Tatanagar Station : टाटानगर रेल क्षेत्र में जमीन अतिक्रमण का नहीं थम रहा खेल, जिम्मेदार मौन

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 गुदड़ी बाजार के पास स्क्रैप टाल खोलने की चल रही तैयारी

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर स्टेशन के आसपास जमीन अतिक्रमण का खेल धड़ल्ले से जारी है। वह भी उस समय जब स्टेशन विस्तारीकरण की योजना पर युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। हर दूसरे दिन बड़े बड़े अधिकारियों का टाटानगर दौरा जारी है। तब भी स्थानीय जिम्मेदार इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण के खेल की अनदेखी करना अपने आप में बड़ा सवाल उत्पन्न करता है।

इसी मैदान में स्क्रैप टाल बनाने के लिए चल रही तैयारी

ताजा मामले के अनुसार स्टेशन के सामने रेलवे संस्थान के पास पूरे क़्वार्टरों को जमींदोज कर दिया गया, ताकि टाटानगर स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा सके। इसी बीच कई क़्वार्टर खाली पड़े हैं, जिसमें खुलेआम कब्जा करके स्थानीय ठेला वाले उपयोग कर रहे हैं। बिजली भी रेल की उड़ा रहे हैं। इसी तरह गुदड़ी बाजार के पीछे क़्वार्टरों के पास खाली मैदान में दिनदहाड़े घेराबंदी करके स्क्रैप टाल खोलने की तैयारी चल रही है। घेराबंदी करने वाले ये तत्व थाना इलाके के चर्चित बदमाश हैं, जिन पर शायद हाथ डालने से जिम्मेदार कतरा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व शाखा मैदान में भी इनके द्वारा जगह का अतिक्रमण कर उसे बेचने की योजना को अंजाम दिया गया था। हालांकि उसमें स्थानीय लोगों के दबाव में तत्काल हस्तक्षेप कर मामला रफा दफा कर दिया गया था।

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इसी तरह इन गेट के सामने भी धड़ल्ले से अवैध अतिक्रमण फल फूल गया है। स्टेशन इलाके को क्लीन रखने का रेलवे बोर्ड का सख्त निर्देश है, बावजूद उसके विभाग की अनदेखी कहीं न कहीं कुछ खिचड़ी पकाने जैसी साबित होती लगती है। स्टेशन इलाके में इसे लेकर एक आंख में सुरमा और एक आंख में काजल वाली कहावत भी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्यूंकि जहां स्टेशन विस्तारीकरण के नाम पर वर्षों से बसे लीज होल्डर से जगह खाली कराई गई थी, वहां भी अतिक्रमण खुलेआम देखा जा सकता है, जिनपर कार्रवाई तो हो रही है ज़िन्दगी लेकिन उससे इतर स्टेशन के अन्य स्थानों पर अधिकारियों की कृपा बनी हुई है। दूसरी ओर, स्टेशन में फल फुल रहे अतिक्रमण से सड़कों से नालियों तक गंदगी भरी पड़ी है, जो कहीं ना कहीं महामारी को दस्तक दे रही है। इस गंदगी में रोजाना रेलवे को राजस्व देने वाले यात्री आना जाना करते हैं।

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