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Jamshedpur : मीडिया के असर और मानगो के पूर्व प्रधान इन्दर सिंह के प्रयास ने आखिरकार ढूंढ़ निकाला मृतक का परिवार, अब पत्नी को मिल सकेगा मुआवजा

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फतेह लाइव, रिपोर्टर।

कभी-कभी किसी खबर का असर सिर्फ कागज के पन्नों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह किसी परिवार के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन जाता है। ऐसी ही इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल जमशेदपुर में देखने को मिली, जहां मीडिया की पहल और मानगो गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान एवं समाजसेवी इन्दर सिंह इन्दर के प्रयासों से दिवंगत हरभजन सिंह के परिजनों का पता आखिरकार चल गया। मानगो के माधो बाग कॉलोनी में रह रही उनकी पत्नी बीबी चरणजीत कौर के सामने अब उनके दिवंगत पति के लंबित मुआवजे की उम्मीद जगी है।

परिजनों की तलाश की मुहिम की जो शुरुआत इन्दर सिंह इन्दर ने की थी, उसमे गुरचरण सिंह, संत कुटिया गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के पदाधिकारी ने भी महत्वपूर्ण सहयोग किया। सामूहिक प्रयासों से वर्षों से अपने पति के मुआवजे और उनसे जुड़ी जानकारी की प्रतीक्षा कर रहीं बीबी चरणजीत कौर तक आखिरकार यह खबर पहुंच सकी।

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अपने पति के मुआवजे से संबंधित जानकारी मिलने पर बीबी चरणजीत कौर ने इन्दर सिंह इन्दर के साथ-साथ उन सभी पत्रकारों का आभार जताया, जिन्होंने दिवंगत हरभजन सिंह के मुआवजे से संबंधित खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया। उन्होंने कहा कि यदि इन्दर सिंह इन्दर के प्रयासों के साथ मीडिया का सहयोग नहीं मिलता, तो शायद उन्हें कभी यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनके पति के मुआवजे के लिए प्रयास चल रहे हैं। बीबी

वहीं, मानगो गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान एवं समाजसेवी इन्दर सिंह इन्दर ने कहा कि पीड़ित परिवार को ढूंढ़ निकालना उनके लिए बेहद संतोष और आत्मिक संतुष्टि का विषय है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रयास में मीडिया की भूमिका अहम और अत्यंत महत्वपूर्ण रही। खबरों के माध्यम से मामला सामने आया और उसके बाद लोगों ने इसे मानवीय संवेदना से जोड़कर परिवार तक पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने मीडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उसकी आवाज समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक न्याय और सहायता पहुंचाने का माध्यम बने।

ओडिशा के सम्बलपुर में आरटीओ कार्यालय में पदस्थापित आचार्यजी ने इस मामले में इन्दर सिंह इन्दर से संपर्क कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।

दिवंगत हरभजन सिंह के परिवार का मिल जाना केवल एक परिवार को उसके अधिकार की उम्मीद मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि जब मीडिया, समाजसेवी और आम नागरिक इंसानियत के लिए एकजुट होकर प्रयास करते हैं, तो वर्षों से बिछड़ा कोई अपना भी मिल सकता है और किसी पीड़ित परिवार के लिए न्याय का रास्ता खुल सकता है।

गौरतलब है कि ओडिशा के संबलपुर निवासी सरदार हरभजन सिंह का वर्ष 2023 में निधन हो गया था। निधन के बाद से उनके परिजनों अथवा निकट संबंधियों का पता नहीं चल पाने के कारण ओडिशा सरकार की ओर से निर्धारित मुआवजा राशि उनके वास्तविक हकदारों तक नहीं पहुंच पा रही है। अब ओडिशा सरकार के संबलपुर जिला प्रशासन द्वारा मृतक के परिजनों की तलाश की जा रही है।

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