कुपोषण के खिलाफ टाटा स्टील फाउंडेशन की पहल, तीन वर्षों में 3.32 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा व्यापक पोषण अभियान
फतेह लाइव, डेस्क।
हर कुपोषण के आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी छिपी होती है—एक ऐसी मां की कहानी, जो अपने परिवार की थाली को सम्मान और पर्याप्त भोजन से भरने के लिए संघर्ष करती है और एक ऐसे बच्चे की कहानी, जो पढ़ने, हंसने और खेलने के लिए जरूरी ऊर्जा और उत्साह चाहता है।

वर्ष 1982 में फूड एंड न्यूट्रिशन बोर्ड द्वारा 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (National Nutrition Week) मनाने की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि स्वस्थ और पौष्टिक भोजन किसी विशेष वर्ग की सुविधा नहीं, बल्कि विकासशील राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक की मूल आवश्यकता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय पोषण माह (Rashtriya Poshan Maah) के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने का आह्वान किया जाता है।

इसी उद्देश्य के साथ टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) ने वर्ष 2022 में अपनी प्रमुख पोषण पहल ‘प्रोजेक्ट पोषण’ की शुरुआत की। यह परियोजना पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण और किशोरियों तथा प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए समुदाय-केंद्रित और समग्र मॉडल पर काम कर रही है।
झारखंड और ओडिशा में विशेष फोकस
टाटा स्टील अपने कार्यक्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल विकास को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। झारखंड और पड़ोसी ओडिशा में प्रोजेक्ट पोषण के तहत उन क्षेत्रों में लक्षित पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की व्यापक संभावनाएं हैं।
परियोजना के तहत बच्चों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों पर काम किया जा रहा है। इनमें 31 प्रतिशत बच्चों में स्टंटिंग, 29.7 प्रतिशत में कम वजन और 18.1 प्रतिशत में वेस्टिंग जैसे संकेतक शामिल हैं।
तीन वर्षों में 3.32 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच
पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रोजेक्ट पोषण ने अपने कार्यक्षेत्रों में 3 लाख 32 हजार से अधिक लोगों तक व्यापक पोषण सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों की पहुंच बनाई है।
परियोजना के तहत 13 हजार से अधिक गंभीर एवं मध्यम तीव्र कुपोषण (SAM और MAM) से प्रभावित बच्चों को उपचार और पुनर्वास सहायता दी गई। इनमें स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार, समुदाय स्तर पर प्रबंधन और लगातार फॉलोअप जैसी सेवाओं को शामिल किया गया। इसके परिणामस्वरूप इन बच्चों को सामान्य वजन-ऊंचाई स्थिति हासिल करने में सहायता मिली।
55 हजार से अधिक महिलाओं और किशोरियों को एनीमिया से लड़ने में मदद
प्रोजेक्ट पोषण के माध्यम से 55 हजार से अधिक एनीमिया प्रभावित किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और प्रजनन आयु की महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार दर्ज किया गया। इसके लिए पोषण परामर्श, स्वास्थ्य जांच, आयरन-फोलिक एसिड की खुराक से जोड़ने और व्यवहार परिवर्तन संबंधी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।
आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण
परियोजना के तहत 1,657 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) को बच्चों की वृद्धि की निगरानी, कुपोषण की शुरुआती पहचान एवं प्रबंधन, पोषण परामर्श और जरूरत पड़ने पर रेफरल प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
वहीं 980 आशा कार्यकर्ताओं (ASHAs) को समुदाय स्तर पर पहुंच बढ़ाने, पोषण परामर्श, लाभार्थियों की निगरानी तथा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया।
22 हजार से अधिक घरों में पोषण वाटिका
प्रोजेक्ट पोषण के तहत 22 हजार से अधिक घरेलू पोषण वाटिकाएं (Nutrition Gardens) स्थापित और प्रोत्साहित की गईं। इससे परिवारों को पौष्टिक सब्जियों की उपलब्धता बढ़ाने, भोजन में विविधता लाने और घरेलू खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली। इसका विशेष लाभ महिलाओं और बच्चों को मिला।
पोषण से आगे—बेहतर भविष्य की पहल
टाटा स्टील के लिए जिन समुदायों के साथ वह काम करती है, उनका स्वास्थ्य, जरूरतें, आकांक्षाएं और कल्याण उसकी सामाजिक प्रतिबद्धता के केंद्र में हैं। प्रोजेक्ट पोषण इसी सोच का हिस्सा है।
यह पहल केवल कुपोषण से जूझ रहे बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर जीवन के लिए जरूरी उम्मीद, ऊर्जा और पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में एक निरंतर प्रयास है।
एक स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ बचपन और पोषित मातृत्व से तैयार होती है। प्रोजेक्ट पोषण इसी नींव को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि किसी बच्चे का भविष्य भूख और कुपोषण के कारण अधूरा न रह जाए।




































