डिस्चार्ज याचिका खारिज, विशेष PMLA कोर्ट में आगे बढ़ेगी कार्रवाई; मामला कथित जमीन अधिग्रहण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं जमीन मामले में झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें रांची की विशेष PMLA अदालत में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने और मामले से उन्हें आरोपमुक्त किए जाने की मांग की गई थी।
मामला रांची के बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की है। सोरेन ने विशेष PMLA अदालत के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी गई थी।
8 जून को निचली अदालत ने खारिज की थी याचिका
हेमंत सोरेन ने पहले विशेष PMLA अदालत में आपराधिक कार्यवाही से डिस्चार्ज किए जाने की मांग की थी। अदालत ने 8 जून 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद सोरेन ने 31 अगस्त को हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 सितंबर को आदेश सुरक्षित रखा गया था।
अब PMLA कोर्ट में आगे बढ़ेगी कार्यवाही
हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद विशेष PMLA अदालत में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में सह-आरोपी अंतु तिर्की, वास्तुकार विनोद कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं।
हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हेमंत सोरेन दोषी ठहरा दिए गए हैं। जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों पर अंतिम फैसला आपराधिक न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा। सोरेन ने आरोपों से इनकार किया है।
हाई कोर्ट में एक और कानूनी प्रक्रिया जारी
इस मामले से जुड़ी हाई कोर्ट की एक अन्य कार्यवाही भी जारी है। 9 सितंबर के आदेश में अदालत ने ED को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था और मामले को 14 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया गया है।



































