कर्मचारियों को भोजन नहीं मिलने और भारी भीड़ से नाराज वाइस चेयरमैन, अधिकारियों की सब्सिडी बहाल करने की मांग
15 दिनों में समाधान नहीं तो कैंटीन कमेटी की जिम्मेदारी छोड़ने की चेतावनी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में टाटा स्टील की कैंटीन व्यवस्था में बदलाव के बाद कर्मचारियों की परेशानी का मामला अब टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर भी गंभीर होता दिख रहा है। सेंट्रल कैंटीन में उमड़ रही भीड़, भोजन मिलने में परेशानी और अधिकारियों की सब्सिडी बंद होने के मुद्दे पर सेंट्रल कैंटीन मैनेजिंग कमेटी के वाइस चेयरमैन नितेश राज ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू को पत्र लिखकर पुरानी कैंटीन व्यवस्था बहाल करने और अधिकारियों की सब्सिडी दोबारा शुरू कराने की मांग की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि 10 से 15 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें कैंटीन कमेटी की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए।
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यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब फतेह लाइव ने 17 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट में टाटा स्टील की कई कैंटीनों में नई व्यवस्था के शुरुआती दिनों में नाश्ता और भोजन समय पर नहीं मिलने, लंबी कतारों तथा कर्मचारियों की परेशानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उस समय कंपनी ने शुरुआती व्यवधान दूर करने और भोजन की आपूर्ति सामान्य करने की बात कही थी। अब सेंट्रल कैंटीन में भीड़ और व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
पुरानी व्यवस्था में अलग-अलग कैंटीन से मिलती थी सुविधा
नितेश राज ने अपने पत्र में कहा है कि पिछले कुछ दिनों से सेंट्रल कैंटीन में अत्यधिक भीड़ की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद कैंटीन खुलने के शुरुआती समय में भीड़ नियंत्रित नहीं हो पा रही है। स्थिति ऐसी है कि कई कर्मचारी कैंटीन जाने से भी कतरा रहे हैं।
उन्होंने पुरानी व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि पहले टाटा स्टील के अधिकारी एवं कर्मचारी और वेंडर कर्मचारी अलग-अलग कैंटीन में भोजन करते थे। इससे दोनों वर्गों को सुविधा मिलती थी। नई व्यवस्था में बदलाव के बाद भीड़ और भोजन प्रबंधन की समस्या सामने आ रही है। उन्होंने मांग की है कि उच्च प्रबंधन से वार्ता कर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि कर्मचारियों को समय पर भोजन मिल सके और कैंटीन में अनावश्यक अफरातफरी से बचा जा सके।
अधिकारियों की सब्सिडी बंद होने पर भी सवाल
पत्र में अधिकारियों को मिलने वाली कैंटीन सब्सिडी बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। नितेश राज का कहना है कि सब्सिडी बंद होने के कारण अधिकारी वर्ग भी कैंटीन का उपयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने प्रबंधन से इस सुविधा को दोबारा शुरू कराने की मांग की है।
उनका तर्क है कि कैंटीन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए केवल भीड़ नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
बदलाव से पहले जताई थी गड़बड़ी की आशंका
नितेश राज ने पत्र में दावा किया है कि नई व्यवस्था लागू होने से दो दिन पहले ही उन्होंने टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर संभावित गड़बड़ियों के बारे में आगाह किया था। उन्होंने व्यवस्था में सुधार करने का आग्रह भी किया था।
पत्र के अनुसार, उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद कैंटीन में अफरातफरी की स्थिति बनी और कई कर्मचारियों को भोजन तक नहीं मिल सका। उन्होंने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सेंट्रल कैंटीन मैनेजिंग कमेटी के वाइस चेयरमैन के रूप में दी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए वह मौजूदा परिस्थितियों में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
15 दिनों का अल्टीमेटम, समाधान नहीं तो छोड़ेंगे जिम्मेदारी
नितेश राज ने यूनियन अध्यक्ष से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 से 15 दिनों के भीतर समाधान कराने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि टाटा स्टील के अधिकारियों एवं कर्मचारियों और वेंडर कर्मचारियों के लिए पुरानी अलग-अलग कैंटीन व्यवस्था बहाल की जाए तथा अधिकारियों की बंद सब्सिडी फिर शुरू कराई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में समस्या का समाधान नहीं होने की स्थिति में उन्हें सेंट्रल कैंटीन मैनेजिंग कमेटी की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए।
अब सवाल यह है कि कर्मचारियों की सुविधा से जुड़े इस मामले में टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील प्रबंधन कितनी तेजी से कदम उठाते हैं। कैंटीन में समय पर भोजन उपलब्ध कराना कर्मचारियों की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में व्यवस्था में सुधार और शिकायतों का ठोस समाधान ही इस विवाद को खत्म कर सकता है।


































