनका छह माह का कार्यकाल बचा हुआ था। टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग में सर्वसम्मति से उनका को आप्शन भी किया गया था।

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इसके बाद भी टाटा स्टील प्रबंधन ने उन्हें कंपनी के कार्यक्रमों में बुलाना छोड़ दिया था, उनके साथ कर्मचारियों से जुड़े किसी भी मसले पर बातचीत बंद कर दी थी। हालांकि, तब पीएन सिंह रोजाना यूनियन कार्यालय में जरूर बैठते रहे। एस एन शर्मा ने उसी घटनाक्रम को याद दिलाय कि पीएन सिंह के अध्यक्ष रहते उन्होंने यूनियन और प्रबंधन को नजदीक से देखा था। पीएन बाबू रिटायर हो गए थे तो यूनियन के लोगों ने ही प्रबंधन को मेल किया था कि उनसे बात नहीं करे।

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वे उसी वक्त समझ गए थे कि अब टाटा वर्कर्स यूनियन गर्त में चला गया। एस एन शर्मा के संबोधन का असर रहा कि कमेटी मीटिंग के बाद यूनियन कार्यालय के बाहर नए और पुराने कमेटी मेंबर उस कालखंड में हुए घटनाक्रम की खूब चर्चा किए। याद दिला दें कि टाटा स्टील प्रबंधन ने पीएन सिंह को बतौर यूनियन अध्यक्ष बुलाना बंद कर दिया था। तब टुन्नू चौधरी डिप्टी प्रेसिडेंट थे। कंपनी प्रबंधन के बुलावा पर उन्होंने पीएन सिंह की जगह खुद एक्टिंग अध्यक्ष के तौर पर जाना शुरू किया था।

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कमेटी मेंबरों पर लगातार एक्शन पर आरसी झा की आपत्ति

टाटा वर्कर्स यूनियन के पुराने खिलाड़ी आरसी झा ने कमेटी मीटिंग में कमेटी मेंबरों पर लगातार हो रहे एक्शन पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कमेटी मेंबरों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। यह रूकनी चाहिए। सेफ्टी के नाम पर कर्मचारियों के साथ प्रताड़ना हो रही है। कंपनी अधिकारियों की तरह फ्लैक्सी पंच की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने एक और गंभीर मसला उठाया। बोले कि ड्यूटी से घर आने के बाद महिला कर्मचारियों को कंपनी के अधिकारी कॉल करते हैं। यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बर्लिन की दीवार टूट सकती है, धारा 370 हट सकता है तो न्यू सिरीज के कर्मचारियों का डीए प्रतिशत में क्यों नहीं हो सकता। यूनियन नेतृत्व सही दिशा में प्रयास करे तो यह भी संभव है।

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शिवेश ने ट्रेड अप्रेंटिस के समायोजन का उठाया मसला

टाटा वर्कर्स यूनियन में उपाध्यक्ष रह चुके पुरानी खिलाड़ी शिवेश वर्मा ने वेज रिवीजन की बात की तो ट्रेड अप्रेंटिस के समायोजन के मसले पर चल रहे विवाद का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि ट्रेड अप्रेंटिस टाटा स्टील की रीढ़ है। ये कंपनी की रीढ़ हैं। इनका समायोजन टाटा स्टील के रोल पर होना चाहिए, जैसा कि यूनियन अध्यक्ष ने पहले कहा भी है। शिवेश ने याद दिलाया कि 1997 के पहले स्टील ग्रेड के कर्मचारियों को भी प्रति प्वाइंट वैल्यू के आधार पर डीए मिलता था। उस वक्त हुए वेज समझौता में स्टील ग्रेड का डीए प्रतिशत में किया गया था।

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उसी तरह एनएस ग्रेड के कर्मचारियों का भी हो सकता है। शिवेश ने हाउस को बताया कि 24 जून 1983 को हुए वेज समझौता में कर्मचारियों को डीए प्रति प्वाइंट वैल्यू 1.30 रुपए था। 1995 में यह 2 रुपए हुआ। 29 साल बाद एनएस ग्रेड का डीए 3 रूपये है। उन्होंने कहा कि वेज रिवीजन के मौलिक ढांचे में बदलाव नहीं किया जाय। समयावधि कम करने का प्रयास हो। स्पैन भी समान रखा जाय। पूर्व की भांति डीए का समायोजन शत प्रतिशत होना चाहिए। वेज रिवीजन के तत्काल बाद एनोमली कमिटी बनाई जानी चाहिए। उच्च शिक्षा के लिए बिना ब्याज के एजुकेशन लोन की व्यवस्था की जाय। ट्यूशन फीस में मिलने वाली रकम 600 रुपए कम है। इस पर टैक्स भी लगता हैं। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। नए भत्तों की भी शुरूआत की जाय।

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— यह कमेटी मेंबर भी बोले—

अरविंद पांडेय (कोक प्लांट), आरके सिंह (टीएंडी), बिजेंद्र शाह (इंजीनियरिंग सर्विसेज), संतोष सिंह (सेफ्टी), अमित कुमार (जी ब्लास्ट फर्नेस), सुब्रतो सिन्हा (आरएमएम), सोम्या रंजन दास (आरएमएम), तपन कुमार (पावर सिस्टम), राजेश कुमार सिंह (कोक प्लांट), संतोष पांडेय (पिलेट प्लांट), बंटी पांडेय (कोक प्लांट), सुशांत शेखर (एसएमडी), विकास दास (एलडी थ्री), राजेश कुमार (कोक प्लांट), पारितोष कुमार (एफएमडी), गुलाब चंद्र यादव (सीआरएम), सरोज सिंह (ट्यूब डिवीजन), सुमन कुमार (पावर सिस्टम), राकेश कुमार सिंह (टीएमएच), पवन कुमार (एमइडी), राकेश रंजन (फील्ड मेंटनेंस), पवन कुमार सिंह (एमइडी मैकेनिकल), एच के यादव, निरंजन कुमार, बसंत बाग (एलडी वन), संतोष पांडेय (सिंटर प्लांट), बालाजी भगत (सीआरएम बारा), दिनेश कुमार (एसएमडी), एसएन सिंह (एचएसएम) आदि।

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