झारखंड, बिहार, बंगाल के गुरुद्वारा प्रधानों ने दिया साथ, चंद्रकोणा के विकास कार्यों को लेकर सर्वसम्मत्ति से लिया गया फैसला
रक्खड़ पूर्णिमा को लेकर सजाये गए विशेष में पहुंची थी संगत
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित पश्चिम मेदनीपुर में सिखों के एतिहासिक गुरुद्वारा नानकसर चंद्रकोणा के नए प्रधान गुरदीप सिंह दीपा होंगे। शुक्रवार को रक्खड़ पुनिया (पूर्णिमा) को लेकर चंद्रकोणा गुरुद्वारा साहेब में सजाये गए विशेष दीवान में पहुंची झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल की संगत और वहां मौजूद विभिन्न गुरुद्वारा कमेटियों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया।

खड़गपुर के ख़रीदा सह चंद्रकोणा गुरुद्वारा के प्रधान इंद्रजीत सिंह सग्गू ने भी इस पर अपनी रजामंदी जताई और समर्थन करते हुए नए प्रधान गुरदीप सिंह को प्रधान घोषित किया और भरोसा दिया कि उनकी पूरी टीम चंद्रकोणा गुरुद्वारा के विकास के लिए गुरदीप सिंह जो फैसले लेंगे उसमें भरपूर सहयोग करेगी। नए प्रधान गुरदीप सिंह सग्गू ने भी उपस्थित समूह संगत को भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में चंद्रकोणा गुरुद्वारा के विकास कार्य तेज किये जायेंगे तांकि यहां जो भी बाहर से संगत आती है उन्हें किसी प्रकार की असुविधा ना हो।

आपको बता दें कि चार माह पूर्व ही इंद्रजीत सिंह सग्गू के नेतृत्व में नई कमेटी बनी थी। खड़गपुर गुरुद्वारा के प्रधान ही चंद्रकोणा गुरुद्वारा की सेवा संभाल करते थे। ऐसे में आज संगत की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीन राज्यों की संगत ने विशेष बैठक कर गुरु घर के विकास के लिए यह जरुरी फैसले लिए। इस विशेष मौके पर चंद्रकोणा के स्थानीय विधायक सुकंतो दलाई, स्थानीय भाजपा जिला अध्यक्ष शिबु चक्रवर्ती, तख्त श्री हरिमंदिर साहेब के महासचिव इंद्रजीत सिंह शामिल रहे। इस दौरान सभी ने नए प्रधान को सम्मानित किया। वहीं चंद्रकोणा कमेटी ने भी बाहर से आये तमाम सिख प्रतिनिधियों को सरोपा पहनाकर सम्मानित किया।

जमशेदपुर से भी सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला अपनी टीम के साथ विशेष आयोजन में शामिल हुए और उन्होंने भी नए प्रधान को शुभकामनायें दी और जमशेदपुर की संगत का हर संभव सहयोग देने का भरोसा नए प्रधान और स्थानीय संगत को दिया। आपको यह भी बता दें कि सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी के समय 15वीं शताब्दी में चंद्रकोणा में आये थे और राजा को वरदान दिया था। उसी राजा ने यहां गुरुद्वारा की स्थापना की थी।
कौन प्रधान कहां से पहुंचे, एक नजर में पढ़ें
धनबाद से गुरचरण सिंह माझा, चास से लखविंदर सिंह, कोलकाता के अंडाल से सोहन सिंह, जमशेदपुर सीजीपीसी से भगवान सिंह, गुरचरण सिंह बिल्ला, सुखविंदर सिंह राजू, सेंट्रल सिख नौजवान सभा अमरीक सिंह, सुरेंद्र सिंह शिंदे, हर्षदीप सिंह, सुखदेव सिंह बिट्टू, सरबजीत सिंह, कुलदीप सिंह खुशीपुरा व तेजपाल सिंह, कोलकाता रासबिहारी गुरुद्वारा सिंह सभा से इंद्रजीत सिंह, आसनसोल से दविंदर सिंह, रानीगंज से भरपुर सिंह, धनबाद जामाडोबा-3 से बलजीत सिंह, गगनदीप सिंह, हैरी सिंह, खड़गपुर से राजेंद्र सिंह आदि।




































