निर्धारित व्यवस्था के तहत फील्ड मैकेनिकल मेंटनेंस के कर्मचारियों का प्रमोशन हुआ तो थपथपा ली पीठ

ये वही विभाग है जहां प्रॉक्सी पंचिंग में कमेटी मैंबर शुभम टाटा स्टील गम्हरिया भेज दिए गए

शुभम अब न टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य रह गए, न ही एफएमएम के कमेटी मैंबर

कर्मचारियों के तबादले पर ठोस नीति बनाने की आवाज उठाई तो शैलेन्द्र नहीं रहे जेडीसी चेयरमैन

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा स्टील के फील्ड मैकेनिकल मेंटेनेंस विभाग (एफएमएम) के कर्मचारियों को लंबे अरसे बाद सुखद सूचना मिली. तयशुदा व्यवस्था के तहत डिप्लोमा कर चुके कर्मचारियों ने आंतरिक परीक्षा दी. उत्तीर्ण हुए तो उनका ब्लॉक दो से तीन में प्रमोशन हो गया. इसके बाद जो कुछ हुआ वो नाटकीय रहा. एफएमएम के नवनियुक्त जेडीसी चेयरमैन राकेश रंजन, कमेटी मैंबर राजेश कुमार एवं आशीष प्रधान और प्रमोशन आए कर्मचारियों के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के कार्यालय आए.

ये हैं शैलेन्द्र

यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू को अभिनंदन किया. जश्न भी मना. महामंत्री, कोषाध्यक्ष और उपाध्यक्ष को भी पुष्पगुच्छ थमा गए. उस समय यूनियन कार्यालय में और लोग भी थे. उनकी संक्षिप्त टिप्पणी थी, शुभम और शैलेन्द्र के बाद डर का अभिनंदन.

ये शुभम

फील्ड मैकेनिकल मेंटेनेंस (एफएमएम) विभाग में कुछ दिन पहले तक शैलेन्द्र कुमार जेडीसी चेयरमैन थे. एक साथ दर्जनों कर्मचारियों को इस विभाग से उस विभाग में स्थानांतरित किया गया. शैलेन्द्र चाहते थे कि उनके ग्लोबल विभाग में कर्मचारियों के तबादले के लिए ठोस नीति बननी चाहिए. हर स्तर पर आवाज उठाई  सुनवाई नहीं हुई तो जेडीसी चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया.

कर्मचारियों के नियमित प्रमोशन पर गुलदस्ता लेते टुन्नू चौधरी

मजदूर हित के मसले पर पहले भी कमेटी मैंबर जेडीसी चेयरमैन के पद से इस्तीफा का पत्र यूनियन अध्यक्ष को भेजते रहे हैं. स्वीकार नहीं होता था. मगर शैलेन्द्र का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया. उनकी जगह राकेश रंजन को नया जेडीसी चेयरमैन बनाया गया. उन्हें जश्न मनाना था तो कर्मचारियों के प्रमोशन के बहाने संजीव कुमार चौधरी के पास फूल लेकर चले गए.

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ऐसा नहीं है कि फील्ड मैकेनिकल मेंटनेंस विभाग में ओबीसी समुदाय से आने वाले शैलेन्द्र कुमार राय के साथ जो हुआ, वो पहला मामला था. उससे पहले कमेटी मैंबर शुभम सिंह के साथ जो हुआ, उससे सब भीतर से हिल गए. शुभम को प्रॉक्सी पंचिंग में पकड़ा गया. प्रबंधन को कही से भनक लग गई थी. महीनों जांच चली. इसके बाद शुभम सिंह पर कठोर एक्शन लिया गया. उन्हें टाटा स्टील ग़म्हरिया भेज दिया गया. अब वो वहीं के कर्मचारी हो चुके हैं. टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारी नहीं होने के कारण वे न टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य रह गए है और न कमेटी मैंबर  खैर, टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय में जब अभिनंदन और वंदन हुआ तो दूसरे विभागों के कुछ कर्मचारी भी यह तमाशा देख रहे थे.

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वे सब यूनियन कार्यालय से बाहर आए तो किनारे चाय की चुस्कियां लेते हुए जिज्ञासा जताई कि किस बात का अभिनंदन किया गया. यह तो रूटीन कार्य है, जिसमें प्रत्यक्ष तौर पर यूनियन का कोई लेना देना ही नहीं है. एक कर्मचारी ने चुटकी ली कि कुछ दिन बाद किसी वजह से एक के बजाय तीन तारीख को टाटा स्टील में वेतन मिला तो उसके लिए भी ये लोग माला पहन लेंगे, सब ठहाका लगाए.

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