झारसुगुड़ा वन प्रमंडल की 1.4164 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को Stage-I सैद्धांतिक स्वीकृति, 3 हेक्टेयर में होगा प्रतिपूरक वनीकरण
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर की प्रस्तावित आईबी फ्लाईओवर परियोजना के निर्माण का रास्ता अब एक कदम और साफ हो गया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, भुवनेश्वर ने झारसुगुड़ा जिले के झारसुगुड़ा वन प्रमंडल में परियोजना के लिए 1.4164 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को Stage-I/In-principle मंजूरी प्रदान कर दी है।

मंत्रालय ने यह स्वीकृति Van (Sanrakshan Evam Samvardhan) Adhiniyam, 1980 की धारा 2(1)(ii) के तहत दी है। यह मंजूरी 10 जून 2026 को जारी आदेश के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्ताव संख्या FP/OR/RAIL/510062/2024 के तहत प्रदान की गई है।
स्टेज-II मंजूरी के बाद ही अंतिम रूप से होगा वन भूमि का उपयोग
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह अभी Stage-I यानी सैद्धांतिक मंजूरी है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुपालन की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मंत्रालय की ओर से Stage-II अंतिम मंजूरी जारी की जाएगी। Stage-II मंजूरी मिलने तक वन भूमि को उपयोगकर्ता एजेंसी को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
3 हेक्टेयर खराब वन भूमि पर होगा प्रतिपूरक वनीकरण
स्वीकृति की प्रमुख शर्तों के तहत परियोजना के लिए ली जा रही 1.4164 हेक्टेयर वन भूमि के बदले 3 हेक्टेयर खराब वन भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण किया जाएगा। इसके लिए झारसुगुड़ा वन प्रमंडल के बागडीही रेंज अंतर्गत पितामल PRF की भूमि चिन्हित की गई है। Stage-II मंजूरी की तारीख से दो वर्ष के भीतर निर्धारित योजना के अनुसार पौधरोपण किया जाना है। मंत्रालय ने पौधरोपण में क्षेत्र की देशज प्रजातियों को प्राथमिकता देने और कम से कम 18 माह पुराने पौधों के इस्तेमाल की शर्त रखी है। पौधरोपण की जियो-टैगिंग के माध्यम से निगरानी भी की जाएगी।
पेड़ों की कटाई न्यूनतम रखने का निर्देश
मंजूरी में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों में से अधिकतम संभव संख्या में पेड़ों के प्रत्यारोपण की संभावना तलाश की जाए। पेड़ों की कटाई केवल अपरिहार्य स्थिति में और वन विभाग की निगरानी में ही की जाएगी।
परियोजना के दौरान आसपास के वन क्षेत्र में किसी प्रकार की वनस्पति या पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाने, वन भूमि पर मजदूर कैंप स्थापित नहीं करने तथा वन्यजीवों और आसपास की वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने देने की भी शर्त रखी गई है।
रेलवे लाइन के दोनों ओर होगा पौधरोपण
मंत्रालय ने परियोजना की रेल लाइन के दोनों ओर एवेन्यू प्लांटेशन करने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा प्राकृतिक जलधाराओं, नदियों या नालों पर बनने वाले पुल अथवा कलवर्ट इस तरह डिजाइन करने होंगे कि जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो और जलभराव की स्थिति पैदा न हो। साथ ही वन्यजीवों की आवाजाही भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
NPV और अन्य राशि जमा होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया
राज्य सरकार को 1.4164 हेक्टेयर वन भूमि के लिए निर्धारित Net Present Value (NPV) उपयोगकर्ता एजेंसी यानी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से वसूलना होगा। प्रतिपूरक वनीकरण सहित निर्धारित राशि CAMPA खाते में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा करनी होगी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तों के पूर्ण अनुपालन और आवश्यक राशि जमा होने के बाद ही परियोजना के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
फ्लाईओवर का की-प्लान भी तैयार
परियोजना से संबंधित उपलब्ध की-प्लान में प्रस्तावित फ्लाईओवर का रूट, रेलवे लाइन, सड़क मार्ग तथा विभिन्न गर्डर सेक्शन दर्शाए गए हैं। नक्शे में स्टील गर्डर बॉक्स और कंपोजिट गर्डर से जुड़े हिस्सों को भी चिह्नित किया गया है। इससे प्रस्तावित फ्लाईओवर की संरचना और उसके मार्ग की तस्वीर स्पष्ट होती है।
यह फ्लाईओवर परियोजना झारसुगुड़ा क्षेत्र में रेल यातायात के संचालन को बेहतर बनाने और संबंधित रेल मार्ग पर यातायात के दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, वन भूमि के उपयोग के लिए अभी Stage-II अंतिम मंजूरी बाकी है।
















