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Tata Workers Union : संतोष पांडेय के लिए मजदूर सियासत का अर्थ है, संतोषम परम सुखम

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टुन्नू और सतीश के साथ सालों से साया की तरह दिखते रहे हैं संतोष पांडेय

ऑफिस बेयरर के लिए कभी भी नहीं मिला मौका, ब्राह्मण कार्ड भी चला नहीं

ज्ञानी लीडर शिवेश वर्मा यूनियन उपाध्यक्ष थे, तब उन्हें सिन्टर प्लांट में हराया था

हालात ऐसे कि सब उन्हें मन की सुनाते हैं, उनके मन की सुनने वाले कोई नहीं

चरणजीत सिंह.

टाटा स्टील की मान्यता प्राप्त टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू और महामंत्री सतीश कुमार सिंह के साथ एक लंबा चौड़ा व्यक्ति सालों से दिखता रहा है. नाम है संतोष पांडेय. ये वही संतोष पांडेय हैं जिन्होंने यूनियन उपाध्यक्ष रहते शिवेश वर्मा को कमेटी मेंबर के चुनाव में हराया था. शिवेश वर्मा को मजदूर राजनीति का ज्ञानी पुरुष माना जाता है, जबकि संतोष पांडेय को सीधा सादा इंसान.

संतोष पांडेय के हाथों मिली हार के बाद शिवेश वर्मा अभी तक टाटा वर्कर्स यूनियन के दोबारा ऑफिस बेयरर नहीं बन पाए हैं. जहां तक संतोष पांडेय की बात है तो ऑफिस बेयरर बनना उनके लिए सपना की तरह है. ब्राह्मण कार्ड भी उनके काम नहीं आया है. टुन्नू चौधरी हो या सतीश कुमार सिंह, उनके मन की बात संतोष पांडेय सुनते रहते हैं. संतोष के मन की सुनने वाला कोई नहीं है. अब संतोष पांडेय ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है.

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टुन्नू चौधरी का पैतृक गांव आरा में है। टुन्नू के साथ सरसों के खेत में संतोष

 

अभी तक वे कुछ बोलने से पहले साथियों का मुंह देखते रहे हैं. अब उन्होंने हाउस यानी कमेटी मीटिंग में खुल कर मजदूर हित में बोलने का फैसला लिया है. कमेटी मेंबरों के साथ भी व्यक्तिगत रिश्ते मजबूत करने की योजना बनाई है ताकि भविष्य में ऑफिस बेयरर का चुनाव हो तो दमखम दिखा सके. फिलहाल तो संतोष पांडेय के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन की राजनीति का मतलब है, संतोषम परम सुखम.

टुन्नू के साथ भगवान की पूजा अर्चना

संतोष पांडेय के लिए मजदूर राजनीति कोई नई बात नहीं है. उनके पिता भी लंबे समय तक टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर रहे हैं. वे यूनियन के पूर्व अध्यक्ष अरबीबी सिंह के करीबी थे. उनकी विरासत को संतोष पांडेय ने आगे बढ़ाया. शुरुआती दौर से वे टुन्नू चौधरी के साथ रहे हैं. सतीश कुमार सिंह भी शुरुआती दौर में टुन्नू को ही नेता मानते थे. सो, संतोष पांडेय की सतीश सिंह के साथ गहरा रिश्ता बनता गया.

बिहार के गलहौर गांव में माउंटेनमैन दशरथ मांझी के बेटा भागीरथी मांझी से मिलते सतीश सिंह और संतोष पांडेय

टुन्नू चौधरी या सतीश कुमार सिंह को जब भी जरूरत हुई, संतोष पांडेय हाजिर रहे. पारिवारिक जरूरतों को परे रख टुन्नू या सतीश के लिए कहीं भी निकल गए. अपनी गाड़ी, अपना तेल. संतोष को तब गहरा सदमा लगा जब यूनियन अध्यक्ष बनने के बाद भी टुन्नू ने ऑफिस बेयरर के चुनाव में संतोष को अपनी टीम में मौका नहीं दिया. हालांकि आज भी बहुत खुश या दुखी होने पर संतोष पाण्डेय को टुन्नू चौधरी खोजते हैं. मन की सुनाते हैं.

बिहार के गलहौर गांव में माउंटेनमैन दशरथ मांझी के बेटा भागीरथी मांझी से मिलते सतीश सिंह और संतोष पांडेय

प्रस्तावित ग्रेड रिवीजन में एनएस के डीए में बदलाव को बना रहे मुख्य मुद्दा

टाटा स्टील में ग्रेड रिवीजन में विलंब हो चुका है. संतोष पांडेय को अंदाजा है कि भविष्य में एनएस ग्रेड के कर्मचारियों की संख्या तुलनात्मक तौर पर बढ़ती जाएगी. उनके मुद्दे ज्यादा प्रभावी होंगे. संतोष पांडेय ने एनएस के डीए को अहम मसला बनाया है. कुछ सप्ताह पहले कमेटी मीटिंग हुई थी तो उन्होंने अपने इरादे भी साफ किए. यूनियन नेतृत्व से मांग की कि एनएस के डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू 5 रुपए किया जाय। अभी उनके डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू 3 रुपए है. मांग यह भी है कि एनएस का फिक्स्ड डीए 800 रुपए से बढ़ा कर 5 हजार रुपए किया जाना चाहिए. संतोष की मांग है कि प्रति वर्ष 3 फीसद के हिसाब से एमजीबी तय होना चाहिए.

यदि सात साल के लिए वेज रिवीजन होता है तो एमजीबी 21 प्रतिशत होना चाहिए. पेट्रोल एलाउंस का नए सिरे से निर्धारण जरूरी है. उच्च शिक्षा के लिए शून्य या न्यूनतम दर पर ऋण देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए. सबसे अहम. संतोष चाहते है कि 2023 बैच के ट्रेड अप्रेंटिस का टाटा स्टील में समायोजन होना चाहिए. टुन्नू चौधरी ने इसका वायदा किया था. संतोष इसलिए इस मसले पर जोर दे रहे हैं. वे यह भी मांग कर रहे है कि डीए का स्पेन 20 से बढ़ा कर 25 होना चाहिए.

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