IIT रुड़की में NSA अजीत डोभाल ने सुनाया युवावस्था का वो किस्सा
जब 15 दिन तक नहीं लौटी इंटेलिजेंस टीम; जांच के बीच मिली जिंदगी की तीन बड़ी सीख
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। डोभाल के मुताबिक, जब वह 20 की उम्र में युवा IPS अधिकारी के तौर पर सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब एक सीमा क्षेत्र में भेजी गई टीम तय समय पर वापस नहीं लौटी। कई दिन गुजरने के बाद उन्हें पता चला कि टीम को चीनी सैनिकों ने हिरासत में ले लिया था।
8 दिन में लौटना था मिशन, 15 दिन बाद भी नहीं मिली खबर
डोभाल ने बताया कि उस समय उनकी जिम्मेदारी में सीमावर्ती इलाकों की निगरानी और PLA यानी चीनी सेना की गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना भी शामिल था। एक बार सीमा क्षेत्र में इंटेलिजेंस मिशन भेजा गया। टीम को करीब आठ दिन में लौटना था, लेकिन तय समय बीत गया और कोई सूचना नहीं मिली। पहले पांच दिन, फिर 10 दिन और देखते ही देखते करीब 15 दिन गुजर गए। किसी प्राकृतिक आपदा या हिमस्खलन की भी सूचना नहीं थी। ऐसे में डोभाल की चिंता लगातार बढ़ती गई।
मुख्यालय से आया फोन, खुला पूरा राज
इसी बीच मुख्यालय से उन्हें फोन आया। वरिष्ठ अधिकारी ने पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा के उस पार भेजा है। डोभाल ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि टीम वापस लौट रही होगी। इसके बाद उन्हें जानकारी दी गई कि मिशन पर गए लोगों को चीनी सैनिकों ने पकड़ लिया है और उनसे पूछताछ की गई है। बाद में बातचीत और समझौते के जरिए उन्हें वापस लाया गया। डोभाल के मुताबिक, लौटने के समय उनकी हालत बेहद खराब थी।
‘मुझे लगा मेरा करियर खत्म हो गया’
घटना के बाद जांच शुरू हुई। डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो चुका है। हालांकि जांच के बाद उन्हें इस घटना के लिए दोषी नहीं माना गया। उनके मुताबिक, बाद में पता चला कि मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए नक्शों और स्केच में कुछ खामियां थीं, जिनकी वजह से मिशन में समस्या पैदा हुई।
एक बुजुर्ग शेरपा ने दी जिंदगी की बड़ी सीख
इस मुश्किल दौर में डोभाल काफी परेशान थे। तभी उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उनकी परेशानी का कारण पूछा। डोभाल ने उसे बताया कि उन्होंने बहुत उम्मीदों के साथ करियर शुरू किया था, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि सब कुछ गलत हो गया है।
शेरपा ने उन्हें नक्शा पढ़ने का उदाहरण देते हुए जिंदगी के तीन अहम सवाल बताए—
1. आपको पता होना चाहिए कि आप इस समय कहां हैं।
2. आपको पता होना चाहिए कि आपको जाना कहां है।
3. आपको यह पता होना चाहिए कि वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।
डोभाल के मुताबिक, बर्फीले पहाड़ों में वर्षों तक काम कर चुके उस शेरपा की ये बातें उनके जीवन पर गहरा असर डाल गईं।
IIT छात्रों से बोले- आपके सामने अवसरों की कमी नहीं
दीक्षांत समारोह में डोभाल ने छात्रों से कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सामने अवसरों की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने तकनीक को आने वाले समय में देश और समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण कारक बताया।
उनका संदेश था कि जीवन में मुश्किल दौर आना असामान्य नहीं है। ऐसे समय में व्यक्ति को घबराने के बजाय अपनी वर्तमान स्थिति, अपने लक्ष्य और उस लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।
यह कहानी सिर्फ एक पुराने इंटेलिजेंस मिशन की नहीं, बल्कि उस दौर की है जब एक युवा अधिकारी को लगा था कि उसका करियर खत्म हो गया है—और एक बुजुर्ग शेरपा की तीन पंक्तियों ने उसे जिंदगी को नए नजरिए से देखने की दिशा दे दी।




































