Tata Steel : टाटा वर्कर्स यूनियन में एनएस के कमेटी मेंबर सोमवार को दिखाएंगे एका

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प्रतिशत के आधार पर डीए तय कराने के लिए यूनियन के शीर्ष नेतृत्व पर बनाएंगे दवाब

टुन्नू, सतीश और शैलेश से मिलकर एनएस के कमेटी मेंबर जल्द वेज रिवीजन पर बनाएंगे दबाव

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई में अभी तकरीबन साढ़े दस हजार कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें न्यू सीरीज (एनएस) कर्मचारियों की संख्या सात हजार के आसपास है, तो साढ़े तीन हजार ओल्ड सीरीज के कर्मचारी हैं. सबका वेज रिवीजन होना है. वेज समझौता होने में तेरह महीने का विलंब हो चुका है. ओल्ड सीरीज से तुलना करे तो न्यू सीरीज के कर्मचारियों का वेतन आधा या उससे भी कम है. वेज रिवीजन में देरी से एनएस कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है.

उनके कोप के शिकार हो रहे है कमेटी मेंबर. जल्द और बेहतर वेज रिवीजन के लिए एनएस के कमेटी मेंबर तेजी से गोलबंद हो रहे हैं. सोमवार को एनएस के कमेटी मेंबर टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व को अपनी एकता दिखाएंगे. कमेटी मेंबरों द्वारा यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह को एनएस कर्मचारियों के चार्टर ऑफ डिमांड से अवगत कराएंगे. उनकी मुख्य मांग है, डीए का प्रतिशत में निर्धारण. कारण है कि डीए ही भविष्य के बेहतर वेतनमान का निर्धारण करता है.

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टाटा वर्कर्स यूनियन में एनएस के कमेटी मेंबरों की संख्या 80 का आंकड़ा पार कर चुकी है. यूनियन में कुल कमेटी मेंबर 214 है. अभी एनएस से सिर्फ दो ऑफिस बेयरर्स हैं, उपाध्यक्ष संजीव तिवारी और सहायक सचिव श्याम बाबू. शीर्ष तीन समेत 9 ऑफिस बेयरर्स ओल्ड सीरीज के कर्मचारी हैं. एनएस ग्रेड के कमेटी मेंबरों की आपसी कानाफूसी में यह बात आती है कि यूनियन के शीर्ष पर बैठे लीडर ओल्ड सीरीज के हैं और वेज रिवीजन में पहली प्राथमिकता खुद को देते हैं. ओल्ड सीरीज के यूनियन लीडर पहले अपना बचाते हैं, बढ़ाते हैं. फिर एनएस की ओर दिमाग लगाते हैं.

पीएन ने बेहतर एमजीबी का रास्ता बनाया, टेप्स शुरू कराया, रिटायर के बाद रवि ने मेडिकल का इंतजाम कराया

टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रहते रघुनाथ पांडेय ने एनएस ग्रेड के निर्माण का समझौता किया था. समझौता में टेप्स (टिस्को इम्प्लाइज पेंशन स्कीम) का प्रावधान नहीं था. रिटायर होने के बाद मेडिकल की सुविधा भी नहीं दी गई थी. एनएस के डीए को भी प्रतिशत में नहीं रखा गया था, अपितु तीन रुपए प्रति प्वाइंट का निर्धारण किया गया था.

पीएन सिंह ने यूनियन अध्यक्ष रहते एनएस कर्मचारियों के लिए पहला समझौता किया था. उन्हें टेप्स के दायरे में लाया गया. ओल्ड सीरीज के बराबर एमजीबी का उन्होंने रास्ता बना दिया. अगले वेज रिवीजन में आर रवि प्रसाद ने रिटायरमेंट के बाद एनएस के लिए भी मेडिकल सुविधा का प्रावधान करा दिया है. अब एनएस के लिए प्रतिशत में डीए और सालाना बेसिक में तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट का मसला सुलझाना है.

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