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TMC Symbol War: TMC का नाम-चिन्ह छिना तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता, EC के फैसले को दी चुनौती; अब ‘घासफूल’ की लड़ाई अदालत में

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चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद बढ़ा विवाद, ममता गुट को मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम; अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ और ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’

फतेह लाइव, रिपाेर्टर। 

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। आयोग का यह आदेश आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए जारी किया गया है।

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ममता बनर्जी की याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद गहरा गया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि दोनों पक्ष पार्टी की पहचान पर दावा कर रहे हैं और अंतिम फैसला चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत होने वाली प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।

उप-चुनाव से पहले EC ने दोनों गुटों को दिए नए नाम और सिंबल

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू है। आयोग ने कहा है कि मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला अलग प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

‘घासफूल’ पर रोक, ममता ने कहा- लड़ाई जारी रहेगी

ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा मुद्दा पार्टी का पारंपरिक ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न और ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम है। रिपोर्टों के मुताबिक, ममता ने आयोग के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को समझौते के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की मूल पहचान वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। अब इस विवाद का एक अहम हिस्सा सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गया है। अदालत में चुनौती के बाद यह मामला चुनाव आयोग की प्रक्रिया के साथ-साथ न्यायिक समीक्षा के दायरे में भी आ गया है।

6 अक्टूबर को उपचुनाव, 9 अक्टूबर को नतीजे

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। उपचुनाव से ठीक पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद ने राजनीतिक घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

चुनाव आयोग ने बताया कि कम समय में पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम निपटारा संभव नहीं था। इसी वजह से उपचुनावों के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न दिए गए।

अब असली लड़ाई पार्टी की पहचान की

तृणमूल कांग्रेस में यह विवाद विधानसभा चुनाव के बाद सामने आए आंतरिक मतभेदों के बीच गहराया। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के भीतर बागी विधायकों और नेताओं के अलग रुख के बाद मामला संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की वैध पहचान तक पहुंच गया।

अब ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती से यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि आगामी उपचुनावों के दौरान पार्टी की पहचान किस रूप में सामने आएगी और अंततः ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न पर दावा किस प्रक्रिया से तय होगा।

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