Jamshedpur/Potka : जनजातीय भाषा भूमिज को जेटेट नियमावली 2025 में शामिल करने की मांग, आदिवासी भूमिज समाज ने किया प्रदर्शन

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  • झारखंड सरकार पर भेदभाव का आरोप, व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी गई
  • भूमिज भाषा के बहिष्कार से बढ़ा आक्रोश, आंदोलन की तैयारी में आदिवासी समाज
  • आदिवासी भूमिज समाज ने जताई उम्मीद, सरकार से जल्द समाधान की अपील

फतेह लाइव, रिपोर्टर

पोटका प्रखंड के हाता में आदिवासी भूमिज समाज झारखंड की ओर से जनजातीय भाषा भूमिज को जेटेट नियमावली 2025 में शामिल करने को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई. इस दौरान बताया गया कि सरकार द्वारा जारी जेटेट नियमावली 2025 के प्रारूप में भूमिज भाषा को शामिल नहीं किया गया है, जबकि भूमिज भाषा को पहले जैक द्वारा आयोजित जेटेट वर्ष 2012, 2013 और 2016 में कोड संख्या 57 के तहत शामिल किया गया था. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की 2014 और 2015 की परीक्षाओं में भी भूमिज भाषा को शामिल किया गया था. वर्ष 2024-25 की चौकीदार नियुक्ति परीक्षा में भी यह भाषा सम्मिलित रही है. आदिवासी भूमिज समाज ने कहा कि यह भाषा उनकी मातृभाषा होने के कारण उनकी पहचान और अस्तित्व से जुड़ी है.

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आदिवासी भूमिज समाज ने बताया कि वे वर्ष 2020 से मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, कार्मिक विभाग, शिक्षा विभाग एवं भाषा संबंधित सरकारी विभागों को कई पत्र भेज चुके हैं और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से संपर्क भी कर चुके हैं. इसके बावजूद झारखंड सरकार ने भूमिज भाषा को नियमावली 2025 के प्रारूप में शामिल नहीं किया, जिससे समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है. उन्होंने कहा कि भाषा के इस बहिष्कार से युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित होना पड़ेगा. आदिवासी भूमिज समाज ने सरकार से अपील की है कि वे इस भाषा को नियमावली में अवश्य शामिल करें. यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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प्रेस वार्ता में आदिवासी भूमिज समाज झारखंड के सलाहकार सदस्य सिद्धेश्वर सरदार, अध्यक्ष जयपाल सिंह सरदार, हरि सिंह भूमिज, पुतुल सरदार, हिमांशु सिंह, उमा पद सरदार, मानिक सरदार, कार्तिक सरदार सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य मौजूद थे. सभी ने सरकार से अनुरोध किया कि वे भूमिज भाषा को जेटेट नियमावली 2025 में शामिल कर हजारों भूमिज भाषा प्रेमियों की आशाएं पूरी करें और उन्हें उनकी अधिकार एवं पहचान दिलाएं.

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