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Tata Workers Union : अध्यक्ष बनने का ख्वाब लिए कमेटी मेंबरों के साथ पुरी गए नितेश राज

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दो साल से खुद की जेब की परवाह किए बगैर कमेटी मेंबर्स को करा रहे सैर

वेज रिवीजन में विलंब और कमेटी मेंबरों पर कार्रवाई के खिलाफ बना रहे माहौल

टुन्नू एवं सतीश से इतर टाटा वर्कर्स यूनियन में तीसरा मोर्चा की कवायद

चरणजीत, सिंह.

टाटा स्टील के कोल्ड रॉलिंग मिल (सीआरएम) से कमेटी मेंबर बनने के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन के सहायक सचिव नितेश राज तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश में हैं. यूनियन में अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी और महामंत्री सतीश कुमार सिंह का अपना अपना खेमा है. यह जगजाहिर भी है. नितेश राज की कोशिश है, कि कमेटी मेंबरों के एक समूह को अपने साथ लिया जाय और उन्हें लगातार खुद से जोड़े रखा जाये.

नितेश आर्थिक तौर पर सबल भी हैं. सो, उन्होंने अपने करीबी कमेटी मेंबरों के साथ पुरी की राह पकड़ी है. सैर सपाटा होगा तो कुछ रणनीति भी बनेगी. समुद्र के किनारे रंगीन पानी का आनंद भी लिया जाएगा. इन कमेटी मेंबरों में अधिकतर न्यू सीरीज ग्रेड से हैं. नितेश को अपनी जेब की परवाह नहीं है. बस बमुश्किल जुड़े साथियों का साथ नहीं छूटना चाहिए. समझा भी रहे है कि आर रवि प्रसाद के कार्यकाल में वेज रिवीजन में विलंब होने पर विपक्षी नेता के नाते हर सप्ताह टुन्नू चौधरी कर्मचारियों को संदेश देते थे कि इससे उन्हें नुकसान हो रहा है.

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तब एनएस ग्रेड के कर्मचारियों के डीए को प्रतिशत में करने या डीए प्रति प्वाइंट वैल्यू बढ़ाने की बात करते थे. अब खुद अध्यक्ष हैं तो वेज रिवीजन में विलंब की चिंता नहीं है. समर्थक कमेटी मेंबरों को यह भी समझाने में लगे है कि टुन्नू के कार्यकाल में सबसे ज्यादा कमेटी मेंबरों पर कार्रवाई हुई है. वे भय की राजनीति कर रहे हैं. नितेश समझा यह भी रहे हैं कि महामंत्री सतीश कुमार सिंह यूनियन अध्यक्ष को सही राह दिखाने में असमर्थ है. इसलिए तीसरा मोर्चा टाटा वर्कर्स यूनियन की जरूरत है. अगली बार यूनियन अध्यक्ष का चुनाव लड़ने और तीसरा मोर्चा बनाने के सवाल पर नितेश राज की प्रतिक्रिया रही, फिलहाल नो कमेंट्स। तनिक इंतजार कीजिए। सब तस्वीर साफ हो जाएगी.

नितेश राज की प्रबल इच्छा टाटा वर्कर्स यूनियन का नेतृत्व करने की है. 2024 में टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव हुआ था. चुनाव होने के दो दिन बाद नितेश राज ने कहा था कि अगली बार वे यूनियन अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे, चाहे निर्दल ही क्यों नहीं मैदान में आना पड़े. नितेश को पता है कि यूनियन अध्यक्ष का चुनाव जीतना है तो 100 से अधिक कमेटी मेंबरों के समर्थन की जरूरत होगी. वे उसी अभियान में लग गए हैं.

दो साल से कमेटी मेंबरों की टोली के साथ सैर सपाटे पर निकल रहे हैं. मौज मस्ती हो रही है तो सहज तरीके से अपनी बात रखने और समझाने का मौका भी मिल रहा है. हां, मोटा खर्च हो रहा है तो क्या. यूथ इंटक के राष्ट्रीय महासचिव का पद पा चुके नितेश राज ने लंबे समय तक टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय को सिंहासन दिलाने के लिए तन, मन और धन से योगदान दिया है. अब नितेश खुद के लिए राह बनाने में लगे है. जाहिर है, उनके ख्वाब ऊंचे हैं और दांव भी.

टाटा वर्कर्स यूनियन की आमसभा की तारीख तय होने के पहले नितेश राज ने कमेटी मेंबरों की पुरी यात्रा की योजना बना ली थी. ट्रेन में वातानुकूलित सीट का टिकट भी बन गया था. इसलिए आमसभा के लिए अपनी सीट के कर्मचारियों की उपस्थिति के कागजात पर पुरी जाने वाले कमेटी मेंबरों ने तत्परता से हस्ताक्षर करा लिए थे ताकि और रुकना न पड़े  कमेटी मेंबर जेपी लंका, उदय कुमार, धनंजय सिंह, सर्वेंद्र झा, मनोज कुमार, दिवाकर कुमार, चंदन गुप्ता, बंटी पांडे, वीरेंद्र प्रधान, राकेश कुमार सिंह, सुशांत शेखर, अभिनंदन सिंह, अमित कुमार सिंह, सत्य प्रकाश, शुभम मिश्रा, राजेश कुमार सिंह, हरिराम शर्मा, मारुति नंदन पांडेय, अमित कुमार, सीएसपी सिंह, पुष्कर आदि पुरी गए हैं.

नितेश के निर्वाचन क्षेत्र के कुछ कर्मचारी भी पुरी यात्रा पर गए हैं. आखिर पहला पड़ाव तो कमेटी मेंबर बनने का ही होता है.नितेश राज की सैर सपाटा की सियासत ने टाटा वर्कर्स यूनियन में सबके कान खड़े कर दिए हैं. घात प्रतिघात की सियासत तेज हो चुकी है. यूनियन में सत्तारूढ़ बड़ा तबका ऐसा है जो इस प्रकरण पर मुंह से मुंह चर्चा फैला रहा है कि यह पूंजीवाद है, न कि मजदूर वाद.हालांकि, नितेश राज को भी मजदूर सियासत का अब लंबा अनुभव हो चला है. उनकी अगली रणनीति गौर करने वाली होगी.

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