Giridih : 9 जुलाई को राष्ट्रीय आम हड़ताल, केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद

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  • चार श्रम संहिताओं की वापसी और दवा प्रतिनिधियों के अधिकारों के लिए BSSR यूनियन का जोरदार अभियान
  • मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मजदूर संगठनों का देशव्यापी समर्थन, आंदोलन को मिलेगी मजबूती

फतेह लाइव, रिपोर्टर

देशभर की 11 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आगामी 9 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय आम हड़ताल का आयोजन किया जा रहा है. इस हड़ताल का उद्देश्य केंद्र सरकार की नवउदारवादी, कॉरपोरेट समर्थक और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट विरोध प्रकट करना है. महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण, और श्रमिक अधिकारों के हनन के खिलाफ यह एक राष्ट्रव्यापी संघर्ष का स्वरूप ले चुका है. केंद्र सरकार से मुख्य मांगों में चारों श्रम संहिताओं की वापसी, SPE एक्ट 1976 की बहाली, जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी की छूट, और दवा प्रतिनिधियों को कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है.

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श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई तेज ट्रेड यूनियनें लामबंद

गिरिडीह में BSSR यूनिट के बैनर तले इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए शनिवार को शहर के चार प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं की गईं. इन नुक्कड़ सभाओं में राज्य सचिव मृदुल कांति और यूनिट उपाध्यक्ष अविजित दान ने आम लोगों से संवाद करते हुए हड़ताल के पीछे की गंभीर वजहों को सामने रखा. उन्होंने बताया कि डॉक्टर लेन में धरना का आयोजन भी किया जाएगा. दवा प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन ₹26,910, 8 घंटे कार्य दिवस, ओवरटाइम भुगतान और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को खत्म करने जैसी मांगे शामिल हैं.

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नुक्कड़ सभाओं के जरिए जनता को जोड़ा गया, डॉक्टर लेन में धरने की तैयारी

इस हड़ताल को झारखंड और बिहार के 12,000 मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव समेत देशभर के लाखों प्रतिनिधियों और करीब 30 करोड़ मजदूरों का समर्थन मिल रहा है. भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) और केमिस्ट संगठन GCDए ने भी इस हड़ताल को नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है. सिर्फ भाजपा समर्थित ट्रेड यूनियन BMS को छोड़कर बाकी सभी यूनियनें इस आंदोलन में शामिल हो रही हैं. यूनियन का स्पष्ट कहना है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो संघर्ष और तेज किया जाएगा.

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