5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह समेत कई मांगों को लेकर UFBU का देशव्यापी आंदोलन, 8 लाख बैंककर्मी हड़ताल पर; 25 अक्टूबर तक समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
देशभर में बैंक ग्राहकों के लिए शुक्रवार का दिन परेशानी भरा हो सकता है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल शुरू हो गई है। हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज प्रभावित रहेगा।
इस आंदोलन का असर सिर्फ 11 सितंबर तक सीमित नहीं रहने वाला है। बैंक यूनियनों ने 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को भी एक-एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। यानी सितंबर में बैंकिंग सेवाओं पर कई बार असर पड़ सकता है।
झारखंड में 30 से 35 हजार बैंककर्मी आंदोलन में
झारखंड में बैंक कर्मचारियों के अनुसार करीब 30 से 35 हजार अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में सीधे तौर पर शामिल हैं। विभिन्न शहरों में बैंक शाखाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर कर्मचारी और अधिकारी जुटकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मेदिनीनगर में बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक समेत विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर कर्मचारियों ने तंबू लगाकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। आंदोलन में महिला बैंककर्मी भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं।
आज के बाद लगातार दो दिन छुट्टी, तीन दिन प्रभावित रहेगा कामकाज
11 सितंबर की हड़ताल के बाद 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंक शाखाओं में लगातार तीन दिनों तक सामान्य कामकाज प्रभावित रहेगा।
हालांकि डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और अन्य ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह बंद होना जरूरी नहीं है, लेकिन शाखा आधारित सेवाओं और कुछ बैंकिंग कार्यों पर हड़ताल का असर पड़ सकता है।
क्यों नाराज हैं बैंक कर्मचारी?
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की है। यूनियनों के मुताबिक मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते में शनिवार को अवकाश देने और इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन अतिरिक्त कार्य अवधि को लेकर सहमति बनी थी।
यूनियनों का दावा है कि प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजे जाने के बावजूद अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
इसके अलावा पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती, पुरानी पेंशन व्यवस्था, पेंशन अपडेट, पेंशन पर समान महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों के मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन की वजह बताए जा रहे हैं।
8-9 सितंबर की वार्ता भी नहीं निकाल सकी समाधान
UFBU के अनुसार 8 और 9 सितंबर को मुख्य श्रम आयुक्त तथा उप मुख्य श्रम आयुक्त की मध्यस्थता में वार्ता हुई, लेकिन 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण हड़ताल वापस लेने पर सहमति नहीं बन सकी।
बैंक यूनियनों का कहना है कि कोविड काल सहित मुश्किल परिस्थितियों में बैंक कर्मचारियों ने लगातार सेवाएं दीं। बढ़ते काम के दबाव और तनाव के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह उनकी जायज मांग है।
25 अक्टूबर तक समाधान नहीं तो बड़ा आंदोलन
बैंक यूनियनों ने सरकार को आगे की कार्रवाई को लेकर चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि 25 अक्टूबर 2026 तक मांगों पर समाधान नहीं हुआ, तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।
यानी आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं को लेकर ग्राहकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में जरूरी बैंकिंग काम को समय रहते निपटा लेना ग्राहकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।




































