सुनील महतो हत्याकांड में भूमिका का दावा, कई नक्सली हमलों में शामिल होने की बात कही; मंगल सिंह सरदार और मालती के सरेंडर की जताई संभावना
फतेह लाइव, रिपाेर्टर।
पश्चिम बंगाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले प्रतिबंधित माओवादी संगठन CPI (Maoist) के पूर्व रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन मार्डी ने पूछताछ के दौरान संगठन और उसके सक्रिय सदस्यों को लेकर कई अहम दावे किए हैं। सचिन ने दावा किया है कि वह सांसद सुनील महतो हत्याकांड के ऑपरेशन में शामिल था और राहुल के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया गया था। उसने संगठन से जुड़े कई अन्य हमलों में भी अपनी भूमिका होने की बात कही है।
असीम मंडल पर बड़ा दावा—‘सरेंडर नहीं करेगा’
पूछताछ में सचिन मार्डी ने दावा किया कि वर्तमान में मंगल सिंह सरदार और मालती संगठन से जुड़े प्रमुख लोगों में बचे हैं और आने वाले समय में दोनों आत्मसमर्पण कर सकते हैं। वहीं असीम मंडल को लेकर उसने अलग तस्वीर पेश की।
सचिन के मुताबिक, असीम मंडल बीमार है, लेकिन बीमारी के बावजूद हथियार डालने के लिए तैयार नहीं है। उसका दावा है कि असीम माओवादी विचारधारा को लेकर बेहद कट्टर है और मौत तक संगठन के साथ रहने का फैसला कर चुका है।
हालांकि, असीम मंडल को लेकर किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बंगाल की सरेंडर पॉलिसी ने बदला सचिन का फैसला
पटमदा थाना क्षेत्र के झुझका गांव निवासी सचिन मार्डी ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि पश्चिम बंगाल की आत्मसमर्पण नीति ने उसे संगठन छोड़ने के लिए प्रभावित किया। उसके अनुसार, राहुल के सरेंडर के बाद उसे मिले लाभों की जानकारी होने पर उसने भी आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।
सचिन ने यह भी दावा किया कि संगठन में रहते हुए उसका कार्यक्षेत्र बंगाल का इलाका था। इसी दौरान उसे जोनल कमेटी का सदस्य बनाए जाने की बात भी उसने बताई, हालांकि कुछ कारणों से उसने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।
दलमा के जंगलों में पुलिस का सर्च ऑपरेशन
सचिन मार्डी की निशानदेही पर पुलिस ने दलमा के जंगलों में भी तलाशी अभियान चलाया। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस टीम वाहनों के काफिले के साथ चांडिल पहुंची और स्थानीय सुरक्षा बलों की मदद से दलमा पहाड़ के दुर्गम इलाकों में संभावित ठिकानों की तलाश की।
पुलिस को आशंका थी कि जंगल में पूर्व में नक्सलियों द्वारा हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखा गया हो सकता है। सचिन को साथ लेकर टीम ने कई संभावित स्थानों की तलाशी ली। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान हथियार या गोला-बारूद की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
बाबूडेरा को बताया माओवादियों का अहम ठिकाना
सचिन मार्डी ने पूछताछ में पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा वन क्षेत्र स्थित बाबूडेरा को भी माओवादी संगठन का प्रमुख ठिकाना बताया। उसके अनुसार, यह इलाका संगठन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है और लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के संचालन का केंद्र रहा।
घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सारंडा क्षेत्र को लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां भी संवेदनशील इलाकों में गिनती रही हैं।
‘कमेटी का वजूद खत्म होने के कगार पर’
सचिन ने संगठन की मौजूदा स्थिति को भी बेहद कमजोर बताया है। उसके दावे के मुताबिक, माओवादी कमेटी अब लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच चुकी है।
उसने सारंडा क्षेत्र में संगठन के शीर्ष स्तर पर सक्रिय रहे चार प्रमुख नामों का भी जिक्र किया—मिसिर बेसरा, अनल दा उर्फ पतिराम मांझी, पतिराम मारंडी उर्फ रमेश/तूफान और अनमोल उर्फ सुशांत। सचिन ने इन्हें संगठन की कोर टीम से जुड़े प्रमुख सदस्यों के तौर पर बताया।
कुकड़ू और बुरुडीह हमले में भी भूमिका का दावा
पूछताछ में सचिन मार्डी ने क्षेत्र में हुए कई नक्सली हमलों में अपनी कथित भूमिका का भी जिक्र किया। उसने बुरुडीह और कुकड़ू में पुलिस पर हुए हमलों में शामिल होने का दावा किया है।
उसके मुताबिक, संगठन के लिए बंगाल उसका प्रमुख कार्यक्षेत्र था और इसी दौरान वह माओवादी दस्ते तथा वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में रहा।
छह से शुरू हुआ दस्ता, फिर टूटता चला गया
सचिन के कथित बयान के अनुसार, एक समय छह लोग एक साथ सक्रिय थे। 15 अगस्त से करीब चार दिन पहले असीम मंडल उनसे अलग हो गया। इसके बाद दस्ते में पांच लोग रह गए। बाद में उसके साथ मिता और बुलू के रहने की बात सामने आई।
सचिन के इन दावों से संकेत मिलता है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं के बीच संगठन के पुराने नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, संगठन की वर्तमान स्थिति और सक्रिय सदस्यों की वास्तविक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।




































