फतेह लाइव, रेपोर्टर
जमशेदपुर की एसडीजेएम श्रीमती दिव्या अश्विनी की अदालत ने वर्ष 2019 के दहेज प्रताड़ना और अमानत में खयानत के मामले में आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट सौरभ गांधी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। करीब सात वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को अदालत ने मामले में फैसला सुनाया। सौरभ गांधी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने पैरवी और बहस की।

मामला सुंदरनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली पूजा वर्मा उर्फ सुरभि गांधी की शिकायत से जुड़ा है। पूजा वर्मा का विवाह 28 नवंबर 2017 को संबलपुर, ओडिशा निवासी सौरभ गांधी के साथ हुआ था। विवाह के बाद दोनों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। इसके बाद पूजा वर्मा ने वर्ष 2019 में अपने पति सौरभ गांधी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना समेत अन्य आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दहेज की मांग को लेकर उन्हें प्रताड़ित किया गया। साथ ही उनके जेवर लेकर अमानत में खयानत करने का भी आरोप लगाया गया था। मामले की जांच के दौरान अनुसंधानकर्ता ने सौरभ गांधी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों ने अदालत में गवाही दी। वहीं, आरोपी सौरभ गांधी ने भी स्वयं अभियुक्त के तौर पर अदालत में अपनी गवाही दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मामले से जुड़े तथ्यों का परीक्षण किया।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने अदालत में बहस करते हुए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं होने का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को राहत दिए जाने का अनुरोध किया।
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने साक्ष्य के अभाव में सौरभ गांधी को दहेज प्रताड़ना और अमानत में खयानत के आरोपों से बरी कर दिया। करीब सात वर्षों से चले आ रहे इस मामले में फैसला आने के बाद सौरभ गांधी को न्यायिक राहत मिली है।




































